मोदी और शरीफ़ से मलाला मायूस

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बुधवार को शांति का नोबेल पुरस्कार पाने जा रहे भारत के बाल अधिकार कार्यकर्ता कैलाश सत्यार्थी और पाकिस्तान की मलाला युसूफ़ज़ई ने दुनिया भर के बच्चों के अधिकार सुनिश्चित करने पर ज़ोर दिया.
मंगलवार को ओस्लो में एक साझा प्रेस कांफ्रेस में कैलाश सत्यार्थी ने कहा, "जब तक दुनिया का एक बच्चा भी ख़तरे में है, पूरी दुनिया ख़तरे में है."
भारत में बाल मज़दूरी के ख़िलाफ़ मुहिम चलाने वाले सत्यार्थी ने कहा कि मलाला यूसुफ़ज़ई के साथ साझा तौर पर शांति का नोबेल पुरस्कार जीतना उनके लिए गर्व की बात है.
मलाला विश्व स्तर पर उस समय चर्चा में आई जब पाकिस्तान के कबायली इलाकों में लड़कियों की शिक्षा के लिए मुहिम चलाने पर उन्हें अक्तूबर 2012 में तालिबान के हमले का शिकार होना पड़ा.
'कामयाबी का राज़़'

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मलाला ने कहा कि उनकी इच्छा थी कि जब उन्हें शांति का नोबेल पुरस्कार दिया जाए तो भारत और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री वहां एक साथ मौजूद हों, लेकिन ऐसा संभव होता नहीं दिख रहा है.
उन्होंने कहा, "मेरी इच्छा थी कि दोनों प्रधानमंत्री आएं...अभी तो मुझे दोनों तरफ़ से कोई पुष्टि नहीं मिली है और समारोह कल है. तो इसका मतलब यही है कि कोई सकारात्मक जवाब नहीं आया है."
मलाला ने कहा, "दोनों देशों के बीच शांति हो क्योंकि इसी में दोनों के विकास का राज़ है और इसी तरह ही हम कामयाब हो सकते हैं."
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