परमाणु बम के अलावा 'डर्टी बम' से खतरा

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विश्व में परमाणु आतंकवाद के खतरे को कम करने के लिए भारत समेत 50 से ज्यादा देशों के राष्ट्राध्यक्ष दक्षिण कोरिया की राजधानी सोल में सम्मेलन में हिस्सा ले रहे हैं.

सोमवार से शुरु हुए दो दिन के सम्मेलन में इस बात पर चर्चा हो रही है कि दुनिया भर में फैली परमाणु सामग्री को कैसे सुरक्षित रखा जा सके.

सोल सम्मेलन का मुख्य मकसद है कि कैसे दुनिया में परमाणु सामग्री को कम किया जा सके, उसे सुरक्षित रखा जा सके और इसे आपराधिक या आतंकवादी गुटों के हाथों में जाने से रोका जा सके.

भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री युसूफ़ रजा गिलानी भी इसमें हिस्सा ले रहे हैं.

सोवियत संघ के विघटन के बाद से ही इस बात पर चिंता जताई जाती रही है कि परमाणु सामग्री आतंकवादियों या कट्टरपंथियों के हाथों में न चली जाए.

अमरीका और ब्रिटेन जैसे देश मानते हैं कि अल कायदा परमाणु बम बनाने के लिए सामग्री जुटाना चाहता है.

कट्टरपंथियों से खतरा

परमाणु सुरक्षा सम्मेलन दूसरी बार हो रहा है. पहली बार ये आयोजन 2010 में अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने करवाया था. लक्ष्य ये रखा गया था कि चार वर्षों के अंदर सभी परमाणु सामग्री की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके.

इस दिशा में कुछ प्रगति भी हुई है जैसे चीली ने संवर्धित यूरेनियम अमरीका को लौटाया है, कज़ाकस्तान ने खर्च हो चुके परमाणु ईंधन को सुरक्षित जगह रख दिया है, यूक्रेन ने अपनी आवणिक सामग्री रूस में सुरक्षित रख दी है.

लेकिन बीबीसी संवाददाता का कहना है कि ये प्रगति धीमी है. इसका एक कारण ये बताया जाता है कि 2010 में पहले परमाणु सुरक्षा सम्मेलन में शुरुआती लक्ष्य स्पष्ट नहीं था और न इसके लिए कोई कार्ययोजना बनाई गई थी.

सोल सम्मेलन में ऐसे रेडियोधर्मी पदार्थों पर भी बात हो रही है जिनका इस्तेमाल कट्टरपंथी ‘डर्टी बम’ बनाने के लिए कर सकते हैं- वो बम जो रेडियोधर्मिता फैलाता है पर उसमें विस्फोट नहीं होता.

हालांकि बीबीसी के कूटनीतिक मामलों के संवाददाता जॉनथन मार्कस का मानना है कि सोल सम्मेलन में कुछ ठोस सफलता मिलने के आसार कम हैं.

माना जा रहा है कि सभी परमाणु ऊर्जा स्टेशनों को कम संवर्धित ईंधन वाले स्टेशनों में बदलने पर सहमति नहीं बन पाएगी और न ही परमाणु सुरक्षा को लेकर सभी देश एक जैसे मानक अपनाने पर राजी होंगे.

इस बीच अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा है कि अगर उत्तर-कोरिया अगले महीने परमाणु मिसाइल का प्रक्षेपण करता है तो उसे और प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है.

दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली-म्यूंग बाक के साथ सोल में एक मंच पर बोलते हुए बराक ओबामा ने कहा कि अगर उत्तर कोरिया इस रॉकेट का प्रक्षेपण करता है तो उसे अब तक खाद्य के क्षेत्र में दी जा रही मदद को जारी रखना मुश्किल होगा.