सीरियाई शांति वार्ता में शामिल होगा विपक्ष

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आज सुबह सीरियाई विपक्ष के एक अहम धड़े, हाई निगोशिएशंस कमिटी, एचएनसी ने जिनेवा में हो रही शांतिवार्ता में शामिल होने की इच्छा जाहिर की है.
सीरियन नेशनल कोअलिशन के पूर्व अध्यक्ष हादी अल बाहरा ने बीबीसी को बताया कि उनका मुख्य उद्देश्य यूएन सुरक्षा परिषद के मानवीय मुद्दों से जुड़े प्रस्ताव 2254 को पूरी तरह से लागू कराना है.
अगर मानवीय मुद्दे पर कुछ प्रगति होती है तो शांति स्थापित करने पर भी बातचीत की जाएगी.
इससे पहले संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता में होने वाली सीरिया शांति वार्ता में सीरियाई विपक्ष शामिल होगा या नहीं इस पर अभी भी संदेह बना हुआ था.
जिनेवा में सीरिया शांति वार्ता शुक्रवार से प्रस्तावित थी.
इससे पहले, सीरियाई विपक्ष के कुछ नेताओं ने कहा था कि वे बातचीत में तब तक शामिल नहीं होंगे जब तक वहां नागरिकों पर बमबारी बंद नहीं की जाती.
हालाँकि एक अन्य वरिष्ठ नेता ने कहा था कि वे इस बैठक में हिस्सा लेंगे.
सीरियाई सरकार की तरफ से भी एक प्रतिनिधिमंडल बैठक में शामिल होने जिनेवा पहुंचेगा.

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सीरिया के लिए संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत स्टाफान डे मिस्टूरा ने एक वीडियो संदेश में कहा है, "यह वार्ता नाक़ाम नहीं हो सकती."
पिछले पांच सालों में सीरिया में युद्ध के कारण लगभग ढाई लाख लोगों की मौत हो चुकी है. राष्ट्रपति बशर-अल-असद का समर्थन करने वाली सेना और उनके विरोधियों के बीच लगातार चल रही लड़ाई की वजह से लगभग 1.1 करोड़ लोगों को पलायन करना पड़ा है.

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सयुंक्त राष्ट्र के प्रवक्ता अहमद फावज़ी ने शुक्रवार को कहा कि समय अनुसार शुक्रवार से बातचीत शुरु होनी चाहिए लेकिन "मेरे पास इस संबंध में कोई समय या जगह का नाम नहीं है. मैं आपको प्रतिनिधि मंडल के बारे में भी कुछ नहीं बता सकता."
पिछले महीने राजनीतिक और सशस्त्र गुटों के बीच हुई एक कॉन्फ्रेंस के बाद बनी विपक्षी सऊदी समर्थित हाई नेगोशिएशन कमेटी ने घोषणा की थी कि उनका प्रतिनिधिमंडल "किसी सूरत" में बातचीत में शामिल नहीं होगा.

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रियाद में एक बैठक के बाद कमिटी ने कहा कि वे चाहते हैं कि सीरिया पर हवाई हमले बंद हों और सरकारी सेनाओं द्वारा बंद किए गए रास्ते भी खोले जाएं.
लेकिन कमेटी के ही एक अन्य नेता हसन अब्देल अज़ीम ने शुक्रवार को कहा कि विपक्ष के सदस्य जिनेवा जा रहे हैं और दूसरे नेता भी वहां पहुंचेंगे.
उम्मीद की जा रही है कि मध्यस्थता की मौजूदगी में होने वाली यह बातचीत छह महीने चलेगी. इसमें हिस्सा लेने वाले प्रतिनिधि अलग-अलग कमरों में बैंठेंगे जबकि संयुक्त राष्ट्र के सदस्य उनके बीच मध्यस्थता करने की कोशिश करेंगे.
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