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मंडल आयोग की रिपोर्ट लागू होने से उत्तर भारत में राजनीतिक परिवर्तन तो तेज़ी से हो गया लेकिन सामाजिक और सांस्कृतिक परिवर्तन वैसा नहीं हुआ जैसा कि दक्षिण भारत में हुआ. महेश रंगराजन का विश्लेषण- | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
एक निम्न मध्यमवर्गीय परिवार से आए सौमित्र मोहन आज आईएएस अधिकारी हैं. वे मानते हैं कि मंडल ने पिछड़े वर्ग के लोगों को एक अवसर दिया है. | कालिकानंद झा साक्षात्कार में पास होने के बाद नियुक्ति पत्र का इंतज़ार कर रहे थे लेकिन जैसा वे बताते हैं कि नौकरी किसी और को मिल गई. | मंडल विरोधी आंदोलन का नेतृत्व करने वाले नेताओं में से एक हरेराम सिंह अपने आपको एक हारे हुए सिपाही की तरह देखते हैं. | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||