बॉस्टन चरमपंथी हमले में ज़ोखर दोषी

ज़ोखर सारनाएफ़

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    • Author, ब्रजेश उपाध्याय
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, वॉशिंगटन

अमरीका में एक जूरी ने वर्ष 2013 में हुए बॉस्टन बम हमले के अभियुक्त ज़ोखर सारनाएफ़ पर लगे सभी 30 आरोपों के तहत उन्हें दोषी करार दिया है.

इन 30 आरोपों में से 17 के लिए मौत की सज़ा हो सकती है और इस मुकदमे की सुनवाई के दूसरे चरण में जूरी ये तय करेगी कि सारनाएफ़ को क्या सज़ा दी जाए.

सारनाएफ़ पर आरोप था कि उन्होंने अपने भाई के साथ मिलकर 15 अप्रैल, 2013 को बॉस्टन मैराथन दौड़ के समय वहां कीलों और बारूद से बने दो प्रेशर कुकर बम वहां रखे थे.

बोस्टन धमाके में मारे गए लोग

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धमाके में तीन लोगों की मौत हो गई थी और 260 घायल हुए थे जिनमें से 17 ने अपने पांव गंवा दिए.

सरकारी वकीलों में से एक, भारतीय मूल के आलोक चक्रवर्ती के अनुसार, रूस से यहां आए ज़ोखर और तैमरलान सारनाएफ़ अमरीका को मुसलमानों के ख़िलाफ़ कार्रवाई के लिए सबक सिखाना चाहते थे.

ग्यारह सितंबर 2001 के बाद अमरीकी ज़मीन पर हुए इस चरमपंथी हमले ने बहुतों को इसलिए भी चौंका दिया था क्योंकि ये हमला दो ऐसे नौजवानों ने किया था जो अमरीकी संस्कृति में पूरी तरह से रचे-बसे हुए थे.

सबूत

ज़ोखर सारनाएफ़

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सारनाएफ़ के बड़े भाई तैमरलान की पुलिस की गोली से मौत हो गई थी.

इस हमले में मारे गए आठ साल के बच्चे मार्टिन रिचर्ड की मां ने फ़ैसला आने के फ़ौरन बाद अपने चेहरे से आंसू पोछे और उनके पति बिल रिचर्ड ने सरकारी वकील को गले लगा लिया.

बिल रिचर्ड ने सुनवाई के दौरान जूरी के सामने उस दहलाने वाली घटना की तस्वीर पेश की थी जिसमें उन्होंने बताया कि कैसे उन्हें धमाके के बाद अपने आठ साल के बेटे के शव को वहां छोड़ना पड़ा ताकि वो अपनी छह साल की बेटी को अस्पताल ले जा सकें क्योंकि बम हमले में वो अपना एक पांव खो चुकी थी.

सबूत के तौर पर सरकारी वकीलों ने एक वीडियो भी पेश किया था जिसमें ज़ोख़र सारनाएफ़ को आठ साल के बच्चे के पास एक बैगपैक में रखे प्रेशर कुकर को रखते दिखाया गया है.

इसके अलावा एक नाव जहां वो छिपे हुए थे उसकी दीवार पर उन्होंने लिख रखा था “अल्लाह मुझे जन्नत फरमाएं.”

मौत की सज़ा से बचाने की कोशिश

जूडी क्लार्क

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सारनाएफ़ के दोषी करार दिए जाने में शायद ही कोई शक था लेकिन उनकी वकील जूडी क्लार्क की पूरी कोशिश इस बात की होगी कि उन्हें मौत की सज़ा से बचाया जा सके.

उनकी दलील है कि ज़ोख़र सारनाएफ़ तब 19 साल के थे और अपने बड़े भाई के प्रभाव में आकर उन्होंने इस हमले को अंजाम दिया. क्लार्क कई दोषी मुजरिमों को मौत की सज़ा से बचाने के लिए जानी जाती हैं.

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