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गुरुवार, 03 जून, 2004 को 22:52 GMT तक के समाचार
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योजना पर इराक़ की सहमति
होशियार ज़ेबारी
होशियार ज़ेबारी ने संयुक्त राष्ट्र में इराक़ की संप्रभुता का मसला उठाया
इराक़ी विदेश मंत्री ने इस माह के अंत तक सत्ता के हस्तांतरण की संयुक्त राष्ट्र की योजना को आम तौर पर मंजूरी दे दी है.

मगर साथ ही उन्होंने स्पष्ट रूप से ये भी कह दिया है कि हस्तांतरण के बाद नए प्रस्ताव के ज़रिए इराक़ को पूर्ण संप्रभुता मिलनी चाहिए.

उधर सुरक्षा परिषद के कुछ अन्य सदस्यों ने संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव में तब्दीलियों की माँग की है.

इराक़ी विदेश मंत्री की इस सहमति के बाद अमरीका और ब्रिटेन को इस प्रस्ताव पर ज़्यादा समर्थन मिल सकता है.

सुरक्षा परिषद के भाषण में होशियार ज़ेबारी ने कहा कि प्रस्ताव को 'वास्तविक हस्तांतरण' पर सहमति देनी चाहिए.

फिर उन्होंने ये भी कहा कि संयुक्त राष्ट्र का नया प्रस्ताव ऐसा करने में सक्षम दिखता है.

ज़ेबारी का ये भी कहना था कि इराक़ी ज़मीन पर अमरीकी नेतृत्व वाली सेनाओं की मौजूदगी के बारे में इराक़ का मत भी लिया जाना चाहिए.

विदेश मंत्री ने कहा कि सभी संसाधनों और संपदाओं पर इराक़ का अपना नियंत्रण होना चाहिए.

ज़ेबारी के बोलने से पहले ही सुरक्षा परिषद के कुछ सदस्य कह चुके थे कि इस प्रस्ताव में कुछ तब्दीलियों की ज़रूरत है तभी उसका समर्थन किया जा सकता है.

रूस के विदेश उपमंत्री यूरी फ़ेदोतोव ने कहा, "हमें अब भी कुछ चिंताएँ हैं इसलिए इसकी भाषा में कुछ गंभीर बदलाव की ज़रूरत है."

 हमें अब भी कुछ चिंताएँ हैं इसलिए इसकी भाषा में कुछ गंभीर बदलाव की ज़रूरत है
यूरी फ़ेदोतोव, रूसी विदेश उपमंत्री

सुरक्षा परिषद के कुछ सदस्य देशों का कहना है कि इराक़ी ज़मीन पर विदेशी सेनाएँ अगर किसी तरह की कार्रवाई करना चाहें तो उसके लिए इराक़ी सरकार से अनुमति लेने का प्रावधान होना चाहिए.

फ़ेदोतोव की टिप्पणी इराक़ में अमरीकी राजदूत जॉन नीग्रोपोंट की उस बात से अलग ही थी जिसमें उनका कहना था कि प्रस्ताव की भाषा में मामूली बदलाव करना होगा.

इससे पहले इराक़ से सबसे प्रभावशाली शिया नेता अयातुल्ला अली अल-सिस्तानी ने इराक़ की नई सरकार को समर्थन तो दिया मगर ये भी कहा कि सरकार को सुरक्षा परिषद से पूर्ण संप्रभुता की माँग करनी चाहिए.

ज़ेबारी ने सुरक्षा परिषद में भाषण से पहले वहाँ मौजूद राजनयिकों से भी बातचीत की.

इस प्रस्ताव के बारे में ज़ेबारी का कहना था कि ये प्रस्ताव इराक़ियों के लिए ख़ासा महत्त्वपूर्ण है और उसमें इराक़ियों का मत भी स्वीकार किया जाना चाहिए.

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