कैसे आपको मिले मनपसंद तनख़्वाह?

तनख़्वाह

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    • Author, केट ऐशफोर्ड
    • पदनाम, बीबीसी कैपिटल

अक्सर हमें ये लगता है कि हमें कम तनख़्वाह मिल रही है. कंपनी हमारी उम्मीद और हमारी क़ाबिलियत के हिसाब से सैलरी नहीं दे रही है.

ये शिकायत बहुत से लोगों को होती है. पिछले कुछ सालों से पूरी दुनिया में ही लोगों की आमदनी नहीं के बराबर बढ़ रही है.

कंपनियां अच्छे इन्क्रीमेंट नहीं दे रही हैं. अमरीका में पिछले तीन सालों में लोगों की औसत आमदनी नहीं बढ़ी है.

वहीं ब्रिटेन में पिछले कुछ सालों में औसत आमदनी जस की तस है. तनख़्वाह भले न बढ़ रही हो, मगर ख़र्च और ज़रूरतें तो लगातार बढ़ रहे हैं.

साथ ही महंगाई की दर भी आप पर दबाव बनाए हुए रहती है. ऐसे में लोगों के पास दो ही विकल्प होते हैं.

जहां काम कर रहे हैं वहीं अपनी सैलरी बढ़वाने की कोशिश करें. या फिर नई नौकरी तलाश करें, जहां ज़्यादा तनख़्वाह मिले.

ब्रिटेन की मैनेजमेंट कंपनी एडीपी यूके की एनाबेल जोंस इस बारे में अहम सलाह देती हैं.

वो कहती हैं कि अगर आपको लगता है कि मौजूदा नौकरी में आपकी क़ाबिलियत के हिसाब से पैसे नहीं मिल रहे हैं, तरक़्क़ी नहीं हो रही है तो, ये जानिए कि आपके लिए कोई और बेहतर नौकरी तलाशने का वक़्त आ गया है.

हालांकि एनाबेल ये भी चेतावनी देती हैं कि सिर्फ़ पैसे के लिए नौकरी बदलना ठीक नहीं होगा.

सिर्फ़ पैसा अगर कम है तो मौजूदा नौकरी में ही बातचीत से तनख़्वाह बढ़ाने की कोशिश करनी चाहिए.

जब नौकरी में तनख़्वाह बढ़ाने की बात आए तो जानकारों के दिए कुछ मशविरे आपके काम आ सकते हैं.

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सबसे पहले तो ये पता लगाइए कि आप जिस ओहदे पर हैं, बाज़ार में उसके लिए औसत तनख़्वाह क्या है?

उसमें तरक़्क़ी के कितने रास्ते हैं? कंपनी आपको सही पैसा दे रही है या नहीं? आप सबसे पहले ख़ुद से कुछ सवाल कीजिए.

क्या वाक़ई आपको कम पैसे मिल रहे हैं? क्या आपको लगता है कि नौकरी में आगे बढ़ने का वक़्त आ गया है?

अगर आप ख़ुद इन सवालों के जवाब नहीं तलाश पाते हैं, तो आपको तनख़्वाह बढ़ाने की बातचीत करने में मुश्किल आएगी.

बेहतर होगा कि अच्छे से रिसर्च कर लें. साथ ही ख़ुद से सवाल-जवाब करके अपने आपको दिमाग़ी तौर पर बातचीत के लिए तैयार करें.

आपको ख़ुद पर ये भरोसा होना चाहिए कि जो पैसा आप मांगने जा रहे हैं आप उसके लायक हैं.

दूसरी अहम बात ये कि आप तनख़्वाह बढ़ाने के बारे में बात करने से पहले ख़ुद को तैयारी के लिए पूरा वक़्त दीजिए.

अपने ओहदे के लिए बाज़ार में क्या तनख़्वाह मिल रही है, ये बात अच्छे से पता लगा लीजिए.

फिर आपके लिए दूसरी जगहों पर नौकरी के कितने दरवाज़े खुले हैं, वो देख लीजिए.

अपने बॉस को आप किन तर्कों से तनख़्वाह बढ़ाने के लिए राज़ी करेंगे, वो सोच-विचार कर लीजिए.

ख़ुद को इस बात के लिए भी तैयार रखिए कि आपकी मांग ख़ारिज की जा सकती है.

ऐसी सूरत में आप क्या करेंगे? क्या आप कुछ और कम पैसे पर समझौता करने को राज़ी होंगे? वो कितनी कम रकम होगी?

या फिर अगर वो आपकी छुट्टियां बढ़ा दें, एक दिन आपको घर से काम करने का मौक़ा दें तो क्या आप कम तनख़्वाह पर काम करने को राज़ी होंगे?

बॉस से बातचीत के लिए जाने से पहले इन सवालों के जवाब तैयार रखें.

