मलाला और कैलाश सत्यार्थी को नोबेल पुरस्कार

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इस साल शांति का नोबेल पुरस्कार भारत के साामाजिक कार्यकर्ता कैलाश सत्यार्थी और पाकिस्तान की मलाला यूसुफज़ई को दिया गया है.
कैलाश सत्यार्थी 'बचपन बचाओ' नाम का एक ग़ैर सरकारी संगठन चलाते हैं जो बाल मज़दूरी के ख़िलाफ़ काम करता है.
वहीं मलाला यूसुफज़ई को पाकिस्तान के क़बायली इलाकों में लड़कियों की शिक्षा की मुहिम चलाने के लिए चरमपंथियों की गोली का निशाना बनना पड़ा.
सम्मान मिलने के बाद बीबीसी से बात करते हुए सत्यार्थी ने कहा, "ये सभी भारतीयों के लिए बड़े गौरव की बात है. ये उन सब बच्चों के लिए सम्मान की बात है जो प्रौद्योगिकी और अर्थव्यवस्था की इतनी प्रगति के बावजूद दासता में रह रहे हैं."
सत्यार्थी ने कहा कि वह दुनिया के ऐसे सभी बच्चों को ये सम्मान समर्पित कर रहे हैं.
उन्होंने कहा, "ये भारत के लोकतंत्र की भी जीत है जहाँ मैं बच्चों की दासता से जुड़े मसले सामने ला सका और जैसे भी हुआ कुछ थोड़ा-बहुत कर सका. बच्चों की दासता के विरुद्ध जो संघर्ष भारत में शुरू हुआ वो अब एक वैश्विक मुद्दा हो चुका है. पिछले 30 वर्षों से जिसने भी मुझे सहायता दी है, मैं उन सबका शुक्रगुज़ार हूँ."
उनके मुताबिक़ उन्हें पता था कि कई लोगों ने उनका नाम इस सम्मान के लिए भेजा है.
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