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ग़ाज़ी अल यावर:एक क़बायली नेता | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इराक़ में अंतरिम सरकार के लिए राष्ट्रपति मनोनीत हुए ग़ाज़ी अल-यावर एक क़बायली नेता हैं और इस समय इराक़ी प्रशासनिक परिषद के प्रमुख हैं. ऐसे समय में जब अमरीका इराक़ के पूर्व विदेश मंत्री अदनान पचाची को राष्ट्रपति बनाना चाहता था, इराक़ी परिषद के ज़्यादातर सदस्य 45 वर्षीय सुन्नी मुस्लिम नेता ग़ाज़ी अल-यावर के पक्ष में थे. उत्तरी इराक़ के मूसल शहर के प्रमुख क़बायली नेता ग़ाज़ी अल-यावर आमतौर पर परंपरागत अरब वेशभूषा में ही दिखाई देते हैं. हालांकि उन्होंने जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी, वाशिंगटन से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है और वे सऊदी अरब में कई वर्षों में एक टेलीकॉम कंपनी चलाते रहे हैं. इराक़ी परिषद के प्रमुख बनने के बाद से उन्होंने अमरीकी नेतृत्व वाली सेना के ख़िलाफ़ हिंसा की आलोचना की लेकिन उसी समय उन्होंने लचर सुरक्षा व्यवस्था के लिए अमरीकी सेना की भी आलोचना की. वे इराक़ियों को सत्ता सौंपने के लिए बनाए गए अमरीकी प्रस्तावों के कड़े आलोचक भी रहे. ग़ाज़ी अल-यावर का कहना है कि इस प्रस्ताव में अंतरिम सरकार को अमरीकी गठबंधन सेना पर बहुत कम नियंत्रण का अधिकार दिया गया है. थोड़े दिन पहले उन्होंने लंदन के एक अरबी अख़बार को दिए गए इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि वे तब तक राष्ट्रपति का पद स्वीकार नहीं करेंगे जब तक उन्हें पर्याप्त अधिकार नहीं दिए जाते. उन्होंने इन ख़बरों पर भी आपत्ति जताई थी कि अमरीकी अधिकारी पूर्व राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन के महल में बने रहना चाहते हैं और बाद में उसे दूतावास की तरह उपयोग में लाना चाहते हैं. उन्हें इराक़ के कई जातीय और धार्मिक संगठनों का समर्थन प्राप्त है. |
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