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लॉकडाउन में वो किया, जो पहले कभी नहीं किया
लॉकडाउन में आपके साथ बहुत कुछ ऐसा हुआ होगा, जो आप किसी को बता नहीं पा रहे होंगे. बीबीसी ने कुछ हफ्तों पहले लोगों से उनके लॉकडाउन के कन्फ़ेशन भेजने को कहा था.
घर में बंद रहने की वजह से हम सभी को बहुत कुछ छोड़ना पड़ा. आपके कुछ नए गिल्ट सीक्रेट भी होंगे जो आप किसी से शेयर करना चाहते होंगे और आपमें से कुछ लोगों ने नियम तोड़े होंगे, वहीं कुछ ने अपने लिए कुछ नियम बनाए भी होंगे.
हम अपने छह पाठकों की कहनी आपके सामने रख रहे हैं - हमने उनकी पहचान छिपाने का फ़ैसला किया है.
मैंने अपने काम के लिए बनाई गई एक प्रेसेंटेशन अपने बेटे के होम वर्क के तौर पर सबमिट करवा दी. क्योंकि वो अपना होमवर्क करना भूल गया था. इसके लिए उसकी काफी तारीफ़ हुई.
मेरा बेटा 9वीं कक्षा में पढ़ता है और उसे कुछ होम-वर्क करना था. आम तौर पर मैं उसकी मदद करता हूं, लेकिन उस दिन में कुछ और कामों में व्यस्त था, और उसने आख़िर तक वो प्रेसेंटेशन नहीं बनाई थी.
मैं छात्रों को आईटी पढ़ाता हूं, इसलिए मैंने उनके लिए बनाई एक प्रेसेंटेशन अपने बेटे को दे दी और कहा कि वो उसे देखकर कुछ ऐसी ही प्रेसेंटेशन बना ले. लेकिन उसने उसमें कोई बदलाव नहीं किया - उसने बस बाहर लिखा नाम बदल दिया.
उसकी टीचर ने कहा कि उन्होंने इस उम्र के बच्चे का इससे अच्छा काम कभी देखा ही नहीं है. उसे इस पर पूरे नंबर मिले और स्कूल न्यूज़लेटर में इसका ज़िक्र भी हुआ.
अब मुझे उसके होम-स्कूलिंग वर्क पर और ज़्यादा मेहनत करनी पड़ती है, बल्कि इसे लेकर मेरे मन में बहुत गिल्ट भी है.
पहली बार मैंने ऐसा कुछ किया था. मेरा बेटा इसे लेकर बहुत खुश है. मैंने उसे कह दिया है कि ये बस एक बार हुआ और फिर कभी नहीं होगा.
सुपरमार्केट से डिलीवर हुए अपने किराने के सामान को मैंने अच्छे से साफ़ किया - सिर्फ़ अपनी सास के लिए मंगाए सामान को छोड़कर
मैं खुशकिस्मत हूं कि मेरे किराने का सामान मेरे घर पर ही पहुंच गया. इसमें मैंने अपनी बुजुर्ग सास के लिए भी कुछ सामान मंगवाया था.
ये भी सरदर्द ही है कि हर चीज़ को धोना होता है ताकि सब कुछ साफ़ हो जाए. इसलिए मैंने अपनी सास के लिए मंगाए सामान को बिना धोए सीधे थैले में डाल दिया और उन्हें दे दिया.
फिर कुछ देर बाद देखा कि वो बाहर जा रही हैं. तब मेरे दिमाग में आया कि उन्हें तो कहीं से भी कोरोना वायरस का संक्रमण हो सकता है.
मुझे गिल्ट महसूस हुई. मैं उन्हें मारने की कोशिश नहीं कर रही थी. उन्होंने कभी मुझसे पूछा ही नहीं कि क्या उन्हें सामान देने से पहले क्या मैंने इसे डिसइंफेक्ट किया है. अगर वो कहती तो मैं उन्हें बता देती.
मैं ज़्यादा डरी हुई रहती हूं. हर चीज़ को डिसइनफेक्ट करती रहती हूं. इसलिए मैंने सोचा कि "मैं अपना सामान डिसइंफेक्ट कर लेती हूं और उनका छोड़ देती हूं, वो अपना खुद कर लेंगी."
मैं गाड़ी चलाकर अपने दादा-दादी के घर "ज़रूरी" बर्थडे केक देने के लिए गया
अप्रैल की शुरुआत में मेरे दोनों बेटों का जन्मदिन था और कोरोना काल में ज़रूरी वजहों के अलावा हमें कहीं जाने के बारे में सोचना भी नहीं चाहिए था.
लेकिन मैं अपने बेटों का बर्थडे केक अपने दादा-दादी देने गया - लेकिन मैं उन्हें केक देकर दरवाज़े से ही लौट आया था.
आम तौर पर जन्मदिन के मौके पर हमारा पूरा परिवार इकट्ठा होता है, लेकिन इस साल ये मुमकिन नहीं था.
