अंडरवर्ल्ड ने फिर दी दस्तक

पुलिस
इमेज कैप्शन, डे की हत्या का मक़सद पुलिस पता लगाने में नाक़ामयाब रही है
    • Author, सुशीला सिंह
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली

मुंबई में 11 जून को दिनदहाड़े 'मिड डे' अख़बार के वरिष्ठ पत्रकार ज्योतिर्मय डे पर जिस तरह से गोली चलाई गई, उसने अंडरवर्ल्ड की मौजूदगी का अहसास फिर से करा दिया.

मुंबई पुलिस, क्राइम रिपोर्टर ज्योतिर्मय डे की हत्या के मामले में छोटा राजन गैंग का हाथ होने की बात स्वीकार कर रही है.

पुलिस अभी तक ये स्पष्ट तौर पर नहीं बता पाई है कि इस हत्या के पीछे क्या मक़सद था, जिसने इस मामले को और रहस्यमय बना दिया है.

लेकिन दिव्य मराठी में राजनीतिक संपादक समर खड़स का कहना है कि पुलिस ऑफ़ द रिकॉर्ड ये जानकारी दे रही है कि डे के हत्या के दो-तीन कारण हो सकते है

पुलिस सूत्रों के हवाले से खड़स बताते है, "डे के पास किसी बड़े व्यक्ति के बारे में कोई ऐसी जानकारी हो सकती थी, जिससे उसे करोड़ो का नुकसान हो रहा हो. दूसरा कारण ये हो सकता है कि डे की किसी बड़े इंसान के साथ दुश्मनी रही हो या फिर उनकी हत्या निजी ज़िंदगी में दुश्मनी का मामला हो सकता है."

पेचीदा

ऐसे में मक़सद का साफ़तौर पर पता चल पाना बेहद ही मुश्किल नज़र आता है.

पुलिस दावा कर रही है कि डे को मारने के लिए छोटा राजन ने सतीश कालिया को सुपारी दी थी.

पुलिस पहले से ही फ़रार छोटा राजन को इस मामले में अभियुक्त बना चुकी है और ऐसी स्थिति में जे डे की हत्या की सच्चाई शायद छोटा राजन की गिरफ़्तारी की मोहताज बनी रहेगी.

वरिष्ठ पत्रकार समर खड़स का कहना है डे की हत्या बेहद ही पेशेवर तरीक़े से की गई थी, जो पुख़्ता करता है कि इसमें अंडरवर्ल्ड का हाथ था.

अनका कहना है, "जिस तरह से पेशवर हत्यारों और हथियार का इस्तेमाल किए गया वह प्रमाणित करता है कि इस मामले में अंडरवर्ल्ड का हाथ था. इस हत्या में .32 बोर की पिस्तौल का इस्तेमाल किया गया, जिसकी बाज़ार में क़ीमत सात-आठ लाख होती है, जो कोई ऐसा-वैसा इंसान नहीं रख सकता. दाऊद के भाई को मारने के लिए केवल दो ही लोगों ही लगाया गया था जबकि डे के मारने के लिए चार लोगों को लगाया गया. ऐसी योजना और सेटअप केवल अंडरवर्ल्ड का ही हो सकता है."

तौर-तरीक़ा बदला

ज्योतिर्मय डे

इमेज स्रोत, AFP

इमेज कैप्शन, पुलिस दावा कर रही है कि डे को मारने के लिए छोटा राजन ने सतीश कालिया को सुपारी दी थी.

समय के साथ-साथ अंडरवर्ल्ड के काम करने के तौर-तरीक़ों में भी बदलाव आया है.

पहले अंडरवर्ल्ड के लोग एक गैंग में रहते हुए परिवार की तरह काम करते थे. इसमें उनके अपने शूटर या ख़बरी होते थे और अगर कोई पकड़ा जाता था तो उनके परिवार की ज़िम्मेदारी ली जाती थी.

लेकिन अब ये एक कॉन्ट्रैक्ट के तहत काम करता है. अंडरवर्ल्ड में भी माफ़िया ने अपना काम करवाने के लिए कॉन्ट्रैक्ट किलर का इस्तेमाल किया जिसकी ज़िम्मेदारी नहीं ली जाती थी.

समर खड़स के मुताबिक़ अंडरवर्ल्ड के काम में बदलाव आया है. उन्होंने बताया, "पहले वह वसूली का काम करते थे. साल 1995 से 2000 तक तो ऐसा होता था कि मुंबई में जब भी कोई बड़ी शादी होती थी या किसी की दुकान अच्छी चलती थी, तो उससे पैसा मांगा जाता था. उन्होंने जो भी पैसा कमाया है, अब वह फ़िल्म बनाने में या फिर निर्माण में पैसा लगाते है. इसमें नाम किसी भी बिल्डर या प्रोड्यूसर का आ सकता है लेकिन पीछे इन्हीं का हाथ होता था."

बहरहाल डे की मौत पहला मामला नहीं है. मुंबई के दादर में ख़तरनाक टेबलॉयड चलाने वाले खलनकर को दिनदहाड़े गोली मार दी गई थी.

ऐसे में डे का मामला जितना गहरा और पेचीदा है, उसके तार कहां-कहां तक जुड़े हुए हैं- उसका अंदाज़ा तभी होगा, जब सुपारी लेने वाला और उसे देने वाला पुलिस की गिरफ़्त में होगा.