अमरीका में 15 चीनियों पर धोखाधड़ी का आरोप

अमरीकी झंडा

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अमरीका के क़ानून और न्याय विभाग ने 15 चीनी नाग़रिकों पर विश्वविद्यालय की परीक्षाओं में धांधली का आरोप लगाया है.

अभियोजकों के अनुसार इन लोगों ने वैध छात्रों की जगह परीक्षा देने के लिए जाली पासपोर्ट का भी इस्तेमाल किया.

उन पर आरोप है कि उन्होंने 2011 से 2015 तक पश्चिमी पेन्सेलवेनिया में इस धोखाधड़ी को अंजाम दिया.

जिन लोगों पर आरोप लगाए गए हैं, उनकी उम्र 19 से 26 साल के बीच है. ये लोग ब्लैक्सबर्ग, वर्जीनिया, बॉस्टन और मैसाचुसेट्स सहित उन शहरों में रह रहे हैं जहां मशहूर युनिवर्सिटी मौजूद हैं.

कई परीक्षाओं में धांधली

अभियुक्तों ने अमरीकी विश्वविद्यालयों में दाख़िले के लिए महत्वपूर्ण परीक्षा स्कॉलेस्टिक ऐप्टिट्यूड टेस्ट (एसएटी), टेस्ट आॅफ इंग्लिश एज़ ए फॉरेन लैंग्वेज (टोफल) और ग्रेजुएट रिकॉर्ड एग्ज़ामिनेशन (जीआरई) में अन्य छात्रों की जगह जाकर परीक्षाएं दीं.

पेन्सेलवेनिया के एटॉर्नी डेविड हिक्टन ने कहा, ''इस धोखाधड़ी से जिन लोगों को फायदा पहुंचता था उन्हें अमरीका के नामी कॉलेजों में दाख़िला मिल जाता था.''

इस धोखाधड़ी को 2011 से 2015 के बीच पश्चिमी पेन्सेलवेनिया में अंजाम दिया गया.

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इमेज कैप्शन, इस धोखाधड़ी को 2011 से 2015 के बीच पश्चिमी पेन्सेलवेनिया में अंजाम दिया गया.

अभियोजकों ने यह भी आरोप लगाया है कि आरोपी छात्र वीज़ा जरूरतों में भी फर्ज़ी चीनी पासपोर्ट की मदद से जालसाज़ी कर रहे थे.

हो सकती है बड़ी सज़ा

दोषी पाए जाने पर इन लोगों को 20 साल की जेल, ढाई लाख डॉलर (क़रीब 1.60 करोड़ रुपए) का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं.

वहीं इसके अलावा साज़िश रचने के आरोप में इन लोगों को पांच साल तक की जेल हो सकती है.

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