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इराक़ी क़ैदियों के मामले ने तूल पकड़ा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इराक़ में राजधानी बग़दाद के निकट एक कुख्यात जेल में इराक़ी क़ैदियों के साथ कथित रूप से अमानवीय बर्ताव करते अमरीकी सैनिकों की तस्वीरों के मामले ने तूल पकड़ लिया है. अमरीका, ब्रिटेन और मध्य पूर्व के देशों ने एक अमरीकी टेलीविज़न पर दिखाई गईं इन तस्वीरों पर भारी ग़ुस्सा ज़ाहिर किया है साथ ही यह भी माँग की गई ही कि इस मामले की व्यापक जाँच होनी चाहिए और दोषियों के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई भी. अमरीका के राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने कहा है कि कुछ सैनिकों ने जिस तरह से अमरीका के नाम को बदनाम किया है वह बहुत ही अफ़सोस की बात है. "चंद सैनिकों के बर्ताव से वह संस्कृति नहीं झलकती जिसके लिए अमरीकी लोग जाने जाते हैं." उधर अमरीकी टेलीविज़न चैनल सीबीएस ने कहा है कि उसने ये तस्वीरें दो सप्ताह तक रोक रखीं क्योंकि रक्षा मंत्रालय पेंटागन ने इराक़ में तनाव होने की वजह से इन्हें नहीं दिखाने की माँग की थी. अमरीका ने पिछले महीने क़ैदियों के साथ दुर्व्यवहार करने की शिकायतें मिलने पर 17 सैनिकों को निलंबित कर दिया था. इस मामले में इराक़ में एक ब्रिगेडियर जनरल सहित छह सैनिक कोर्ट मार्शल का सामना कर रहे हैं और उन्हें जेल में क़ैदियों के साथ बदसलूकी करने के आरोप में क़ैद भी हो सकती है. ब्रितानी प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर के एक प्रवक्ता कहना है कि प्रधानमंत्री इन ख़बरों पर बहुत दुखी थे और इस घटना पर अफ़सोस जताया है. "इसमें किसी को शक नहीं है कि यह एक बहुत ग़लत मामला है लेकिन कुछ सैनिकों की इस तरह की कार्रवाई से वहाँ मौजूद क़रीब डेढ़ लाख गठबंधन सैनिकों पर सवाल नहीं उठाया जा सकता है." इराक़ पर हमले का विरोध करने वाले अमरीकी रिपब्लिकन सांसद जिम लीच का कहना था, "युद्ध क़ैदियों के साथ सम्मानजनक व्यवहार करने का अमरीकी इतिहास रहा है जिस पर गर्व भी किया जाता रहा है." "इस पूरे मामले की जाँच होनी चाहिए और दोषी लोगों को अमरीकी की सैन्य न्याय प्रणाली के तहत सज़ा मिलनी चाहिए."
उधर इराक़ी अंतरिम शासकीय परिषद के एक सदस्य अदनान अल पचाची का कहना है कि इस घटना से इराक़ियों में ग़ुस्सा और निराशा और बढ़ेगी, ख़ासतौर से ऐसे माहौल में जब वे पहले से ही देश की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं. लेकिन अदनान अल पचाची ने कहा कि बग़दाद की इस अबू ग़्राइब जेल की तुलना सद्दाम हुसैन के ज़माने की जेल से करना ठीक नहीं है. "मेरे ख़याल में ऐसी तुलना ठीक नहीं है. सद्दाम हुसैन के ज़माने में क़ैदियों को न सिर्फ़ प्रताड़ित किया जाता था बल्कि उन्हें मार भी दिया जाता था. वो ज़माना आज के ज़माने से बहुत ख़राब था." तस्वीरें इन विवादास्पद तस्वारों में एक ऐसी क़ैदी की तस्वीर है जिसे एक बक्से पर नग्नावस्था में खड़ा किया हुआ है. उसका मुँह ढका हुआ है और उसके गुप्तांगों में तार बाँधे गए हैं. और भी कुछ इसी तरह की तस्वीरें हैं जिनमें से एक में कुछ क़ैदियों को आपत्तिजनक गतिविधियाँ करने के लिए मजबूर किया जाता है. एक तस्वीर में एक महिला सैनिक ने अपने मुँह में सिगरेट दबाई हुई है और वह अपनी बंदूक को एक क़ैदी के गुप्तांगों की तरफ़ ताने हुए हैं. कोई प्रशिक्षण नहीं इस मामले में निलंबित किए एक सैनिक स्टाफ़ सार्जेंट चिप फ्रेडरिक का कहना था कि जिस तरह से सेना उस जेल को चला रही है बस उसी तरीक़े से यह बदसलूकी हुई है.
"हमें किसी तरह की मदद नहीं मिलती और न ही हमें किसी तरह का विशेष प्रशिक्षण दिया गया. मैं अपने वरिष्ठ अधिकारियों से इस बारे में कुछ बातों की पुष्टि चाहता था, ख़ासतौर से नियम-क़ानूनों के बारे में." चिप फ्रेडरिक का कहना था कि उसने क़ैदियों के साथ बर्ताव के मानदंड निर्धारित करने वाले जेनेवा समझौते को निलंबित होने से पहले तक नहीं पढ़ा था. इराक़ में अमरीकी अभियान के उप मुखिया ब्रिगेडियर जनरल मार्क किम्मिट ने सीबीएस टेलीविज़न से कहा कि वह अपने सैनिकों का ऐसा बर्ताव देखकर बहुत दुखी हुए हैं. |
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