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और अमरीकी हथियार इराक़ रवाना | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीकी सैनिकों पर इराक़ में हो रहे हमलों को देखते हुए अमरीका अतिरिक्त टैंकों के साथ ही और सशस्त्र वाहन इराक़ भेज रहा है. इराक़ में मौजूद सैनिक कमांडरों के अनुरोध पर ये कार्रवाई की जा रही है. बीबीसी के पेंटागन संवाददाता निक चाइल्ड्स का कहना है कि ये एक तरह से पहले की नीति के उलट काम हो रहा है और इराक़ में हिंसा की बिगड़ती स्थिति पर अमरीकी चिंता को दिखाता है. अतिरिक्त सैनिक साज़ो-सामान की ये तैनाती उस समय हो रही है जब फ़लूजा शहर में अमरीकी सेना विद्रोहियों को लगातार निशाना बना रही है. बग़दाद से लगभग 50 किलोमीटर पश्चिम में स्थित फ़लूजा मुख्य रूप से सुन्नी मुसलमानों के प्रभाव वाला क्षेत्र है और इराक़ में अमरीका की मौजूदगी पर सबसे ज़्यादा विरोध इसी क्षेत्र से हो रहा है. बुश-अन्नान मतभेद अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने फिर दोहराया है कि फ़लूजा पर नियंत्रण बनाए रखने के लिए हर तरह की कार्रवाई की जाएगी.
मगर कोफ़ी अन्नान का कहना है कि अमरीकी कार्रवाई से बात बिगड़ सकती है. उनका कहना है कि अगर आम लोगों को नुकस़ान हुआ तो वहाँ अमरीका विरोधी भावनाएँ और भड़केंगी ही. हमारे संवाददाताओं के अनुसार हाल के दिनों में अमरीका के जो सैनिक इराक़ भेजे गए थे वे अपेक्षाकृत हल्के हथियार लेकर गए थे क्योंकि तब ये माना जा रहा था कि स्थिति सुधर रही है और अब भारे हथियारों की ज़रूरत नहीं होगी. मगर जिस तरह अमरीका का विरोध वहाँ पर बढ़ता जा रहा है उसे देखते हुए अमरीकी सैनिक अधिकारियों ने सैनिकों की रक्षा के लिए और हथियारों की माँग की है. स्थिति अमरीकी सेना ने बुधवार को फ़लूजा पर नियंत्रण बनाने के लिए दिनभर कार्रवाई की और रात को भी बमबारी की. अमरीकी हेलीकॉप्टरों और लड़ाकू विमानों ने विद्रोहियों के ठिकानों पर हमले किए जिसके बाद फ़लूजा के ऊपर धुआँ निकलता नज़र आया. अमरीकी सेना का कहना है कि बुधवार को शहर के विभिन्न हिस्सों में उनपर भी हमले किए गए. |
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