आप किस रकम पर राज़ी हो सकते हैं? कौन सा प्रस्ताव आपको मंज़ूर होगा? दिमाग़ में इन सवालों के जवाब पहले से तय कर लें.

जब बातचीत के लिए जाएं तो आंकड़ों की मदद से अपने दावे को मज़बूती दें.

इसके लिए ऑनलाइन आंकड़ों की मदद ली जा सकती है.

लेकिन याद रखें कि जो भी आंकड़े आप पेश करें, वो भरोसेमंद सूत्रों से मिले हों.

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बात करने से पहले आप ख़ुद को अपने बॉस की जगह रखकर सोचें.

क्या आपका कोई मातहत इतने पैसे मांगता तो आप दे देते?

ये भी सोचिए कि आपकी तनख़्वाह बढ़ने का बाक़ी साथियों पर क्या असर पड़ेगा.

ये भी सोचिए कि आपकी तनख़्वाह बढ़ाने की मांग के बाद वो आपको किस नज़रिए से देखेंगे?

क्या वो आपकी पेशेवर क़ाबिलियत का सम्मान करेंगे? या फिर आपको लालची मानकर हिकारत भरी नज़र से देखेंगे?

जब भी अपनी सैलरी बढ़ाने की मांग लेकर बॉस के पास जाएं, तो अपने काम, अपनी उपलब्धियों के बारे में बताएं.

आप बॉस को ये समझाने की कोशिश करें कि आप टीम के लिए कितने काम के हैं.

आपको अपने बॉस को ये यक़ीन दिलाना होगा कि आप उनकी टीम के लिए बेहद अहम हैं.

आपने उनके लिए कई बार अच्छा काम किया है.

ख़ास तौर से अपनी कुछ हालिया उपलब्धियों के बाद अगर आप तनख़्वाह बढ़ाने की मांग करते हैं, तो आपकी कामयाबी की यादें ताज़ा रहती हैं.

इससे आपका दावा मज़बूत होता है. प्रमोशन और इन्क्रीमेंट की सालाना प्रक्रिया से पहले अपनी तनख़्वाह बढ़ाने की बात करेंगे तो फ़ायदेमंद होगा.

वरना बजट तय होने के बाद आपकी मांग से बॉस को उसे मानने में दिक़्क़त होगी.

आप अपनी मांग मज़बूत ढंग से रखें, मगर जज़्बाती बिल्कुल न हों.

ऐसी मांग न रखें जो पूरी ही न हो सके. नई नौकरी में पैसे की बात करते वक़्त भी इस बात का ख़्याल रखना ज़रूरी है.

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हां, अपनी क़ाबिलियत से अपनी मांग को मज़बूती दें.

ये बात हमेशा याद रखें कि ये पैसे के लिए मोल-भाव है, न कि जंग, जिसमें जज़्बाती होना ज़रूरी है.

कई बार बात बन जाती है. कई बार नहीं भी बनती. ऐसे में भावुकता में कोई बात कहना ठीक नहीं होगा.

तनख़्वाह बढ़ाने की मांग करने, नौकरी बदलने जैसे फ़ैसले करने में अक्सर दिक़्क़तें आती हैं.

इसमें मदद के लिए आप अपने किसी तजुर्बेकार सीनियर को मेंटर बना सकते हैं.

उनसे सलाह-मशविरा कर सकते हैं. वो किन रास्तों से होकर ऊंचे ओहदे पर पहुंचे हैं.

उनके तजुर्बों से आपको काफ़ी मदद मिल सकती है.

आप ये पूछ सकते हैं कि जितने पैसे बढ़ाने की आप मांग कर रहे हैं, वो व्यवहारिक है कि नहीं.

वो आपके बॉस के नज़रिए से भी सोचेंगे और आपके बारे में भी. तो आपको उनसे सही सलाह मिल जाएगी.

तनख़्वाह बढ़ाने की बात करते वक़्त कभी भी धमकी के अंदाज़ में बात न करें.

ये न कहें कि सैलरी नहीं बढ़ाई तो आप दूसरे विकल्प तलाशेंगे.

ऐसा भी हो सकता है कि आपके बॉस को ये बात नागवार गुज़रे और वो आपको इस्तीफ़ा देने को कह दे.

इसलिए तनख़्वाह बढ़ाने और प्रमोशन की मांग करते वक़्त चेतावनी बिल्कुल न दें.

इन बातों का ध्यान रखकर आप अपने लिए वाजिब तनख़्वाह हासिल कर सकते हैं.

(अंग्रेज़ी में मूल लेख पढ़ने के लिए <link type="page"><caption> यहां क्लिक करें</caption><url href="http://www.bbc.com/capital/story/20160722-the-secret-to-getting-the-salary-you-deserve" platform="highweb"/></link>, जो <link type="page"><caption> बीबीसी कैपिटल</caption><url href="http://www.bbc.com/capital" platform="highweb"/></link> पर उपलब्ध है.)

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