सीरिया में शेख मिसकीन पर सेना का कब्ज़ा

इमेज स्रोत, AFP

दक्षिणी सीरिया के महत्वपूर्ण शहर शेख मिसकीन को सरकारी बलों ने एक बार फिर अपने कब्ज़े में ले लिया है.

चरमपंथियों और सुरक्षाबलों के बीच एक महीने तक चले संघर्ष के बाद दमिश्क और डेरा के बीच पड़ने वाले इस शहर पर चरमपंथियों ने कब्ज़ा कर लिया था.

माना जा रहा है कि इस हमले में रूसी लड़ाकू विमानों ने अहम भूमिका निभाई है.

रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा है कि सीरिया में शांतिवार्ता से पहले रूसी सेना ने जिस तरह से वहां की सरकार की मदद की है, उससे वहां चल रहे गृहयुद्ध की दिशा बदल गई है.

लावरोव ने ये भी कहा कि अगर शांतिवार्ता में कुर्द संगठनों को शामिल नहीं गया तो समस्या का राजनीतिक समाधान निकालना मुश्किल हो जाएगा.

हालांकि संयुक्त राष्ट्र की तरफ से जारी बयान में ये नहीं बताया गया कि इस वार्ता में शिरकत करने के लिए किसे बुलाया गया है.

रूसी विदेश मंत्री सरगई लावरोव

इमेज स्रोत, AFP

इमेज कैप्शन, रूसी विदेश मंत्री सरगई लावरोव

विपक्ष के प्रतिनिधिमंडल में किन लोगों को शामिल किया जाए, इस पर असमंजस की स्थिति होने की वजह से बातचीत का बुलावा भेजने में देरी हुई थी.

लावरोव ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि जो लोग इस बात का आरोप लगा रहे है कि रूसी वायुसेना के हमलों की वजह से सीरिया में आम लोगों की मौत हो रही है उन्होंने इसका कोई सबूत नहीं दिया है.

रूस का कहना है कि वो 'सभी चरमपंथियों' को निशाना बना रहा है. इसमें कथित चरमपंथी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएस) भी शामिल है.

हालांकि सामजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि रूसी वायुसेना के कई हमलों से आम नागरिकों को भी नुकसान पहुंचा है.

इमेज स्रोत, Getty

उधर संयुक्त राष्ट्र ने सीरिया की सरकार और विपक्ष को जेनेवा में शुक्रवार से शुरू हो रही शांतिवार्ता में आमंत्रित किया है.

लावरोव ने ये भी कहा कि अगर तुर्की की बात मानते हुए सीरिया की कुर्दिश डेमोक्रेटिक पार्टी (पीवाईडी) को शांतिवार्ता में शामिल नहीं किया गया तो ये 'बहुत बड़ी' भूल होगी.

पीवाईडी, कुर्दिस्तान वर्कर्स पार्टी (पीकेके) की ही एक शाखा है जिसे तुर्की और कई विदेशी देश चरमपंथी संगठन मानते हैं.

सीरिया की आब्ज़रवेटरी फॉर ह्यूमन राइट्स के अनुसार, सरकारी सुरक्षाबलों और उनके साथी लड़ाकों ने शेख मिसकीन पर कब्ज़ा कर लिया है.

साथी लड़ाकों में लेबनान के हिजबुल्लाह के सदस्य भी शामिल हैं.

इमेज स्रोत, AFP

निगरानी समूह के निदेशक रमी अब्दुल रहमान ने न्यूज़ एजेंसी रॉयटर्स को बताया कि इस लड़ाई से शहर को बहुत नुकसान पहुंचा है.

ये देश का ऐसा इलाका है जहां अभी भी धर्मनिरपेक्ष और राष्ट्रवादी विद्रोहियों का दबदबा है.

पिछले साल 30 सितंबर को रूसी वायुसेना के राष्ट्रपति बशर अल-असद के समर्थन में वहां अभियान शुरू किया था.

उसके बाद से सीरियाई सरकार का दक्षिण में यह पहला अभियान था.

संस्था के अनुसार रूसी वायुसेना के हस्तक्षेप के चलते पिछले हफ़्ते 1015 लोगों की मौत हुई और 1141 विद्रोही लड़ाके मारे गए जिसमें आईएस के 893 लड़ाके शामिल थे.

मार्च 2011 में असद के ख़िलाफ़ शुरू हुए संघर्ष के बाद से अब तक क़रीब ढाई लाख लोग मारे गए हैं और क़रीब 1.10 करोड़ लोग बेघर हो चुके हैं.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप <link type="page"><caption> यहां क्लिक</caption><url href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi" platform="highweb"/></link> कर सकते हैं. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link> पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)