लेकिन अब मैं दोबारा उस दिन के बारे में सोचता हूं तो लगता है कि सब ऐसा करते तो हम कुछ और स्थितियों में होते. लेकिन मुझे उसके बारे में इतना बुरा भी नहीं लग रहा, क्योंकि मेरे दादा-दादी को ये बहुत अच्छा लगा. वो सबसे घुल मिलकर रहने वाले इंसान हैं और इस वक्त वो एकदम अलग-थलग रह रहे हैं, इसलिए मुझे लगा कि केक देना शायद उन्हें खुश कर दे.
मेरे पति जब एक वर्क वीडियो कॉल पर थे तो मैंने उन्हें कपड़े उठाकर अपने स्तन दिखाए, मैं ये भूल गई कि वो आइने के आगे बैठे थे
लॉकडाउन के दौरान मेरे पति घर से ही काम कर रहे हैं. उनका ऑफिस बोरिंग लोगों से भरा पड़ा है, जो वर्क फ्रॉम होम कर रहे हैं. मैंने सोचा कि किसी दिन जब वो ज़रूरी टेलीकॉन्फ्रेंस पर होंगे, तो मैं मज़ाक के तौर पर अपना टॉप उठाकर उन्हें अपने स्तन दिखाऊंगी.
और ये मैंने कुछ देर के लिए नहीं किया - काफी देर तक मैंने टॉप उठाकर रखा. लेकिन बाद में ये स्थिति असहज हो गई.
मुझे एहसास हुआ कि उनके सर के पीछे एक बड़ा सा आइना है और मैं अपने पति के सामने खड़ी थी, बिल्कुल उनकी कम्प्यूटर सक्रीन के पीछे, और ये सब कर रही थी.
जितने भी लोग उनके कॉन्फ्रेंस कॉल पर होंगे, वो उनके सर के पीछे के आइने से सब देख पा रहे होंगे.
ये सोचकर मेरा दिमाग ख़राब हो गया कि सबने मुझे देख लिया होगा.
उन्होंने चीज़ों का लिहाज़ करते हुए कुछ नहीं कहा होगा लेकिन उन्होंने सब देखा तो होगा ही. मुझे लगता है उनमें से कुछ लोग इस बारे में बाद में बातें भी कर रहे होंगे.
मेरे पति ने ऐसा दिखाया कि कुछ हुआ ही नहीं. तब उन्हें हंसी नहीं आई थी, लेकिन बाद में उन्हें हंसी आ रही थी.
मैंने इतनी शराब पी ली कि मैं भूल ही गया कि मैं अकेला हूं
मैं अपने फ्लैट में अकेला रहता हूं. मैं तभी किसी को देख पाता हूं जब कोई मेरे दरवाज़े पर कुछ सामान डिलीवर करने आता है.
मैं अपने दोस्तों के साथ वीडियो चैट करता हूं लेकिन फिर भी उस वक्त वो मेरे सामने तो नहीं होते.
मुझे एक वाइन वेबसाइट मिली, जिसपर अच्छी वाइन अच्छे दाम पर मिल रही थी. मैंने वहां से बहुत सारी वाइन खरीद ली.
जब अकेलेपन की वजह से मुझे बुरा महसूस होता है तो मैं एक या दो ग्लास वाइन पी लेता हूं. कई बार तो पूरी बोतल पी जाता हूं.
ये थोड़ा दुखद है, लेकिन मुझे लगता है ये कुछ ऐसा है जैसे हमें फ्राइडे नाइट को बार में जाने की इजाज़त मिलती थी. बड़ा अंतर ये है कि बार अब मेरे घर में ही है और लोगों की भीड़ भी नहीं है.
लॉकडाउन के दौरान भी हम कुछ दोस्तों से मिले
मैं अपने एक दोस्त के साथ एक फ्लैट में रहता हूं और उनका एक बहुत करीबी दोस्त रोड के दूसरी तरफ अकेला रहता है. हमारी एक अन्य दोस्त भी थोड़ी दूरी पर अकेली रहती है. इसलिए हम लोग आपस में मिलने लगे.
शुरुआत सैर पर जाने से हुई और फिर हमने उनके गार्डन में बारबेक्यू खाया. फिर मैंने अपना जन्मदिन मनाया और उन्हें खाने के लिए अपने घर आमंत्रित किया.
हम कुल चार बार मिले. तीन बार तो बर्थडे मनाने के लिए मिले.
इसे थोड़ा सही ठहरा सकते हैं, क्योंकि जो लोग अकेले रहते हैं. उनके लिए चीज़ें मुश्किल होती हैं. लेकिन ये भी है कि ऐसे तो सब लोग लॉकडाउन तोड़ने का जस्टिफिकेशन देने लगेंगे, इसलिए मुझे थोड़ी सी गिल्ट है.
चित्रांकन: आइरीन डे ला टोर
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