सैन्य सुविधाएं साझा करेंगे भारत-अमरीका

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- Author, ब्रजेश उपाध्याय
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, वॉशिंगटन
भारत और अमरीका ने एक दूसरे की सैन्य सुविधाओं और साज़ो-सामान के इस्तेमाल से जुड़े एक अहम समझौते पर दस्तखत कर दिए हैं.
ये समझौता दोनों ही देशों को एक दूसरे के सैन्य ठिकानों पर फ़ौजी साज़ो-सामान की मरम्मत, आपूर्ति और ईंधन भरने का रास्ता खोल देगा.
इस समझौते का एलान अमरीका के दौरे पर आए भारतीय रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर और अमरीकी रक्षा मंत्री ऐश कार्टर की मुलाक़ात के बाद जारी एक साझा बयान में किया गया.
हांलाकि सैद्धांतिक रूप से इस समझौते पर अप्रैल में ही सहमति हो गई गई थी जब अमरीकी रक्षा मंत्री ऐश कार्टर भारत के दौरे पर गए थे.

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अमरीकी रक्षा मंत्री ऐश कार्टर का कहना था कि इस समझौते से दोनों ही देशों की फ़ौज के लिए साथ मिलकर काम करना बेहद आसान हो जाएगा लेकिन ये हमेशा दोनों की रज़ामंदी ही होगा.
कार्टर और भारतीय रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर दोनों ही ने स्पष्ट किया कि इस समझौते से किसी भी पक्ष को एक दूसरे के ठिकानों पर सैनिकों की तैनाती की इजाज़त नहीं मिलेगी.
भारत में ये मामला राजनीतिक रूप से काफ़ी संवेदनशील रहा है और इस समझौते की कोशिश लगभग एक दशक से भी ज़्यादा से चल रही थी.
वामपंथी दल इसके ख़िलाफ़ रहे हैं और यूपीए सरकार भी इसे टालती रही है. कई गुटों का मानना है कि इस समझौते से भारत अपनी गुट-निरपेक्ष नीति से हट रहा है.

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पिछले एक दशक में भारत और अमरीका के सैन्य रिश्तों में काफ़ी गर्माहट आई है.
अमरीका भारत को फ़ौजी साज़ो-सामान का सबसे बड़ा निर्यातक है और 2007 से अबतक भारत से लगभग 14 अरब डॉलर के अनुबंध हासिल कर चुका है.
भारत सबसे ज़्यादा सैन्य अभ्यास अमरीका के साथ कर रहा है और कुछ ही महीने पहले अमरीका ने भारत को अहम फ़ौजी साझेदार का दर्जा दे दिया था जो आमतौर पर बेहद करीबी मित्र देशों को दिया जाता है.
इस दर्जे से भारत अमरीका से कई अहम फ़ौजी टेक्नॉलॉजी हासिल कर सकता है जो अबतक उसे उपलब्ध नहीं थे.
दोनों ही देश वैसे भी ज़रूरत पड़ने पर एक दूसरे के सैन्य ठिकानों की मदद लेते रहे हैं लेकिन इस समझौते से उस पर एक औपचारिक मुहर लग गई है.

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वाशिंगटन स्थित थिंकटैंक हडसन इंस्टीट्यूट में भारत-अमरीका रिश्तों पर काम कर रही अपर्णा पांडे का कहना है कि ये समझौता दोनों देशों के बढ़ते सामरिक रिश्ते का प्रतीक है.
उनका कहना है, “पहले ही से दोनों देशों के फ़ौजी अधिकारियों के बीच विश्वास की एक परत कायम हो चुकी है और ये समझौता उस पर एक और नए परत की तरह है.”
वाशिंगटन में कई जानकारों का ये भी मानना है कि अमरीका और भारत के बीच बढ़ता फ़ौजी तालमेल चीन के बढ़ते प्रभाव को काबू करने की तरफ़ उठाया गया एक अहम कदम है.
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