'गुरदासपुर हमला, एक और मुंबई ड्रामा'

पंजाब के गुरदासपुर में हुए हमले के दौरान पोजीशन लेता सुरक्षाकर्मी

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    • Author, अशोक कुमार
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली

पाकिस्तान के उर्दू अख़बारों में भारत के गुरदासपुर में हुए हमले और इसकी वजह से दोनों देशों की बातचीत पर पड़ने वाले असर की चर्चा है.

'जसारत' का संपादकीय है - 'गुरदासपुर हमला, एक और मुंबई ड्रामा.'

अख़बार के मुताबिक़ जब भी वार्ता शुरू करने को लेकर कोई बात होती है, कोई न कोई घटना होती है या करा दी जाती है.

'अब जब दोनों देशों के बीच क्रिकेट की बात हो रही थी, विदेश सचिवों की वार्ता होने वाली थी, तो गुरदासपुर हमला हो गया या करा दिया गया.'

अख़बार के मुताबिक़, अब भारत गुरदासपुर हमले की आड़ में पाकिस्तान से हर तरह की बातचीत से कन्नी काट लेगा.

अख़बार ने आशंका जताई है कि कहीं भारत इसे पाकिस्तान और चीन के बीच आर्थिक कोरिडोर योजना के ख़िलाफ़ इस्तेमाल न करने लगे.

'पाकिस्तान पर चढाई'

पंजाब के गुरदासपुर में हुए हमले के दौरान पुलिसकर्मी

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'रोज़नामा पाकिस्तान' का कहना है कि गुरदासपुर हमले के बाद भारतीय मीडिया और राजनेता बिना किसी छानबीन के ही पाकिस्तान पर उंगली उठाने लगे.

अख़बार कहता है कि खालिस्तानियों ने इस साल भारतीय गणतंत्र दिवस को काला दिवस क़रार दिया था, और उन्होंने अपने नेता जरनैल सिंह भिंडरावाले की बरसी धूमधाम से मनाई थी.

अख़बार ने सूत्रों के हवाले से कहा है कि भारत की केंद्रीय सरकार ने पंजाब सरकार को ख़त लिखकर संभावित ख़तरे के बारे में आगाह किया था, लेकिन राज्य सरकार ने कोई ध्यान नहीं दिया.

अख़बार लिखता है कि इन बातों पर ध्यान दिए बिना भारतीय मीडिया ने आदत के मुताबिक़ पाकिस्तान पर चढ़ाई शुरू कर दी.

'भारत के अलगाववादी'

पंजाब के गुरदासपुर में हुए हमले के दौरान तैनात पुलिसकर्मी

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वहीं 'जंग' लिखता है कि भारत में इस वक्त कम से कम 16 अलगाववादी आंदोलन चल रहे हैं और उनमें कई बेहद ताक़तवर हैं.

अख़बार के अनुसार इन गुटों ने कई बार दर्जनों पुलिसवालों को घेर कर मारा है, लेकिन भारत ऐसे संगठनों पर इल्जाम कभी नहीं लगाता, जबकि पाकिस्तान पर बिना किसी जांच के ही आरोप मढ़ दिए जाते हैं.

अख़बार की भारत को सलाह है कि इस हमले की जांच कराए और 'दोनों देशों के रिश्तों को फ़िज़ूल में बिगाड़े नहीं.'

'जंग के बहाने'

भारत और पाकिस्तान के क्रिकेट फैन

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'नवा-ए-वक़्त' लिखता है कि जिस तरह बिना तहक़ीक़ात भारत पाकिस्तान पर इल्जाम लगा देता है, उससे लगता है कि वो पाकिस्तान पर जंग थोपने के बहाने तलाशता रहता है और मुंबई हमलों की तरह गुरदासपुर हमला भी ऐसी ही किसी भारतीय रणनीति का हिस्सा लगता है.

अख़बार लिखता है कि गुरदासपुर हमले के बाद निश्चित तौर पर भारत का रवैया सख्त होगा, ऐसे में पाकिस्तान को भी रक्षात्मक रवैया अपनाने की जरूरत नहीं है.

अख़बार की राय है कि अगर भारतीय क्रिकेट बोर्ड पाकिस्तान के साथ क्रिकेट नहीं खेलने का संकेत देता है, तो पाकिस्तान को भी उसके साथ क्रिकेट खेलने की बेताबी नहीं दिखानी चाहिए.

सरकार पर निशाना

पंजाब के गुरदासपुर में हुए हमले के दौरान सुरक्षाकर्मी

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रुख़ भारत का करें तो 'जदीद ख़बर' ने गुरदासपुर के अलावा भारत प्रशासित जम्मू-कश्मीर और मणिपुर में हुए हालिया हमलों पर लिखा है – आख़िर सरकार कर क्या रही है?

अख़बार के मुताबिक़ बेशक देश की सेना भारत की तरफ़ पड़ने वाली हर बुरी नजर का मुंह तोड़ जवाब देने में सक्षम है, लेकिन आंतरिक सुरक्षा हालात लगातार बिगड़ रहे हैं.

अख़बार के मुताबिक़ देश में रह-रह कर चमरपंथी हमले हो रहे हैं और चरमपंथी उस वक़्त तक खुफ़िया एजेंसी को चकमा देने में कामयाब हो रहे हैं जब तक वो अपने इरादों को अंजाम तक नहीं पहुंचा देते हैं.

उधर मुंबई धमाकों के दोषी याकूब मेमन की फांसी पर 'अख़बार-ए-मशरिक़' लिखता है कि देश के मुसलमानों और पत्रकारों के बीच याकूब को लेकर कोई हमदर्दी नहीं जताई गई और क़ानून व अदालत पर उन्हें सौ फीसदी भरोसा था.

अख़बार के मुताबिक़ ये अदालत के प्रति मुसलमानों का अटल विश्वास था और इस बात की प्रशंसा करनी चाहिए.

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