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प्रस्ताव पारित होने का स्वागत | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इराक़ में 30 जून को सत्ता हस्तांतरण के बाद देश के भविष्य के बारे में सुरक्षा परिषद में पारित प्रस्ताव का अनेक देशों के नेताओं ने स्वागत किया है. यह प्रस्ताव अमरीका और ब्रिटेन ने पेश किया था जिस पर फ्रांस और जर्मनी ने आपत्ति जताई थी. फ्रांस को आपत्ति थी कि इराक़ी सरकार को विदेशी सेनाओं की कार्रवाइयों को वीटो करने का अधिकार होना चाहिए. उनकी आपत्तियों को दूर करने के लिए मसौदे में पाँच बार संशोधन के बाद प्रस्ताव को मंगलवार आठ जून को पारित किया जा सका. भारत ने भी प्रस्ताव के पारित होने का स्वागत किया है. भारतीय विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा है,"भारत इराक़ पर सर्वसम्मति से पारित प्रस्ताव का स्वागत करता है और ये आशा करता है कि संयुक्त राष्ट्र इराक़ के विकास में केंद्रीय भूमिका निभाएगा". इराक़ प्रस्ताव को सुरक्षा परिषद की मंज़ूरी मिलना का मुद्दा विकसित देशों के संगठन जी-8 की बैठक में भी छाया रहा. जी-8 का सम्मेलन अमरीका के ज्यार्जिया राज्य में मंगलवार को शुरु हुआ. अमरीका के राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने कहा कि इस प्रस्ताव का पारित होना इराक़ी लोगों की जीत है. बुश ने प्रस्ताव पारित कराने में मदद के लिए ख़ासतौर पर रूस के राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन का शुक्रिया अदा किया.
पुतिन ने प्रस्ताव के पारित होने को एक महत्पपूर्ण क़दम बताया है. ब्रिटेन के प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने कहा कि प्रस्ताव ने इराक़ी लोगों को यह दिखा दिया है कि उनकी मदद के लिए विश्व समुदाय एकजुट है. ब्लेयर ने कहा कि प्रस्ताव में इस बात का पूरा ध्यान रखा गया है कि इराक़ी लोगों को सत्ता का ठोस और संप्रभु हस्तांतरण हो. जी-8 संगठन की इस बैठक में मौजूद बीबीसी संवाददाता का कहना है कि प्रस्ताव के पारित होने से इराक़ मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय समर्थन हासिल करने के अमरीकी प्रस्तावों को बड़ी मदद मिली है. और अमरीका इस प्रस्ताव को मध्य पूर्व में राजनीतिक सुधारों के अपनी योजनाओं पर अमल करने के लिए भी अंतरराष्ट्रीय समुदाय के समर्थन के रूप में देख रहा है. |
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