आईएस तबाह न कर दे 'सीरिया की विरासत'

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चरमपंथी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएस) के सीरिया के पल्माइरा शहर को अपने क़ब्ज़े में लेने के साथ आशंकाएं जताई जाने लगी हैं कि चरमपंथी इस ऐतिहासिक शहर की सांस्कृतिक विरासत को तहस-नहस कर सकते हैं.
आईएस ने गुरुवार को सीरिया के ऐतिहासिक पल्माइरा शहर पर क़ब्ज़ा कर लिया था. इसे रेगिस्तान का वेनिस भी कहा जाता है.

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इसके साथ ही अब ये डर सताने लगा है कि पल्माइरा के ऐतिहासिक खंडहरों की धरोहर तबाह हो सकती है.
यूनेस्को ने इन पुरातात्विक खंडहरों को विश्व विरासत सूची में शामिल किया है.
दो बड़े ख़तरे
पल्माइरा के महत्व पर सीरिया में रह चुके और कैंब्रिज विश्वविद्यालय के रिसर्च स्कॉलर अली ख़ान महमूदाबाद ने बीबीसी संवाददाता विनीत खरे ने बात की.

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महमूदाबाद ने बताया कि पल्माइरा की सांस्कृतिक विरासत बहुमूल्य है.
वहाँ हज़ारों सालों से सभी समुदायों के लोग रहते आए हैं. पल्माइरा के स्मारक इस बात की गवाही देते हैं. वहाँ न सिर्फ मुसलमान रहते थे, बल्कि ईसाई, यहूदी, ईरानी, रूमी और यूनानी भी रहते थे.
महमूदाबाद ने बताया कि पल्माइरा पर आईएस के क़ब्ज़े के बाद दो तरह की आशंकाएं सताने लगी हैं.
पहला डर ये है कि वहाँ 2000 साल पहले के इस्लाम धर्म के पहले के मंदिरों और इबादतगाहों को मिटा दिया जाएगा.

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दूसरा डर ये है कि आईएस ने अब तक अनेक कलाकृतियों को अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में अवैध तरीके से बेचकर पैसा कमाया है.
पल्माइरा के म्यूजियम से भी बहुत कुछ बेचा गया है और अब इसमें और तेज़ी आ सकती है.
महमूदाबाद ने बताया कि पल्माइरा से भारत के रिश्ते बहुत पुराने हैं. सदियों पहले पल्माइरा से व्यापारी भारत आते थे.
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