क्यूबा मिसाइल संकट: महिला जिसकी वजह से टली थी सोवियत संघ और अमेरिका के बीच परमाणु जंग

जुआनिटा मूडी

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इमेज कैप्शन, जुआनिटा मूडी एक क्रिप्टोग्राफर थीं, उनकी तैयार की हुई रिपोर्टें आज भी गोपनीय हैं
    • Author, कार्लोस सेरानो
    • पदनाम, बीबीसी न्यूज़ वर्ल्ड

ये अक्टूबर, 1962 की बात थी. दुनिया परमाणु युद्ध के मुहाने पर पहुंच गई थी. 14 अक्टूबर को एक अमेरिकी जासूसी विमान ने पता लगाया कि क्यूबा में सोवियत संघ (अब रूस) ने परमाणु मिसाइलें तैनात कर दी हैं.

जिस जगह पर ये परमाणु मिसाइलें तैनात की गई थीं, अमेरिका का फ्लोरिडा तट वहां से महज 150 किलोमीटर की दूरी पर स्थित था.

अमेरिका की नाक के नीचे सोवियत संघ ने परमाणु मिसाइलों का जखीरा जुटा लिया था और यहां से अमेरिका के बड़े हिस्से पर हमला किया जा सकता था. इतिहास में इस घटना को शीत युद्ध के सबसे नाज़ुक लम्हों में से एक 'क्यूबा मिसाइल संकट' के रूप में याद किया जाता है.

ऐसे तनावपूर्ण हालात में अमेरिकी प्रतिक्रिया एक एजेंट की खुफिया रिपोर्टों पर आधारित थी. हालांकि उस जासूस पर दशकों तक किसी की नज़र नहीं गई थी लेकिन विनाशकारी परिस्थितियों को टालने में उस शख़्स की अहम भूमिका थी. उनका नाम जुआनिटा मूडी था.

वे एक क्रिप्टोग्राफ़र थीं, यानी वो शख़्स जो इन्क्रिप्टेड कोड्स या कूट भाषा में भेजे गए संदेशों को पढ़ने का काम करता हो. अमेरिका की नेशनल सिक्योरिटी एजेंसी (एनएसए) में जुआनिटा मूडी क्यूबा पर निगरानी का काम करती थीं.

अमेरिका, सोवियत संघ, क्यूबा मिसाइल संकट

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शीत युद्ध का इतिहास

उनकी तैयार की हुई रिपोर्टें आज भी गोपनीय हैं लेकिन हाल ही में लेखक और पत्रकार डेविड वॉलमैन की पड़ताल के बाद साल 1962 की घटनाओं में जुआनिटा मूडी की अहम भूमिका की जानकारी सामने आई.

स्मिथसोनियन मैगज़ीन के लिए लिखे गए लेख में डेविड वॉलमैन ने कहा है कि शीत युद्ध के इतिहास में जुआनिटा मूडी की भूमिका को नज़रअंदाज़ किया जाना एक ऐतिहासिक भूल है.

बीबीसी मुंडो से बातचीत में डेविड वॉलमैन ने बताया कि जुआनिटा मूडी के महत्वपूर्ण योगदान को खारिज नहीं किया जा सकता है. उन्होंने प्रतिकूल परिस्थितियों में अपने लिए रास्ता बनाया और खुद को साबित किया. मिलिट्री वालों की दुनिया में वो ऐसी महिला थीं, जो आपको प्रेरित करती हैं.

ऐसे में सवाल उठता है कि क्यूबा मिसाइल संकट में जुआनिटा मूडी की क्या भूमिका थी और उनकी कहानी क्यों सामने नहीं आ पाई?

साल 1962 में जुआनिटा मूडी की उम्र 38 साल थी. वे नॉर्थ कैरोलिना के एक छोटे से शहर में साल 1924 में पैदा हुई थीं. साल 1943 में जब द्वितीय विश्व युद्ध चल रहा था तो उन्होंने कॉलेज में दाखिला ही लिया था. उन्होंने तय किया कि वे नेवी ज्वॉइन करेंगी.

