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'इराक़ पर हमला एक भारी भूल' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीकी राष्ट्रपति के पूर्व आतंकवाद निरोधक सलाहकार रिचर्ड क्लार्क ने उन नाकामियों के लिए माफ़ी माँगी है जिनके परिणामस्वरूप 11 सितंबर 2001 के हमले हुए. 11 सितंबर के पूर्व के हालात के बारे में सुनवाई कर रहे राष्ट्रीय आयोग के सामने पेश होते हुए क्लार्क ने कहा कि वह ख़ुद और अमरीकी सरकार 11 सितंबर के हमलों में मारे गए लोगों और उनके रिश्तेदारों की उम्मीदों पर खरे नहीं उतर सके हैं. क्लार्क ने कहा कि बुश प्रशासन ने आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई को प्राथमिकता तो बनाया था लेकिन उसे बहुत महत्वपूर्ण नहीं माना जबकि क्लिंटन प्रशासन ने इसे सर्वोच्च प्राथमिकता पर रखा. क्लार्क ने अपनी पुस्तक में लिखी वे दलीलें फिर दोहराईं कि राष्ट्रपति बुश ने इराक़ पर हमला करके आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई के महत्व को कम किया है. ग़ौरतलब है कि रिचर्ड क्लार्क ने हाल में प्रकाशित अपनी पुस्तक में आरोप लगाया है कि राष्ट्रपति बुश ने अल क़ायदा के ख़तरे को गंभीरता से नहीं लिया क्योंकि उन पर इराक़ पर हमला करने का जुनून सवार था. वाशिंगटन में बीबीसी संवाददाता का कहना है कि व्हाइट हाउस रिचर्ड क्लार्क के आरोपों को झूठा साबित करने लिए बाक़ायदा एक अभियान चला रहा है. टेनेट इससे पहले ख़ुफ़िया एजेंसी सीआईए के निदेशक जॉर्ज टेनेट ने कहा कि 11 सितंबर के हमलों के बारे में राष्ट्रपति बुश को पहले से चेतावनी देना इसलिए संभव नहीं था क्योंकि इस बारे में कोई ठोस सूचनाएं उपलब्ध नहीं थीं. टेनेट ने ऐसे आरोपों का खंडन किया है कि राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने 11 सितंबर 2001 के हमलों से पहले अल क़ायदा के ख़तरों को कम करके आँका. आयोग के सामने पेश होते हुए टेनेट ने कहा कि अधिकारी अल क़ायदा के ख़तरे का मुक़ाबला करने के लिए एक व्यापक योजना बनाने की तैयारी कर रहे थे. टेनेट ने बताया कि अधिकारियों को विभिन्न हमलों की चेतावनियाँ तो मिली थीं लेकिन इस बारे में कोई भी कार्रवाई करने के लिए पर्याप्त जानकारी उपलब्ध नहीं थी. टेनेट ने कहा कि अल क़ायदा महाविनाश के हथियार हासिल करने पर उतारू था और अमरीका को इस ख़तरे का मुक़ाबला करने के लिए और मानव एजेंटों की ज़रूरत थी. |
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