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फ़लूजा की कार्रवाई जायजः बुश | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने इराक के फ़लूजा शहर में अमेरिकी सेना की ताज़ा कार्रवाई को जायज़ ठहराया है. वाशिंगटन में राष्ट्रपति बुश ने साफ किया कि फ़लूजा की सुरक्षा के लिए अमरीकी फौज हर संभव क़दम उठाएगी. उन्होंने कहा कि इस हिंसा के पीछे उन लोगों का हाथ है जो जून में इराक की अंतरिम सरकार को सत्ता सौंपने के रास्ते में रूकावट पैदा करना चाहते हैं. ख़ास बात ये है कि राष्ट्रपति बुश का ये बयान ऐसे समय में आया है जब संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफी अन्नान ने दोनों पक्षों से हिंसा न करने की अपील की थी. बुधवार को अमरीकी युद्धपोत विमानों ने इराक के फ़लूजा शहर में विद्रोहियों पर ताज़ा हमला किया था. टेलीवीज़न पर प्रसारित तस्वीरों में उन्हें मिसाइलें दागते हुए दिखाया गया, जिसके बाद शहर के उत्तर-पश्चिमी इलाक़े से धुआं उठता नज़र आ रहा था. शहर की घेराबंदी करने वाले अमरीकी मैरीन्स की मदद के लिए इन विमानों को बुलाया गया था. उनका कहना है कि जैसे ही उन्होंने एक रेलवे स्टेशन पर नियंत्रण करने की कोशिश की तो उन पर गोलीबारी की गई. अमरीका की इस कार्रवाई से पहले रात भर सैन्य हथियारों का जमावड़ा चला और एक एसी-130 गनशिप भी तैनात की गई. अमरीकी कमांडरों का कहना है कि वो फ़लूजा पर बड़ा हमला करने से बच रहे हैं और फिलहाल उनकी फ़ौजें केवल युद्धविराम तोड़ने की कोशिशों का जवाब दे रहीं हैं. उनका कहना है कि विद्रोहियों ने अमरीकी चेतावनी का समय ख़त्म होने के बावजूद अभी तक आत्मसमर्पण नहीं किया है. बातचीत पर संदेह अमरीकी सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल मार्क किम्मिट का कहना है कि अमरीकी मैरीन्स अब भी युद्धविराम का पालन कर रहे हैं. हालाँकि इसे विद्रोही कई बार तोड़ चुके हैं. लेकिन उन्होंने साफ किया कि अगर उनपर हमला होता है तो सैनिकों को उनका जवाब देने का पूरा हक़ है. वो कहते हैं, "सैनिक समाधान बहुत ही आसान होता है - इसे आसानी से शुरू और ख़तम किया जा सकता है." लेकिन उन्होंने ये भी माना कि `फ़लूजा की समस्या सैन्य समस्या से कहीं ज्यादा है' और इसके लिए स्थानीय नेताओं से बातचीत जारी है. हालाँकि उन्होंने कहा कि गठबंधन को ये भी चिंता है कि `ये नेता कोई समाधान निकाल भी पायेंगे या नहीं.' फ़लूजा में सैनिक कार्रवाई 5 अप्रैल को शुरू हुई थी, जब यहाँ चार अमरीकी कांट्रैक्टरों की निर्मम हत्या कर दी गई थी. बगदाद से 50 किलोमीटर दूर पश्चिम में स्थित फ़लूजा शहर से अमरीकी सेना को काफी विरोध का सामना करना पड़ रहा है. स्थानीय डॉक्टरों का कहना है कि इस महीने फ़लूजा में सैकड़ों लोग मारे जा चुके हैं. बुधवार को कई परिवार शहर छोड़ कर जाते हुए दिखाई दिए. शहर छोड़कर भाग रहे अली मुज़ेल का कहना था, "मैं शांति की आशा लगाए बैठा था. लेकिन अमरीका की हवाई बमबारी ने मेरी सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया. " फ़लूजा में अमरीकी गतिविधियों की इराक में संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत लखदर ब्राहिमी सहित कई अमरीकी समर्थक इराकियों ने आलोचना की है. लखदर ब्राहिमी का कहना है कि वे इराक में लोकतंत्र बहाल करने रास्ते में रूकावट डाल रहे हैं. उन्होंने कहा, " जब तक इसका कोई शांतिपूर्ण हल नहीं खोज लिया जाता है तब तक खून-ख़राबे का ख़तरा रहेगा. इस खून-ख़राबे का काफी व्यापक असर पड़ सकता है जो काफी समय तक रहेगा." लेकिन 30 जून को अंतरिम सरकार बनने के बाद अमरीकी राजदूत बन रहे जॉन नेगरोपोन्ते इस बात को नकारते हैं. उनका कहना है, "इस तरह के हमलावर गुटों की भविष्य के इराक में कोई जगह नहीं है. इसलिए इनसे निपटना ज़रूरी है. कभी-कभी हमलों को रोकने के लिए शक्ति प्रदर्शन करने की ज़रूरत पड़ती है." ब्रिटेन की सरकार ने भी फ़लूजा में अमरीकी कार्रवाई को सही ठहराया है. प्रधानमंत्री के आधिकारिक प्रवक्ता ने कहा, "विद्रोहियों ने सैनिकों पर हमला किया. तो अगर उनपर हमला होता है तो उन्हें जवाब देने का पूरा अधिकार है." उन्होंने कहा, "हम इसे राजनीतिक तौर पर हल करना चाहते हैं लेकिन ये तो तभी संभव है न जब दूसरी तरफ भी ऐसा चाहे." उधर इराक के दूसरे हिस्से में गठबंधन सेना में शामिल एक यूक्रेन का सैनिक मारा गया और बग़दाद के दक्षिणी-पूर्व इलाक़े में एक बंदूक़धारी ने दो लोगों को मार दिया. |
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