इतिहास के पन्नों से...
अगर इतिहास के पन्नों को पलटें तो आज के दिन ही सोवियत नेता मिखाइल गोर्बोचेफ़ का सत्ता पलट कर दिया गया था जिसके बाद न सिर्फ़ सोवियत संघ के बल्कि दुनियां भर में इतिहास और राजनीति ने एक नई करवट ली.
1991: गोर्बोचेफ़ को सत्ता से बेदखल किया गया

19 अगस्त के दिन केजीबी प्रमुख समेत आठ कम्युनिस्ट अधिकारियों ने सोवियत नेता मिखाइल गोर्बोचेफ़ को सत्ता से बेदख़ल कर दिया और एक आपात समिति का गठन किया.
इस मुहिम के बाद गोर्बोचेफ़ को हिरासत में ले लिया गया था और मॉस्को की गलियों में टैंक प्रवेश कर गए.
रेडियो पर घोषणा कर लोगों को कहा गया कि गोर्बोचेफ़ ‘ख़राब स्वास्थ की वजह से अपनी ज़िम्मेदारियों को नहीं निभा पा रहे हैं.’
सोवियत संघ के न्यूज़ चैनलों ने गोर्बोचेफ़ की नीतियों की आलोचना भरी ख़बरें चलानी शुरु कर दी.
केजीबी प्रमुख समेत आठ कम्युनिस्ट अधिकारियों ने अपातकाल की घोषणा करते हुए कहा कि वे देश को बर्बाद होने से बचाना चाहते हैं.
इसके बाद दिसंबर में सोवियत संघ का विघटन हुआ और रूस ने ख़ुद को सोवियत संघ का उत्तराधिकारी घोषित किया.
2003: संयुक्त राष्ट्र के दफ़्तर पर हमला

इमेज स्रोत, AP
19 अगस्त 2003 के दिन इराक़ की राजधानी बग़दाद में संयुक्त राष्ट्र के दफ़्तर पर एक बड़ा बम धमाका हुआ जिसमें कम से कम 20 लोग मारे गए.
मारे गए लोगों में इराक़ में संयुक्त राष्ट्र की विशेष दूत सर्गियो वियेरा डी मेलो भी थे. इस धमाके ने पूरे संयुक्त राष्ट्र परिसर को हिला दिया था और इमारत की तीन मंज़िलें पूरी तरह से ढह गई थीं.
हमले में 100 से ज़्यादा लोग घायल भी हुए. ये हमला इराक़ में अमरीकी क़ब्ज़े के विरोध में किया गया था.
इस आत्मघाती हमले के बाद अनेक अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने बग़दाद से अपने कर्मचारियों को हटा लिया.
साथ ही संयुक्त राष्ट्र ने कुछ समय के लिए इराक़ में अपना दफ़्तर बंद कर दिया था.
1960: अमरीकी जासूस पायलट को सोवियत में जेल

इमेज स्रोत, AP
इसी दिन 1960 में अमरीकी पायलट फ़्रांसिस गैरी पावर्स को सोवियत सेना अदालत ने दस साल की सज़ा सुनाई थी.
पावर्स ने अमरीकी ख़ुफ़िया एजेंसी सीआईए के लिए जासूसी करने की बात स्वीकार की थी.
सोवियत सेना ने पावर्स के हवाई जहाज़ को पूर्वी मॉस्को के पास 68,000 फीट की ऊंचाई पर गोली मार दी थी.
पावर्स के ख़िलाफ़ दर्ज हुए आरोप पत्र में कहा गया कि उन्होंने सोवियत संघ के हवाई क्षेत्र में अनधिकृत रूप से दख़लअंदाज़ी की और उनका मक़सद ठीक नहीं था.












