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फ़लूजा की कार्रवाई सही: अमरीका | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीकी सेना ने इराक़ के फ़लूजा शहर में विद्रोहियों के ठिकाने पर रातभर गोलाबारी के फ़ैसले को सही ठहराया है. इस पूरी गोलाबारी में कितने लोग मारे गए हैं इसकी सूचना अभी तक नहीं मिल सकी है. फ़लूजा शहर मुख्य रूप से सुन्नी मुसलमानों की आबादी वाला है. अमरीकी कमांडरों का कहना है कि ये हमला स्थानीय तौर पर लागू संघर्ष विराम के उल्लंघन के बाद करना पड़ा. एक बयान में कहा गया है कि अमरीकी मरीन सैनिकों पर हमले के बाद ही ये संघर्ष शुरू हुआ है. इसके अनुसार मरीन सैनिकों ने ख़ुद को बचाने के लिए शत्रु बल पर हमला किया. इसमें कहा गया है कि विद्रोहियों ने अमरीका की ओर से तय की गई समयसीमा तक अपने हथियार सौंपे नहीं. उधर स्थानीय डॉक्टरों का कहना है कि उस समय से सैकड़ों नागरिक मारे जा चुके हैं. सीधा प्रसारण मंगलवार को हुई बमबारी का दुनिया भर के टेलीविज़न चैनलों ने सीधा प्रसारण किया. इसमें अल-जज़ीरा भी शामिल है जिसे अरब देशों में विशेष तौर पर देखा जाता है.
इन सब के अलावा चैनल ने बग़दाद के एक आलिम का साक्षात्कार भी दिखाया जिसमें वह कह रहे थे कि अमरीकी अब आम लोगों को निशाना बना रहे हैं और वे सब कुछ नष्ट कर रहे हैं. बीबीसी की जेनिफ़र ग्लासे का कहना है कि इस तरह के बयान इराक़ में अमरीका विरोधी भावनाओं को भड़काने का ही काम कर रहे हैं. वहीं अमरीकी प्रशासकों का कहना है कि वे फ़लूजा पर पूरे तौर पर हमला नहीं करना चाहते. इस स्थिति में अमरीकी सैनिकों और इराक़ी सुरक्षा बलों के जवानों के एक साथ गश्त को ही नियंत्रण बनाए रखने का एकमात्र रास्ता देखा जा रहा है. इसी क्रम में मंगलवार को अमरीकी सैनिकों ने इराक़ी जवानों को प्रशिक्षण भी दिया. फ़लूजा में अमरीकी मरीन सैनिकों के साथ मौजूद बीबीसी संवाददाता ने एक प्रवक्ता के हवाले से कहा है कि अमरीका को शहर पर पूर्ण नियंत्रण पाने में छह से आठ सप्ताह तक का समय लग सकता है. इस बीच अमरीकी सेना के ज्वाइंट चीफ़ ऑफ़ स्टाफ़ जनरल रिचर्ड मायर्स ने मंगलवार को कहा कि उन्हें अब भी इस बात की उम्मीद है कि मामला सुलझ जाएगा. मगर उन्होंने साथ ही यह भी जोड़ दिया कि उनके पास अनिश्चित धैर्य नहीं है. |
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