इस्लामी चरमपंथ से अब ऐसे निपटेगा फ्रांस

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भविष्य में चरमपंथी हमले रोकने के लिए फ्रांसीसी संसद ने एक विधेयक पारित किया है, जिससे ख़ुफ़िया एजेंसियों की ताकत कई गुना बढ़ जाएगी.
इसी साल जनवरी में शार्ली ऐब्डो पत्रिका के दफ़्तर पर हुए हमले के बाद इस विधेयक की रूपरेखा तैयार की गई थी. उस हमले में 17 लोगों की जानें गई थीं.

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संसद में यह विधेयक 86 के मुक़ाबले 438 मतों से पारित हुआ.
बिल की मुख्य बातें

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1. इसके तहत ख़ुफिया एजेंसियों को कई नए अधिकार और ताक़तें मिल गई हैं. इसके लागू होने के बाद सुरक्षा अधिकारी बिना अदालत की सहमति के किसी भी व्यक्ति या संस्था की निगरानी कर उसकी छान-बीन कर सकते हैं.
2. चरमपंथ को काबू में करने के लिए एक नई सुपरवायज़री बॉडी बनाई जाएगी जिसके लिए सुरक्षा एजेंसियां जवाबदेह होंगी.
3. देश में इंटरनेट प्रोवाइडर कंपनियों को किसी भी व्यक्ति या संस्था के संदिग्ध बरताव को ऑटोमेटिक तरीके से ट्रैक करना होगा.
इंटरनेट पर लोगों ने किस वक्त, किस जगह से, किस तरह के डेटा का आदान प्रदान किया ये सूचनाएँ इकट्ठा करने का अधिकार ख़ुफ़िया एजेंसियों को होगा.
विरोध

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कई नागरिक अधिकार संस्थाओं और राजनेताओं ने इस नए विधेयक का विरोध किया है.
इनका मानना है कि इससे सुरक्षा और ख़ुफ़िया एजेंसियां बेहद ताकतवर हो जाएँगी और लोगों को बेवजह तंग करेंगी.
आलोचकों का मानना है कि इससे लोकतंत्र के मूल ढांचे को धक्का पहुंचेगा और लोगों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का भी हनन होगा.
अब ये विधेयक फ्रांस के उच्च सदन सीनेट में जाएगा. वहां भी इसके पारित होने की संभावना है. जिसके बाद ये कानून बन जाएगा.
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