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शुक्रवार, 04 जून, 2004 को 20:04 GMT तक के समाचार
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सवाल-जवाब: इराक़ में सत्ता हस्तांतरण
फ़लुजा में इराक़ी सुरक्षाकर्मी
इराक़ी सुरक्षा बलों की भूमिका पर सवाल
अमरीकी प्रशासन ने घोषणा की थी कि वह 30 जून को इराक़ के अंतरिम प्रशासन को सत्ता सौंप देंगा. लेकिन नियत समय से दो दिन पहले यानी 28 जून को ही सत्ता सौंप दी गई है. सत्ता परिवर्तन और उसके बाद की स्थिति से जुड़े सवाल-जवाब.

सत्ता परिवर्तन से क्या होगा?
अंतरिम इराक़ी सरकार को सत्ता सौंपने के बाद गठबंधन प्रशासन का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा और इसके प्रमुख पॉल ब्रेमर अमरीका लौट जाएँगे. कम से कम सिद्धांत रूप में अमरीकी गठबंधन का इराक़ पर क़ब्ज़ा समाप्त हो जाएगा.

अंतरिम सरकार में कौन लोग होंगे?
सर्वाधिक महत्वपूर्ण प्रधानमंत्री का पद शिया मूल के डॉक्टर इयाद अलावी के पास होगा.
एक राष्ट्रपति भी होंगे और दो उपराष्ट्रपति. इनके पास कार्यकारी ताक़त नहीं के बराबर होगी, लेकिन जनमत पर इनका असर होगा. राष्ट्रपति सुन्नी मूल के सिविल इंजीनियर ग़ाज़ी यावर होंगे, जबकि उपराष्ट्रपति शिया नेता इब्राहिम जाफ़री और कुर्द नेता रॉश शावेय.

क्या अंतरिम सरकार संप्रभु होगी?
इसके पास बहुत कम अधिकार होंगे और यह सही मायनों में संप्रभु नहीं होगी. उदाहरण के लिए अंतरिम सरकार मूलभूत क़ानूनों में बदलाव नहीं कर सकेगी. अमरीका और ब्रिटेन को भी यह एहसास है कि जब तक अंतरिम सरकार को विदेशी सेना को देश से बाहर जाने के लिए कहने का अधिकार नहीं हो और उसके नियंत्रण में सुरक्षा व्यवस्था नहीं हो, तो उसे संप्रभु नहीं कहा जा सकता. अंतरिम सरकार ही औपचारिक रूप से तेल की आय पर नियंत्रण रखेगी, लेकिन इस साल का बजट पहले से ही तय किया जा चुका है इसलिए असल प्रभाव नाममात्र का ही होगा. अमरीकी सहायता पर नियंत्रण अमरीकी दूतावास का ही रहेगा.

सुरक्षा पर सरकार का कितना नियंत्रण होगा?
सिद्धांत रूप में इसे विदेश सेनाओं से देश से निकलने के लिए कहने का अधिकार होगा लेकिन वह इसका प्रयोग नहीं करेगी क्योंकि सरकार में शामिल लोगों ने अमरीका और सहयोगी देशों की सेनाओं के इराक़ में बने रहने का समर्थन किया है.

विदेशी बलों की तैनाती के बारे में राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की बात चलेगी. एक इराक़ी इसका अध्यक्ष होगा जबकि अमरीकी और ब्रितानी जनरल इसमें शामिल रहेंगे.

इराक़ी बलों की तैनाती के बारे में अधिकार अंतरिम सरकार के पास ही होंगे.

अमरीका, ब्रिटेन और अन्य देशों के सैनिकों का क्या होगा?
अंतरिम सरकार के औपचारिक आग्रह पर वे इराक़ में बने रहेंगे. यदि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद नया प्रस्ताव पारित करती है तो विदेशी सैनिकों की तैनाती को अंतरराष्ट्रीय वैधता भी मिलेगी.

योजना ये है कि विदेशी सैनिक के बज़ाय मुख्य भूमिका इराक़ी बलों की हो.

अफ़ग़ानिस्तान और बोस्निया जैसी व्यवस्था कर विदेशी सैनिकों को, जो कि बहुराष्ट्रीय बल के नाम से जाने जाएँगे, स्थानीय क़ानूनों से छूट दी जाएगी.

ब्रिटेन और अमरीका चाहेंगे कि चुनावों की देखरेख करने वाली संयुक्त राष्ट्र टीम की सुरक्षा के लिए संयुक्त राष्ट्र का अलग से एक सुरक्षा बल हो.

वर्ष 2005 के अंत तक एक निर्वाचित सरकार के सत्ता में आने के बाद विदेशी सैनिकों के अधिकार ख़त्म हो जाएँगे लेकिन नई सरकार उनमें से कुछ को आगे के लिए भी रोक सकेगी.

अंतरिम सरकार कब तक चलेगी?
ऐसा विचार है कि अंतरिम सरकार नेशनल एसेंबली का चुनाव होने तक सत्ता में रहे जो कि इस साल दिसंबर या अगले साल जनवरी तक करा लिए जाएँ. बहुसंख्यक शिया नहीं चाहते कि चुनावों से पहले सरकार को ज़्यादा अधिकार हो.

अंतरिम सरकार के बाद क्या होगा?
निर्वाचित नेशनल एसेंबली कार्यवाहक सरकार की तरह काम कर सकेगी. उसे क़ानून बनाने के भी अधिकार होंगे.

बाद में नया संविधान लिखा जाएगा और उस पर अगले साल बाद में जनमत संग्रह कराया जाएगा. वर्ष 2005 के अंत तक आम चुनाव कराए जाएँगे और 2006 के शुरू में निर्वाचित इराक़ी सरकार सत्ता सँभाल लेगी.

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