क्यूबा मिसाइल क्राइसिस के समय जुआनिटा मूडी की बनाई रिपोर्ट का एक अंश

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सिग्नल इंटेलीजेंस सर्विस

एनएसए के इतिहासकारों को दिया गया उनका एक इंटरव्यू साल 2016 में सार्वजनिक किया गया था जिसमें वो कह रही थीं, "मैंने महसूस किया कि जब मेरा देश युद्ध में है और मैं यहां नीले आसमान के नीचे कॉलेज कैंपस में इस ख़ूबसूरत जगह पर आराम की पढ़ाई करूं, ये ठीक नहीं होगा."

जुआनिटा मूडी को वर्जीनिया के एर्लिंगटन हॉल भेज दिया गया जहां एनएसए की सिग्नल इंटेलीजेंस सर्विस यूनिट हुआ करती थी. वहां उन्होंने इन्क्रिप्टेड संदेशों के विश्लेषण की ट्रेनिंग हासिल की. उन्हें नाज़ियों के संचार तंत्र पर नज़र रखने वाले ग्रुप में तैनात कर दिया गया.

इन्क्रिप्शन कोड्स पर गणितज्ञ एलन ट्यूरिंग के काम पर आधारित एक मशीन को बनाने में उन्होंने अपने एक साथी के साथ काम किया और अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया. डेविड वॉलमैन बताते हैं, "उन्होंने नई टेक्नॉलॉजी का इस्तेमाल करके इंटेलीजेंस के काम को उच्च स्तर का बनाने में मदद की."

साल 1952 में एनएसए के गठन के समय से ही जुआनिटा मूडी बड़े ओहदों पर रहीं जहां उनका काम बड़ी मात्रा में उपलब्ध डेटा को जल्द से जल्द विश्लेषण करके उन लोगों तक पहुंचाना था, जो फ़ैसले लेने के लिए अधिकृत थे.

डेविड वॉलमैन लिखते हैं, "डेटा एनालिसिस की संकल्पना के आने से काफी पहले जुआनिटा मूडी बड़े आंकड़ों के इस्तेमाल में माहिर हो गई थीं."

अमेरिका से तनावपूर्ण संबंधों के बीच फिदेल कास्त्रो ने सोवियत संघ की मदद की पेशकश स्वीकार कर ली थी

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क्यूबा मिसाइल संकट

साल 1961 में सीआईए की ट्रेनिंग लिए हुए कुछ क्यूबाई लोगों द्वारा फिदेल कास्त्रों की सरकार को गिराने की नाकाम कोशिश के बाद क्यूबा ने सोवियत संघ के नेता निकिता ख्रुश्चेव की मदद की पेशकश स्वीकार कर ली थी.

क्यूबा और सोवियत संघ के इस गठबंधन ने इस द्विपीय देश को शीत युद्ध के एक हॉट-स्पॉट में बदल दिया था. अमेरिकियों की नज़र तब क्यूबा पर गई. और जुआनिटा मूडी को इंटेलीजेंस जुटाने के लिए बनाई गई टीम का अगुवा बनाया गया.

उनकी टीम का काम रेडियो संदेशों, रेडार डेटा, इलेक्ट्रॉनिक कम्युनिकेशंस, हथियारों को समझने, जहाजों की गतिविधियों पर नज़र रखने और ऐसी किसी भी जानकारी, जो पकड़ में आ सके, पर नज़र रखना था.

इसके अलावा एनएसए ने फ्लोरिडा में इंटेलीजेंस सेंटर बनाए और क्यूबा के आसामान में जासूसी विमानों को तैनात कर दिया. इस अभियान के तहत नेवी के जहाज अत्याधुनिक सर्विलांस सिस्टम्स के साथ तैनात किए गए.

इन संसाधनों के बीत मूडी की टीम ने पता लगाया कि क्यूबा अपने संचार तंत्र की सुरक्षा व्यवस्था में सुधार कर रहा था. उन्होंने ये भी पता लगाया कि सोवियत संघ के नौसैनिक अड्डों और क्यूबा के बीच सामुद्रिक गतिविधियां बढ़ गई हैं.

क्यूबा मिसाइल संकट

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जुआनिटा मूडी की रिपोर्ट

ऐसे जहाज क्यूबा पहुंच रहे थे जिनके दस्तावेज़ पूरे नहीं थे. उन पर लदे सामान का वजन बंदरगाह पर बताए गए वजन से मेल नहीं खा रहा था. ऐसा मालूम हुआ कि जहाज पर से चीज़ें चुपचाप रात के अंधेरे में उतारी जा रही हैं.

