'मरने के बाद' का अनुभव कैसा होता है?

इमेज स्रोत, BBC Future
- Author, राचेल नूअर
- पदनाम, बीबीसी फ़्यूचर
ये वाकया इंग्लैंड में 2011 का है. 57 साल के मिस्टर 'ए' काम के दौरान अचानक बेहोश हो गए और उन्हें साउथैम्पटन के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया.
चिकित्साकर्मी उनके पेशाब करने के रास्ते में केथेटर डालने की कोशिश कर रहे थे, तभी उन्हें हार्ट अटैक आया. ऑक्सीजन की कमी से उनके दिमाग ने काम करना बंद कर दिया और मिस्टर 'ए' की मौत हो गई.
लेकिन आपको ये जानकर अचरज होगा कि अस्पताल के उस कमरे में उसके बाद क्या क्या हुआ...
ये मिस्टर 'ए' को याद है. उनके मुताबिक मेडिकल स्टाफ ने उनको तुरंत ऑटोमेटेड 'ए' क्सटर्नल डाफाइबरिलेटर (ए आईडी) से झटका देना शुरू किया.
इस दौरान मिस्टर 'ए' को दो लोगों की आवाज़ें भी सुनाई दीं- 'मरीज को झटके दो.' इसी दौरान मिस्टर 'ए' को लगा कि कोई महिला उनका हाथ पकड़कर छत के रास्ते से उन्हें बाहर ले जाना चाहती हैं. वे अपने बेजान शरीर को छोड़कर उसके साथ हो लिए .
STY38468232वो लोग जो ख़ुद को ही भूल गए... वो लोग जो ख़ुद को ही भूल गए... ख़ुद को भूल जाने का अनुभव कैसा होता है? भूलने वाली बीमारी का क्या है सच?2015-04-27T16:26:49+05:302015-04-30T14:14:35+05:302015-04-30T14:14:35+05:302015-04-30T14:14:35+05:30PUBLISHEDhitopcat2
मिस्टर 'ए' याद करते हुए बताते हैं, "मुझे ऐसा लगा कि वह मुझे जानती है. मुझे ये भी लगा कि मैं उस पर भरोसा कर सकता हूं. मुझे लगा कि वह किसी वजह से यहां आई है, लेकिन वह वजह मुझे मालूम नहीं है. अगले ही पल मैंने नीचे खुद को पड़ा हुआ देखा, नर्स और एक गंजे शख़्स को भी देखा."
मौत का अनुभव

इमेज स्रोत, Thinkstock
अस्पताल के रिकॉर्ड्स के मुताबिक एईडी से जुड़े दो आदेश दिए गए थे और उनके आसपास वैसे ही लोग मौजूद थे, जैसा कि मिस्टर 'ए' ने बताया है. यानी अपना इलाज शुरू होने से पहले जिन लोगों को मिस्टर 'ए' ने नहीं देखा था, ना केवल उनकी बल्कि उनके कामों के बारे में भी मिस्टर 'ए' ने सही बताया.
मिस्टर 'ए' ने उन तीन मिनटों के दौरान घटी हर बात का सही जिक्र किया, जो तब घटीं जब असल में मृत थे और उन्हें इनके बारे में जानकारी नहीं होनी चाहिए थी.
मिस्टर 'ए' अपनी यादें इसलिए लोगों के साथ शेयर कर पा रहे हैं क्योंकि डॉक्टरों की कोशिशों से उनमें जीवन लौट आया. मिस्टर 'ए' का उदहारण जर्नल रिससिटेशन के एक पर्चे में शामिल किया गया है. यह पर्चा मौत के करीब से अनुभवों को स्वीकार करता है.
अब तक तो शोधकर्ताओं के मुताबिक जब हृदय धड़कना बंद कर देता है या फिर आदमी के दिमाग को रक्त नहीं मिलता है तो सभी जागरूकता उसी वक्त समाप्त हो जाती है.
यानी आदमी की तकनीकी तौर पर मौत हो जाती है. जब से लोगों ने मौत के विज्ञान के बारे में जानना शुरू किया है, तबसे उन्हें यह भी मालूम होने लगा है कि ऐसी स्थिति से आदमी जीवन में लौट भी सकता है.
STY38920016आख़िर 'फ़ीमेल वायग्रा' की कहानी है क्या? आख़िर 'फ़ीमेल वायग्रा' की कहानी है क्या? उन औरतों की कहानी जिनकी सेक्स में दिलचस्पी घटने लगी.2015-05-27T12:48:24+05:302015-05-27T18:48:39+05:302015-06-03T15:13:25+05:302017-02-06T15:50:53+05:30PUBLISHEDhitopcat2
सालों तक ऐसे मामलों के बारे में आदमी उस घटना की यादों को बताता है, लेकिन विज्ञान और डॉक्टर उसे स्वीकार नहीं करते. इसकी वजह तो यही थी कि यह विज्ञान की खोजबीन के दायरे से बाहर की बातें थीं.
न्यूयार्क के स्टोनी ब्रूक यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ़ मेडिसीन के रिससिटेशन रिसर्च के निदेशक और क्रिटिकल केयर के फिजीशियन सैन पारनिया ऐसे अनुभवों पर रिसर्च कर रहे हैं.

