'इराक़ी सेना में लड़ने का जज़्बा नहीं'

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अमरीकी रक्षा मंत्री एश्टन कार्टर ने कहा है कि रमादी शहर में इराक़ी बलों की हार से पता चलता है कि उनमें इस्लामिक स्टेट के लड़ाकों से निपटने का जज़्बा नहीं है.
सीएनएन को दिए साक्षात्कार में कार्टर ने कहा, ''ऐसा लगता है कि इराकी बलों ने लड़ने की इच्छा ही नहीं दिखाई. उनकी संख्या कम नहीं थी. सच तो ये है कि सामने वाली सेना से उनकी संख्या ज़्यादा थी.''
हालात को बेहद चिंताजनक बताते हुए उन्होंने कहा, ''हम उन्हें प्रशिक्षण और उपकरण दे सकते हैं, लेकिन हम उनमें लड़ने की इच्छा पैदा नहीं कर सकते हैं.''
'अवास्तविक और निराधार'

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इराक़ की डिफेंस एंड सिक्योरिटी कमेटी के प्रमुख ने कार्टर के इस बयान को ''अवास्तविक और निराधार'' बताया है.
इराक़ की सरकार ने इस्लामिक स्टेट को आगे बढ़ने से रोकने के लिए इलाके में शिया लड़ाकों को तैनात किया है.
वॉशिंगटन में मौजूद बीबीसी संवाददाता रजनी वैद्यनाथन का कहना है कि कार्टर के इस बयान के ज़रिए अमरीका ने इराक़ी सेना का तीखा मूल्यांकन किया है. इससे इराक़ के उन आलोचकों को बल मिला है जो कहते रहे हैं कि इराक़ में अमरीकी सैनिकों के उतरने के बाद ही इस्लामिक स्टेट को हराया जा सकता है, हालांकि अमरीका इससे इनकार करता रहा है.
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