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इराक़ के भविष्य पर चर्चा, फ़्रांस को अब भी आपत्ति | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद इराक़ के भविष्य को लेकर पेश किए गए प्रस्ताव पर फिर से विचार-विमर्श कर रही है. अमरीका और ब्रिटेन के इस संशोधित प्रस्ताव में 30 जून को सत्ता हस्तांतरण के बाद इराक़ी सरकार के स्वरूप और उसके अधिकार का ज़िक्र है. वैसे फ़्रांस का कहना है कि प्रस्ताव में इस बात का भी ज़िक्र हो कि इराक़ में अमरीका की किसी तरह की सैनिक कार्रवाई से पहले उसे इराक़ी सरकार की मंज़ूरी मिलनी चाहिए. फ़्रांस के साथ-साथ जर्मनी की भी यही राय है. अब फ़्रांस और जर्मनी की माँग पर अमरीका का क्या रुख़ होता है इसी से प्रस्ताव के पास होने का रास्ता तय होगा. उम्मीद अमरीका ने उम्मीद जताई है कि अगले कुछ दिनों में सुरक्षा परिषद इस प्रस्ताव को पास कर देगी. अमरीका के राष्ट्रपति जॉर्ज बुश की राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार कोंडोलीज़ा राइस ने कहा है कि प्रस्ताव को लेकर सुरक्षा परिषद के सदस्य देशों के साथ बातचीत अपने अंतिम दौर में है. रूस के उप विदेशमंत्री यूरी फ़ेदोतोव ने कहा है कि प्रस्ताव के मसौदे में काफ़ी सुधार हुआ है और अब रूस, चीन, फ़्रांस, जर्मनी और सुरक्षा परिषद के अन्य सदस्यों की बातों को जगह दी गई है. संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय स्थित बीबीसी संवाददाता का कहना है कि सुरक्षा परिषद के सदस्य ये चाहते हैं कि प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित हो ताकि इराक़ के भविष्य को लेकर अंतरराष्ट्रीय समर्थन पर एक मज़बूत संदेश जाए. |
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