'अब होगा नवाज़ शरीफ़ का असली इम्तेहान'

नवाज़ शरीफ़

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    • Author, अशोक कुमार
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली

पाकिस्तान में चुनावी धांधली के आरोपों की जांच करने वाले आयोग की रिपोर्ट और बाढ़ से होने वाली तबाही की पाकिस्तानी उर्दू मीडिया में ख़ासी चर्चा है.

'जंग' ने इस न्यायिक आयोग की रिपोर्ट को देश में 'एक नए दौर का आगाज़' बताया है.

अख़बार कहता है कि जांच रिपोर्ट के मुताबिक़ 2013 के चुनावों में किसी तरह की धांधली के सबूत नहीं मिले, जैसा कि विपक्षी तहरीके इंसाफ़ पार्टी ने आरोप लगाए थे.

अख़बार के मुताबिक़ जहां प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ ने राष्ट्र के नाम संबोधन में आयोग की रिपोर्ट का स्वागत किया है, वही तहरीके इंसाफ़ पार्टी नेता इमरान ख़ान ने भी इसके नतीजों को मान लिया है.

अख़बार लिखता है कि इस तरह देश में लंबे समय से जारी तनाव, खींचतान और आरोपों और दोषारोपण का दौर ख़त्म हो गया है.

सियासी संकट टला

नवाज़ शरीफ़

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'जसारत' लिखता है कि रिपोर्ट से लगता है, एक बड़ा सियासी संकट टल गया है और अब नवाज शरीफ़ सरकार अपना कार्यकाल पूरा करेगी.

अख़बार की राय है कि अब असली इम्तिहान नवाज़ शरीफ़ का है कि वो इस आयोग की रिपोर्ट को किसी की हार जीत का मुद्दा बनाए बिना देश के सामने मौजूद समस्याओं को हल करने के लिए क़दम उठाएं.

रोज़नामा 'दुनिया' लिखता है कि सरकार एक बड़े दबाव से निकल गई है और अब उसे 10-11 महीनों से ठप पड़ी चुनाव सुधार कमेटी को सक्रिय करने पर ध्यान देना चाहिए ताकि आगे चुनावों पर कोई उंगली न उठा सके.

रोज़नामा 'पाकिस्तान' के मुताबिक़ जो भी हो, इस पूरी प्रक्रिया से पाकिस्तान में लोकतंत्र और मज़बूत हुआ है और एक इतिहास रचा गया है.

पाकिस्तान में पहली बार चुनावी धांधलियों की जांच किसी आयोग ने की है.

बाढ़ से तबाही

पाकिस्तान में बाढ़ की तस्वीर

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रोज़नामा 'वक़्त' ने लिखा है पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर, गिलगित और चितराल समेत कई इलाकों में बाढ़ ने तबाही मचा रखी है जिससे हज़ारों लोगों के बेघर होने और कईयों के मारे जाने की ख़बरें हैं.

अख़बार लिखता है कि देश में तकरीबन हर साल बाढ़ आती है लेकिन इसकी तबाहियों से बचने के लिए सरकार दावे तो हमेशा करती है लेकिन कभी कोई ठोस योजना सामने नहीं आती.

रोज़नामा एक्सप्रेस लिखता है कि अगर सरकार संकल्प कर ले तो न सिर्फ़ इस तबाही से बचा जा सकता है बल्कि पानी को बांधों में जमा कर सस्ती बिजली बनाई जा सकती है, ज़मीनों को सींचा जा सकता है, ज़रूरत है तो बस नेकनीयत की.

वहीं रोज़नामा 'अमन' के संपादकीय में एक अमरीकी रिपोर्ट का ज़िक्र है जिसके मुताबिक़ पाकिस्तान उन पांच देशों में शामिल है जहां के लोगों के भीतर अच्छे भविष्य की उम्मीदों में पिछले एक साल में बेहतरी आई है.

रिपोर्ट के मुताबिक़ ऐसे अन्य चार देश हैं भारत, नाइजारिया,अर्जेंटीना और स्पेन.

'भाजपा की छवि को नुकासन'

राहुल गांधी और नरेंद्र मोदी

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रुख़ भारत का करें तो भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर कांग्रेस पर भाजपा के पलटवार पर राष्ट्रीय सहारा लिखता है – सवाल अपना जवाब मांग रहे हैं.

अख़बार के मुताबिक़ लगता है कि मोदी सरकार और उसके मंत्री कह रहे हैं कि क्या हुआ अगर हमसे ग़लती हुई, कांग्रेस तो इससे भी बड़ी ग़लती कर चुकी है.

अख़बार की टिप्पणी है कि भाजपा को यह नहीं भूलना चाहिए कि जनता ने उसे इसी वादे के साथ सत्ता सौंपी थी कि जो कुछ कांग्रेस ने किया भाजपा वो हरगिज़ नहीं करेगी.

'सियासी तक़दीर' ने संसद में गतिरोध का मुद्दा उठाते हुए कहा है कि भाजपा ने भी यूपीए के दौर में कॉमनवेल्थ खेल और कोयला घोटाले के मुद्दे पर संसद नहीं चलने दी थी.

अख़बार के मुताबिक़ शायद भाजपा को लगता है कि इस्तीफों का सिलसिला शुरू हुआ तो पार्टी की छवि को नुकासन होगा जिससे आने वाले विधानसभा चुनावों में उसे नुक़सान हो सकता है.

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