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इराक़ पर नया प्रस्ताव | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इराक़ के भविष्य पर अमरीका और ब्रिटेन ने अपना संशोधित प्रस्ताव संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में पेश किया है जिसमें सेना को हटाने की समय-सीमा तय करने की बात है. नए प्रस्ताव में कहा गया है कि इराक़ में राजनीतिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद यानि लोकतांत्रिक चुनावों के बाद सेना वापस आ जाएगी. लेकिन साथ ही ये भी कहा गया है कि अगर इराक़ की तत्कालीन सरकार चाहेगी तो ये सेना वहाँ उसके बाद भी रुक सकती है. सुरक्षा परिषद में जिस नए प्रस्ताव पर अब विचार जारी है उसे चीन सहित कई देशों की आपत्ति के बाद लाया गया है. सुरक्षा परिषद के कई सदस्यों ने अमरीका और ब्रिटेन के पहले प्रस्ताव पर अपनी आपत्ति ज़ाहिर की थी. उनका कहना था कि इराक़ियों को अपने सैनिक मामले पर पूर्ण नियंत्रण नहीं दिया गया है और न ही सेना की वापसी की समय सीमा तय की गई है. अमरीका और ब्रिटेन के नए प्रस्ताव में इराक़ से अमरीका की अगुआई वाली गठबंधन सेना की वापसी की एक समयसीमा तय करने की बात से इन देशों की आपत्ति कम होने की उम्मीद जताई जा रही है. सारी बहस इस साल जून के अंत में होने वाले सत्ता के हस्तांतरण और उसके बाद के इराक़ से जुड़ी है. अमरीका ने कह दिया है कि जून के बाद इराक़ी अपनी सत्ता ख़ुद संभालेंगे लेकिन कई देश संयुक्त राष्ट्र में ये बात कह चुके हैं कि सत्ता का वास्तविक हस्तांतरण ज़रूरी है जो अमरीकी नेतृत्ववाले गठबंधन की सेना के हटने से जुड़ा है. लेकिन इस नए प्रस्ताव को लेकर अभी काफ़ी काम होना बाक़ी है. सुरक्षा परिषद के सदस्य इराक़ के नए विदेश मंत्री होशियार ज़बारी से न्यूयॉर्क में बात करेंगे जो इस हफ़्ते वहाँ पहुँच रहे हैं. ये अभी तय नहीं किया गया है कि इस नए प्रस्ताव पर वोट कब किया जाएगा. विवाद लेकिन कुछ संशोधनों के बावजूद भी इस प्रस्ताव में कुछ विवाद क़ायम हैं. प्रस्ताव में कहा गया है इराक़ी पुलिस और सेना का नियंत्रण इराक़ियों के हाथों में होगा. लेकिन साथ ही ये भी कहा गया है कि गठबंधन सेना को देश की सुरक्षा व्यवस्था क़ायम करने के लिए सभी ज़रूरी क़दम उठाने का अधिकार होगा.
कुछ देशों को इस पर आपत्ति है कि प्रस्ताव में इसका कोई उल्लेख नहीं है कि क्या किसी सैनिक कार्रवाई पर इराक़ की सरकार को वीटो करने का अधिकार होगा या नहीं. सुरक्षा परिषद के कुछ सदस्यों का कहना है कि प्रस्ताव में यह बात शामिल हो कि गठबंधन सेना की किसी भी सैनिक कार्रवाई से पहले इराक़ी सरकार से सलाह-मशविरा किया जाए. लेकिन अमरीका की अगुआई वाले गठबंधन का कहना है कि इराक़ी सरकार के साथ उसके रिश्ते कैसे होंगे,यह दोनों के बीच लिखित रूप में तय होगा. अब सुरक्षा परिषद के सदस्यों का कहना है कि वे इस बारे में ख़ुद इराक़ियों की राय जानना चाहते हैं. उम्मीद जताई जा रही है कि इराक़ की नई सरकार का एक प्रतिनिधिमंडल इसी सप्ताह सुरक्षा परिषद में अपनी बात रखेगा. संयुक्त राष्ट्र चिली सहित सुरक्षा परिषद के सदस्य देशों की राय है कि इराक़ी विदेश मंत्री के अलावा वो इराक में संयुक्त राष्ट्र के प्रतिनिधि लखदर ब्राहिमी की राय भी जानना चाहेंगे. संयुक्त राष्ट्र से बीबीसी संवाददाता सुज़ाना प्राइस का कहना है कि अभी तक ये भी साफ़ नहीं है कि इराक़ की नई सरकार कैसे चुनी गई. ब्रिटेन और अमरीका का कहना है कि सरकार संयुक्त राष्ट्र ने चुनी लेकिन संयुक्त राष्ट्र के अधिकारी कह रहे हैं कि अमरीकी नेतृत्व वाले गठबंधन इस प्रक्रिया के पीछे थे. साथ ही संयुक्त राष्ट्र के महासचिव कोफ़ी अन्नान ने कहा है कि लखदर ब्राहिमी को इस मामले में कुछ समझौते करने पड़े. |
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