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'बुश ने अल क़ायदा को नज़रअंदाज़ किया' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश के एक पूर्व सुरक्षा विशेषज्ञ ने आरोप लगाया है कि राष्ट्रपति बुश ने 11 सितंबर से पहले अल क़ायदा से पैदा होने वाले ख़तरे को नज़रअंदाज़ किया था. उनका कहना है कि 11 सितंबर के हमलों के बाद वे इराक़ पर हमला करने के किसी कारण की ख़ोज कर रहे थे. ये आरोप सुरक्षा सलाहकार रिचर्ड क्लार्क की सोमवार को प्रकाशित होने वाली पुस्तक में लगाए गए हैं. लेकिन व्हाइट हाऊस ने इन आरोपों का ज़ोरदार खंडन करते हुए चार पन्ने का बयान जारी किया है. लापरवाही? बीबीसी संवाददाता जस्टिन वेब का कहना है कि रोनल्ड रीगन के समय से हर अमरीकी राष्ट्रपति के साथ काम करने वाले रिचर्ड क्लार्क की बहुत इज़्ज़्त की जाती है.
उनका कहना है कि इन आरोपों से बुश प्रशासन को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. क्लार्क के अनुसार एक बैठक में रक्षा उप मंत्री पॉल वुल्फ़ोविट्स ने कहा, "हमें अल क़ायदा की चिंता करने की क्या ज़रूरत है? हमें इराक़ी आतंकवाद की बात करनी चाहिए." क्लार्क का कहना है कि 11 सितंबर के हमलों के बाद रक्षा मंत्री डॉनल्ड रम्सफ़ेल्ड दबाव डाल रहे थे कि इराक़ के ख़िलाफ़ बदले की कार्रवाई की जाए. जब क्लार्क ने कहा कि अल क़ायदा तो अफ़ग़ानिस्तान में स्थित है तो उनके अनुसार रम्सफ़ेल्ड का कहना था कि अफ़ग़ानिस्तान में बहुत कम लोग हैं जिन्हें निशाना बनाया जा सकता है. क्लार्क का ये भी दावा है कि राष्ट्रपति बुश ने ख़ुद उनसे कहा, "मैं चाहता हूँ कि आप पता लगाएँ कि क्या ये इराक़ की कार्रवाई है?" उनके दोबारा ये बताने के बावजूद भी कि इराक़ का 11 सितंबर की घटनाओं से कोई लेना-देना नहीं, आरोप है कि राष्ट्रपति बुश का कहना था, "पता लगाएँ कि इराक़, सद्दाम... का इसमें कोई हाथ है?" व्हाइट हाऊस का कहना है कि ऐसी बातचीत का उसके पास कोई रिकॉर्ड नहीं है. |
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