लंदन मैराथन के 7 विजेताओं पर सवाल

ब्रिटेन के अख़बार 'द संडे टाइम्स' के अनुसार पिछले 12 साल में सात बार लंदन मराथन जीतने वाले धावकों के रक्त की जांच के सैंपल संदिग्ध पाए गए हैं.

अख़बार के अनुसार सात विजेताओं, छह रनर्स अप और तीसरे स्थान पर रहने वाले सात धावकों को 'दोषी' ठहराया जाना चाहिए था या फिर कम से कम संभावित डोपिंग की जांच होनी चाहिए थी.

बीबीसी संवाददाता जॉन मैकमानुस के अनुसार अख़बार का यह भी दावा है कि जिन विशेषज्ञों ने इस मामले का अध्ययन किया है उनके अनुसार यह प्रतिस्पर्धा उन 34 शहरों की मराथन में एक है जिनमें हिस्सा लेने वाले धावकों पर सवाल उठाए गए हैं.

शुक्रवार को लंदन मैराथन के आयोजकों ने कहा था कि वो 2010 में यह दौड़ जीतने वाली महिला धावक लिलिया शोबुखोवा से जीती हुई रकम वापस लेने के लिए कानूनी कार्रवाई करने को तैयार हैं.

हज़ारों एथलीट शक के घेरे में

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हाल में 'द संडे टाइम्स' और जर्मन ब्रॉडकास्टर एआरडी ने एक व्हिसल ब्लोअर से प्राप्त जानकारी के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय एथलेटिक्स एसोसिएशनों की महासंघ (आईएएएफ़) के किए रक्त जांच नमूनों के नतीजों को सार्वजनिक किया था.

इन जानकारियों के मुताबिक विशेषज्ञों ने 5000 एथलीटों के 12,000 रक़्त जाँच नमूनों के नतीजों में पाया था कि पिछले 12 वर्षों में अलंपिक खेलों समेत कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी होने के संकेत हैं.

जिन देशों के एथलीट शक के दायरे में हैं, उनमें रूस और कीन्या का नाम सबसे ऊपर है. एक टॉप ब्रितानी एथलीट भी उन 7 ब्रितानी एथलीटों में शमिल हैं जो शक़ के घेरे में हैं.

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