इमेज स्रोत, Thinkstock
पारनिाय अमरीका और ब्रिटेन के 17 संस्थानों के सहयोगियों के साथ मिलकर उन 2000 लोगों के अनुभवों पर अध्ययन कर रहे हैं, जिनको ऐसे अनुभव हुए हैं.
2000 लोगों पर अध्ययन
चार साल तक इन लोगों ने इन 2000 हार्ट अटैक के रोगियों पर नज़र रखी. इन सभी में समानता ये थी कि मरीज के हृदय ने काम करना बंद कर दिया था और आधिकारिक तौर पर उनकी मृत्यु हो चुकी थी.
इन 2000 मरीजों में से करीब 16 फीसदी लोगों को डॉक्टरों ने मौत के मुंह से वापस खींच लिया. पारनिया और उनके सहयोगियों ने इन 16 फीसदी लोगों में से एक तिहाई - यानी 101 लोगों का इंटरव्यू किया.
पारनिया बताते हैं, "हमारा लक्ष्य उनके अनुभवों को समझना था. इनके मानसिक और ज्ञान संबंधी अनुभवों को जानना था. हमें ऐसे भी लोग मिले जिनके पास अपनी मौत के बाद के पलों के बारे में सारी जानकारी थी."
STY39267338मौत से बचने का दिमाग पर कितना असर?मौत से बचने का दिमाग पर कितना असर?भयानक अनुभव या डरावनी घटना को दिमाग से निकाल पाना संभव है.2015-06-18T23:18:34+05:302015-06-21T14:10:14+05:302015-06-21T14:10:14+05:302015-06-21T14:10:14+05:30PUBLISHEDhitopcat2
तो मिस्टर 'ए' अकेले ऐसे शख़्स नहीं हैं, जिनके पास अपनी मौत के पलों की यादाश्त है. इस अध्ययन में हिस्सा लेने वाले करीब 50 फ़ीसदी लोगों को कुछ ना कुछ उन पलों की याद थी.

इमेज स्रोत, Thinkstock
लेकिन मिस्टर 'ए' और एक अन्य महिला को छोड़ दें तो किसी भी मरीज का अनुभव उन घटनाओं से मेल नहीं खाता था जो उनकी मौत के बाद उनके आसपास घटी थीं.
इनमें से कुछ ने सपने जैसी स्थिति या फिर भ्रामक तस्वीरों का जिक्र किया था. इन अनुभवों को पारनिया और उनके सहयोगियों ने सात प्रमुख थीम में बांटा है. पारनिया कहते हैं, "यह बताता है कि मौत के दौरान मानसिक अनुभव का दायरा विस्तृत है और इसका अतीत के अनुभव से नाता है."
वो 7 थीम
ये सातों थीम इस तरह से हैं- ''डर, जानवरों और पौधों को देखना, चमकीली रोशनी, हिंसा और उत्पीड़न, पहले देखा हुआ कोई दृश्य, परिवार को देखना और हार्ट अटैक के बाद की घटनाओं का जिक्र.''

