साउथ चाइना समुद्र में ''आवाजाही की आज़ादी'' हो

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भारत और अमरीका ने वैश्विक क़ानूनों के 'अधिकतम पालन' पर ज़ोर देते हुए दोहराया है कि विवादित क्षेत्रों में 'कानून के दायरे में निर्बाध व्यापार' पर कोई रोक नहीं होनी चाहिए.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, भारत और अमरीका की ओर से बुधवार को जारी किए गए एक साझा बयान में विवादित साउथ चाइना सागर में ''जहाज़ों और विमानों की आवाजाही की आज़ादी'' पर ज़ोर दिया गया है.
भारत और अमरीका के इस रुख़ से लगभग दो महीने पहले एक अंतरराष्ट्रीय अदालत ने साउथ चाइना सागर पर चीन के दावे के ख़िलाफ़ व्यवस्था दी थी.
हालांकि तब अंतरराष्ट्रीय अदालत के फैसले का विरोध करते हुए चीन ने कहा था कि इसका कोई क़ानूनी आधार नहीं है.

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अंतरराष्ट्रीय अदालत ने अपने फैसले में कहा था कि चीन ने फ़िलीपींस के मछली मारने के अधिकार में दखल दिया है.
फ़िलीपींस ने जहां इस फैसले का स्वागत किया था वहीं चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने अदालती कार्रवाई को 'ढोंग' बताया था.
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