उनकी टीम ने ऐसी बातचीत सुनीं जिनमें टैंक, रडार और हथियारों के जरिए एयरक्राफ्ट पर हमले का जिक्र हो रहा था और सोवियत संघ के लोग क्यूबा पहुंच गए थे. डेविड वॉलमैन के लेख में जुआनिटा मूडी के हवाले से कहा गया है, "क्यूबा में हालात तनावपूर्ण हो रहे थे."

जुआनिटा मूडी को ये आदेश दिया गया कि वे जुटाई गई जानकारियों को एक रिपोर्ट की शक्ल में पेश करें. असिस्टेंट डिफेंस सेक्रेटरी एडवर्ड लैंसडेल ने उनसे कहा, "आप क्यूबा के बारे में जो भी जानती हैं, हम वो जानना चाहते हैं. अगर कोई अंदेशा हो तो उसे भी... हम वो सबकुछ जानना चाहते हैं जो आपके मन में क्यूबा के बारे में सोचते वक़्त आता है."

जुआनिटा मूडी ने हर बात को डॉक्युमेंट में दर्ज किया और बेधड़क जवाब दिया, "किसी अंदेशे की ज़रूरत नहीं है."

फरवरी, 1962 में उन्होंने एनएसए के डिप्टी डायरेक्टर लुइस टॉरडेला को इस बात के लिए मनाने की कोशिश की, उनकी रिपोर्ट व्हाइट हाउस, विदेश मंत्रालय और सेना को भेजी जाए. लुइस टॉरडेला ने इसे दूसरी एजेंसियों के साथ शेयर करने से इनकार कर दिया.

निकिता ख्रुश्चेव और राष्ट्रपति केनेडी ऐसे मोड़ पर पहुंच गए थे जहां सोवियत संघ और अमेरिका के बीच कभी भी परमाणु युद्ध छिड़ सकता था

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क्यूबा की नौसैनिक नाकाबंदी

लेकिन उन्होंने राष्ट्रपति जॉन एफ़ केनेडी को ये रिपोर्ट दिखलाई. आख़िर में मूडी ने लुइस टॉरडेला को इस बात के लिए मना लिया कि उनकी रिपोर्ट सीआईए समेत दूसरी एजेंसियों को भेजी जाए.

साल 1962 के वसंत आते-आते ये बात साफ़ हो गई थी कि क्यूबा ने हवाई हमलों के ख़िलाफ़ डिफेंस सिस्टम लगा लिया था और रूसी मिग विमानों की चहलकदमियां क्यूबा के आस-पास उन जगहों पर शुरू हो गई थीं, जहां अमेरिकी जहाज खड़े थे.

अगस्त में जुआनिटा मूडी की रिपोर्ट के आधार पर सीआईए ने राष्ट्रपति केनेडी को बताया कि हज़ारों सोवियत सिपाही और बड़े पैमाने पर सैनिक साजोसामान क्यूबा पहुंच गए हैं.

तब तक अमेरिका ने क्यूबा के ऊपर से अपने विमानों के गुजरने पर रोक लगा दी. 14 अक्टूबर को एक अमेरिकी विमान ने क्यूबा की 928 एरियल तस्वीरें खींची जिनसे अमेरिकियों को पता चला कि सोवियत संघ ने क्यूबा में परमाणु मिसाइलें तैनात कर दी हैं.

इस जानकारी के आधार पर केनेडी ने क्यूबा की नौसैनिक नाकाबंदी शुरू कर दी. इस नाकांबदी का मक़सद और मिसाइलों को क्यूबा पहुंचने से रोकना था और सोवियत संघ से बातचीत के लिए समय निकालना था.

अमेरिकी विमानों द्वारा ली गईं एरियल तस्वीरों में से एक

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'राजनीति की परवाह नहीं'

जैसे ही क्यूबा में सोवियत मिसाइलों की तैनाती की बात सामने आई, जुआनिटा मूडी का अगला मिशन क्यूबा में सोवियत संघ की खुफिया गतिविधियों से जुड़ी जानकारी जल्द से जल्द पता लगाना था.