इमेज स्रोत, Thinkstock
वैसे इन लोगों के अनुभव प्रसन्न करने वाले भी हैं और डरावने भी हैं. कई लोग खुद के डरे होने और पीड़ित होने का अनुभव बताते हैं. मसलन एक मरीज की सुनिए- "मैं एक समारोह में गया और समारोह में आग लग गई. मेरे साथ चार लोग थे, जो झूठ बोलता उसकी मौत हो जाती. मैंने ताबूत में लोगों को दफन होते हुए देखा." किसी ने बताया कि उसे किसी ने गहरे पानी में खींच लिया.
करीब 22 फ़ीसदी लोगों को शांति और प्रसन्नता से जुड़ी चीजों का अनुभव हुआ. कुछ को जीवित चीजें दिखाई दीं. एक ने बताया, "हर तरफ पौधे थे, फूल नहीं." तो कुछ ने बताया, "मुझे तो शेर और बाघ दिखाई दिए."
कुछ को चमकीली रोशनी भी दिखाई दी. कुछ ने अपने परिवार वालों से मुलाकात का जिक्र किया. इतना ही नहीं कुछ लोगों ने पहले देखी हुई घटना, या शरीर से अलग होने के भाव का जिक्र किया.
STY39038356बिल्ली आपके दिमाग़ को काबू कर सकती है?बिल्ली आपके दिमाग़ को काबू कर सकती है?आपको यकीन भले ना हो लेकिन बिल्ली अपने पालने वालों के दिमाग पर काबू कर लेती है.2015-06-03T21:22:38+05:302015-06-09T10:48:16+05:302015-06-09T10:50:00+05:302015-06-09T11:38:35+05:30PUBLISHEDhitopcat2
पारनिया कहते हैं, "यह स्पष्ट है कि ये लोगों की मौत के बाद के अनुभव थे. ये जरूर था कि ये अनुभव उनकी पृष्ठभूमि और पूर्वाग्रह वाली सोच पर आधारित थे. जिस तरह से भारत का कोई शख्स मौत के बाद वापसी करते कहे कि उसने कृष्ण को देखा था. उधर एक अमरीकी शख्स ये कहे कि उसने ईसा को देखा है. हालाँकि किसे पता है कि ईश्वर कैसा दिखता है."
नई जानकारियों का इंतज़ार

इमेज स्रोत, Thinkstock
शोध करने वाला यह दल अब तक इन विभिन्न अनुभवों के अंतर को नहीं समझ पाया था. पारनिया के मुताबिक ये अनुभव और भी लोगों को होता होगा लेकिन कई लोगों की यादाश्त दवाओं के वजह से प्रभावित होती होगी.
पारनिया ये भी मानते हैं कि मौत के मुंह से वापस आने वाले लोगों में कई तरह के बदलाव देखने को मिलते हैं- ''कुछ का मौत का डर चला जाता है, तो कुछ के जीवन में परोपकारी भाव बढ़ जाता है."
बहरहाल, पारनिया और उनके सहयोगी आपस में इस विषय पर विस्तृत अध्ययन की तैयारी की योजना बना रहे हैं, ऐसे में इस मामले में अभी और भी जानकारियों के सामने आने की उम्मीद है.
<italic><bold>अंग्रेज़ी में <link type="page"><caption> मूल लेख</caption><url href="http://www.bbc.com/future/story/20150303-what-its-really-like-to-die" platform="highweb"/></link> यहां पढ़ें, जो <link type="page"><caption> बीबीसी फ़्यूचर</caption><url href="http://www.bbc.com/future" platform="highweb"/></link> पर उपलब्ध है.</bold></italic>
<bold>(बीबीसी हिन्दी के ए ंड्रॉए ड ऐप के लिए <link type="page"><caption> आप यहां </caption><url href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi" platform="highweb"/></link>क्लिक कर सकते हैं. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link> पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)</bold>












