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इराक़ प्रस्ताव पर विशेष सत्र में चर्चा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद इराक़ में इस महीने की 30 तारीख़ को सत्ता हस्तांतरण के बाद अमरीकी नेतृत्व वाली सेनाओं पर नियंत्रण के बारे में विभिन्न प्रस्तावों पर एक विशेष सत्र में विचार रही है. अमरीका और इराक़ की नई अंतरिम सरकार दोनों ने ही इस बारे में सुरक्षा परिषद को पत्र लिखे हैं कि सत्ता हस्तांतरण के बाद अमरीकी सेनाओं के अभियानों पर इराक़ सरकार का किस हद तक नियंत्रण हो. अमरीका के विदेश मंत्री कॉलिन पॉवेल और इराक़ के नए प्रधानमंत्री ईयाद अलावी, दोनों ने ही अपने-अपने पत्रों में कहा है कि संवेदनशील सैन्य अभियानों के बारे में एक व्यापक नीतिगत समझौता हो गया है. ये सभी बातें उस प्रस्ताव में शामिल हैं जो अमरीका और ब्रिटेन ने इराक़ के भविष्य के बारे में सुरक्षा परिषद में पेश किया है. इराक़ के प्रधानमंत्री ईयाद अलावी ने अपने पत्र में कहा है कि देश की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विदेशी सेनाओं को वहाँ ठहरना चाहिए. उधर कॉलिन पॉवेल ने अपने पत्र में कहा है कि अमरीका इराक़ की बुनियादी सुरक्षा और नीतिगत मुद्दों पर इराक़ सरकार को सहयोग करता रहेगा. पत्र में कहा गया है कि इनमें संवेदनशील सैन्य अभियान भी शामिल हैं. लेकिन इन पत्रों में इस बारे में कुछ भी नहीं कहा गया है कि क्या इराक़ी सरकार को विवादास्पद सैन्य अभियानों को वीटो करने का अधिकार होगा या नहीं. ना ही इस बारे में कुछ गया गया है कि अमरीकी सेनाओं को कोई बड़ा या संवेदनशील अभियान चलाने के लिए इराक़ सरकार की इजाज़त ज़रूरी होगी या नहीं. अमरीका और इराक़ सरकार के बीच ख़ासतौर से यह एक बड़ा मुद्दा था कि फ़लूजा जैसे अमरीकी सैन्य अभियानों पर सरकार को वीटो का अधिकार हो या नहीं. फ़लूजा में अमरीकी सेनाओं ने महीने भर घेराबंदी करके कार्रवाई की थी जिसमें सैकड़ों इराक़ी मारे गए थे. संयुक्त राष्ट्र में अमरीकी राजदूत जॉन नीग्रोपोंटे ने कहा है कि मंगलवार तक संभवतः इस प्रस्ताव पर मतदान हो जाएगा. |
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