डेविड वॉलमैन बताते हैं कि मूडी को मदद को मदद के लिए पानी में काम करने में सक्षम माइक्रोफोन, जासूसी विमान, सुनने वाले उपकरण और ऐसे तमाम उकरण मुहैया कराए जिन्हें छुपाकर रखा जा सकता था.

क्यूबा की नाकाबंदी के दो दिन बाद 24 अगस्त को मूडी की टीम ने देखा कि क्यूबा की तरफ़ बढ़ रहे सोवियत जहाजों के बेड़े में से एक ने अपना रास्ता बदल लिया और ऐसा लगा कि वो वापस सोवियत संघ की तरफ़ जा रहा हो.

डेविड वॉलमैन कहते हैं कि इस घटना को इस संकेत के रूप में देखा गया कि सोवियत संघ अमेरिका से टकराव नहीं चाहता है.

जुआनिटा मूडी ने ये महसूस किया कि इस घटनाक्रम की जानकारी संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका के राजदूत एडलाई स्टीवेंसन को जल्द से जल्द दी जानी चाहिए थी. वे उस वक्त क्यूबा संकट पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को संबोधित करने जाने वाले थे.

विदेश मंत्रालयक के अधिकारियों ने मूडी के आग्रह को मना कर दिया लेकिन मूडी ने इसकी परवाह न करते हुए आधी रात को न्यूयॉर्क के उनके होटल रूम में एम्बैसडर एडलाई स्टीवेंसन को फोन करके जगाया.

मूडी बताती हैं, मैंने आधी रात के वक्त उन्हें फोन किया. मैंने वही किया जो मुझे सही लगा. मुझे राजनीति की परवाह नहीं थी."

क्यूबा मिसाइल संकट

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शांतिपूर्ण समाधान

डेविड वॉलमैन बताते हैं कि मूडी ने जो खुफिया जानकारी जुटाई थी, उसे क्यूबा मिसाइल संकट से बाहर निकलने के लिए सबसे शुरुआत संकेतों के तौर पर देखा गया था. ये अंदाज़ा लगाया गया कि इस संकट का शांतिपूर्ण समाधान निकाला जा सकता है.

28 अक्टूबर को राष्ट्रपति केनेडी ने सोवियत संघ को दो संदेश भेजे. निकिता ख्रुश्चेव क्यूबा में अपनी मिसाइलों को हटाने के लिए तैयार हो गए लेकिन उन्होंने दो शर्तें रखीं. पहली ये कि अमेरिका क्यूबा पर हमला नहीं करेगा और दूसरा ये कि वो तुर्की से अपनी मिसाइलें हटा लेगा.

जुआनिटा मूडी की भूमिका की अमेरिका के इंटेलीज़ेंस विभाग के आला अधिकारियों ने खूब सराहना की. यूएस अटलांटिक फ्लीट के कमांडर रॉबर्ट डेनीसन ने क्यूबा में एनएसए के काम के लिए धन्यवाद पत्र लिखा.

डेविड इस बात को स्पष्ट करते हैं कि मूडी क्यूबा संकट का हल निकालने के लिए लगी तमाम सरकारी मशीनरियों का एक हिस्सा रही थीं लेकिन उनकी रिपोर्ट से ही क्यूबा संकट की गंभीरता का अंदाज़ा लगाया जा सके.

उनकी रिपोर्ट के आधार पर ही क्यूबा के आसमान से अमेरिकी विमानों का उड़ान भरना फिर से शुरू किया गया जिसके बाद तैनात सोवियत संघ की परमाणु मिसाइलों का पता लगाया जा सका.

डेविड कहते हैं, "अगर जुआनिटा मूडी अपने काम में माहिर नहीं होतीं, अगर वो अपनी रिपोर्ट दूसरी एजेंसियों के साथ शेयर करने के लिए जिद न करतीं तो क्या होगा. क्या कोई गेस कर सकता है? वे दृढ़ निश्चयी थीं. उन्होंने जो सूचनाएं उपलब्ध कराईं, जिस तरह से उपलब्ध कराईं और जितनी तेज़ी से उपलब्ध कराईं, उसी से क्यूबा संकट का शांतिपूर्ण समाधान निकलने में मदद मिली."

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