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अमरीकी सैनिक हटे, इराक़ी तैनात | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीकी मरीन सैनिकों ने इराक़ में फ़लूजा शहर की घेराबंदी ख़त्म करके वापस लौटना शुरू कर दिया है और उनके स्थान पर इराक़ी सुरक्षा बल तैनात किए जा रहे हैं. मरीन सैनिक पिछले तीन सप्ताह से इन ठिकानों पर जमे हुए थे. अब अमरीकी मरीन फ़लूजा शहर की सीमा से बाहर रहेंगे. अमरीकी सेनाओं के कमांडर जॉन अबीज़ाद ने कहा कि क़रीब एक हज़ार इराक़ी सैनिक वहाँ तैनात किए जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि अमरीकी सैनिकों के फ़लूजा से वापस होने से वहाँ का संकट ख़त्म होने में मदद मिलेगी. लेकिन साथ ही अबीज़ाद ने यह भी कहा कि फिलहाल ऐसा कोई पक्का समझौता नहीं हुआ है जिससे लड़ाई रुकने की गारंटी दी जा सके. अबीज़ाद का कहना था कि अगर इराक़ी लड़ाकों ने इराक़ी सैनिकों के साथ सहयोग नहीं किया तो हो सकता है कि लड़ाई फिर भड़क उठे. अमरीकी गठबंधन वाली सेनाओं को उम्मीद है कि इराक़ियों के नेतृत्व में बना दल शहर के नागरिकों का विश्वास जीतने में क़ामयाब होगा. इनके अलावा शहर के पश्चिमी हिस्सों से भी सेना की वापसी होने लगी है. सबसे ज़्यादा प्रतिरोध इराक़ की राजधानी बग़दाद से लगभग 50 किलोमीटर पश्चिम में स्थित फ़लूजा मुख्य रूप से सुन्नी मुसलमानों का शहर है. यहीं पर अमरीकी फ़ौजों को इराक़ पहुँचने के बाद सबसे ज़्यादा विद्रोह का सामना करना पड़ रहा है. फ़लूजा में डॉक्टरों का कहना है कि लगभग 600 लोग इस हाल की कार्रवाई में मारे जा चुके हैं और हज़ारों लोग घर छोड़कर जा चुके हैं. उधर अमरीकी सैनिक अब भी निशाना बनाए जा रहे हैं. इसी क्रम में गुरुवार को हुई घटनाओं में 10 अमरीकी सैनिक मारे गए. इसमें आठ तो एक साथ ही एक कार बम के हमले में मारे गए. फ़लूजा के स्थानीय अमरीकी कमांडर कर्नल ब्रेनन बायर्न ने संवाददाताओं को बताया कि इराक़ी सेना के पूर्व अधिकारियों के एक समूह के साथ उनका समझौता हुआ है. उन्होंने बताया कि 'फ़लूजा प्रोटेक्शन आर्मी' नाम का एक संगठन है जिसमें लगभग 1100 इराक़ी सैनिक होंगे. इनका नेतृत्व सद्दाम हुसैन के समय के जनरल सलाह करेंगे. योजना के अनुसार पूरा फ़लूजा शहर इन लोगों के नियंत्रण में दे दिया जाएगा. |
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