डरबन में हिंसा के डर से भागे विदेशी

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दक्षिण अफ्रीका में प्रवासी मज़दूरों के खिलाफ हमलों में छह लोगों की मौत हो गई है. हजारों लोगों को अपना घर छोड़ कर दूसरी जगहों पर शरण लेनी पड़ी है. राष्ट्रपति जैकब ज़ूमा ने देश में रहने वाले प्रवासियों के खिलाफ हिंसा को रोकने का भरोसा दिया है.
राष्ट्रपति ज़ूमा ने इन घटनाओं से निबटने के लिए अपना इंडोनेशिया दौरा भी रद्द कर दिया है.
दक्षिण अफ्रीका में हिंसा की घटनाएं दो हफ्ते पहले शुरू हुईं. ज़ूलू समुदाय के मुखिया गुडलक ज्वेलथिनी ने आह्वान किया कि विदेशी लोगों को दक्षिण अफ्रीका छोड़ देना चाहिए. इसके साथ ही हथियार बंद गुट ने विदेशी मजदूरों के खिलाफ हिंसा शुरू कर दी गई.
जला कर मारा

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विदेशियों की दुकानों और घरों को निशाना बनाया गया. कई लोगों को जला कर मार डाला गया है. इस हिंसा में अब तक छह लोगों की जान गई है. हिंसा पर उतारू गुट का कहना है कि दक्षिण अफ्रीकी लोगों की नौकरियां विदेशियों के हाथों में चली जा रही हैं.
दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति जैकब जूमा ने डरबन के पास एक अस्थायी शिविर का दौरा किया. इस शिविर में एक हज़ार से ज्यादा प्रवासी मजदूर हिंसा के डर से छिपे हुए हैं. कई जगहों पर मजदूरों ने जान बचाने के लिए पुलिस थाने में शरण ली है.
अफ्रीकी राष्ट्रपति ने प्रवासियों से इन हमलों के लिए माफी मांगी है. शिविर में मौजूद कुछ लोगों ने बहुत देर से हरकत में आने के लिए उनसे नाराज़गी जताई.

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दक्षिण अफ्रीका के गाउतेंग प्रांत के प्रीमियर डेविड माखुरा ने भी अस्थायी शिविर का दौरा किया है. उन्होंने कहा कि पूर्वाग्रह और हिंसा उस देश को नहीं दिखाता है जिसके लिए हमने संघर्ष किया है.
डेविड माखुरा ने कहा, ''हमें दक्षिण अफ्रीका के हरेक इंसान को यह समझाने के लिए हर संभव कोशिश करनी होगी कि दूसरे लोगों के प्रति हिंसा सिर्फ इसलिए कि वो दूसरे देश का नागरिक है हमारे देश के सपनों से मेल नहीं खाता जिसके लिए हमारे पूर्वजों ने जान दी.''
विदेशियों की वापसी

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हिंसा के बाद इस इलाक़े के कुछ देशों ने बसों में भर कर अपने नागरिकों को वापस बुलाना शुरू कर दिया है. इस बीच ज़िम्बाब्वे के राष्ट्रपति रॉबर्ट मुगाबे ने अफ्रीकी लोगों को मारने की कड़ी निंदा की है.
राष्ट्रपति रॉबर्ट मुगाबे ने कहा,''मैं हैरानी और नाराज़गी जताना चाहता हूं, हम इस बात से घृणा करते हैं जो डरबन में हुआ. वहां पांच छह अफ्रीकी लोगों को जूलू समुदाय के लोगों ने जला कर मार डाला है. दूसरे अफ्रीकी लोगों के साथ इतना भयानक बर्ताव कभी कोई माफ नहीं कर सकता.''

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दक्षिण अफ्रीका में ज़िम्बाब्वे के इसाक मोयो ने अस्थायी शिविरों में जा कर अपने देश के लोगों से मुलाक़ात की है. इस मुलाक़ात के बाद उन्होंने कहा कि बहुत से लोग ज़िम्बाब्वे वापस लौट जाना चाहते हैं.
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