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'इराक़ सरकार ने कहा तो देश छोड़ देंगे' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका और ब्रिटेन ने सुरक्षा परिषद में इराक़ से जुड़ा संशोधित प्रस्ताव रखा है. नए प्रस्ताव में स्पष्ट रूप से कहा गया कि अगर इराक़ी सरकार ने कहा तो अमरीकी नेतृत्व वाली सेनाएँ देश छोड़ देंगी. एक अन्य स्पष्टीकरण के अनुसार इस प्रस्तावित मसौदे में कहा गया है कि इस तरह का आग्रह अगले साल चुनी जाने वाली इराक़ी सरकार ही नहीं बल्कि अभी वहाँ काम कर रहा अंतरिम प्रशासन भी कर सकता है. इससे पहले इराक़ के नए प्रधानमंत्री ईयाद अलावी ने टेलीविज़न पर पहला भाषण देता हुआ कहा कि इराक़ को पूर्ण संप्रभुता मिलने के बाद भी वहाँ विदेशी सेना की ज़रूरत पड़ती ही रहेगी. उन्होंने अमरीका को एक दोस्त बताया मगर ये भी कहा कि इराक़ के लोग अब सत्ता इराक़ियों के हाथ में ही देखना चाहते हैं. कुछ देशों का ऐतराज़ संयुक्त राष्ट्र में पहले जो प्रस्ताव रखा गया था उस पर चीन, रूस और फ़्रांस ने कुछ आपत्ति दर्ज कराई थी. इसके अलावा इराक़ के विदेश मंत्री होशियार ज़ेबारी ने भी गुरुवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कुछ ऐसी टिप्पणियाँ की थीं जिनसे संकेत मिलता था कि वह भी प्रस्ताव में कुछ संशोधन चाहते हैं.
अब नए प्रस्ताव में इस बात पर ज़ोर दिया गया है कि सरकार को पूरी ज़िम्मेदारी सौंपी जाएगी. ज़ेबारी ने इस नए प्रस्ताव का स्वागत करते हुए कहा है कि इराक़ से अमरीकी नेतृत्व वाली सेनाओं को तुरंत ही देश छोड़ने के लिए कहने की बात अभी एक काल्पनिक स्थिति ही है. वैसे इस नए प्रस्ताव में भी इराक़ की नई सरकार और बहुराष्ट्रीय सेना के बीच रिश्तों को लेकर शब्दावली में कोई ख़ास बदलाव नहीं किया गया है. फ़्रांस और अन्य देश चाहते थे कि इराक़ में सैनिक कार्रवाइयों पर इराक़ का ही अधिकार होना चाहिए. आम सहमति वैसे अभी तक नया प्रस्ताव स्वीकार करने के लिए कोई अंतिम समय सीमा तय नहीं की गई है. मगर अमरीकी अधिकारियों ने उम्मीद जाहिर की है कि प्रस्ताव में सिर्फ़ मामूली बदलाव ही करने होंगे और परिषद की सहमति इसे मिल जाएगी. अमरीकी विदेश विभाग के प्रवक्ता ने इस बारे में कहा, "हम अच्छी प्रगति कर रहे हैं. मुझे लगता है कि हम आम सहमति की ओर बढ़ रहे हैं." इस बीच अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश ने संयुक्त राष्ट्र में अमरीका के नए राजदूत के नाम की घोषणा कर दी है. ये ज़िम्मा जॉन डैनफ़ॉर्थ को दी गई है. सीनेट की मंज़री के बाद वह जॉन नीग्रोपोंटे की जगह सँभालेंगे जो कि अब इराक़ में अमरीका के नए राजदूत नियुक्त किए गए हैं. |
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