मधुमक्खियों की जान आफ़त में क्यों ?

स्प्रे के चलते मधुमक्खियों फूलों की ओर आकर्षित नहीं होतीं और परागण भी नहीं हो पाता हैं
इमेज कैप्शन, स्प्रे के चलते मधुमक्खियों फूलों की ओर आकर्षित नहीं होतीं और परागण भी नहीं हो पाता हैं

यूरोपीय संघ जल्द ही एक ऐसे प्रस्ताव पर मतदान करने वाला है जिसके तहत मधुमक्खियों पर <link type="page"><caption> कीटनाशकों</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/science/2013/02/130128_wasps_vs_moths_pk.shtml" platform="highweb"/></link> के इस्तेमाल को प्रतिबंधित किया जा सकेगा.

जिस तरीके से मधुमक्खियों की तादाद तेज़ी से घटती जी रही है. उसे देखते हुए सभी यूरोपीय देश चिंतित हैं.

माना जाता है कि फसलों पर छिड़के जाने वाले स्प्रे में ‘निओनिकोटिनॉएड’ नाम का रसायन होता है जो कि मधुमक्खियों को नुकसान पहुंचाता है.

यूरोपीय आयोग का कहना है कि इस विषैले स्प्रे के चलते मधुमक्खियों फूलों की ओर आकर्षित नहीं होतीं और परागण भी नहीं हो पाता हैं इसलिए फसलों के लिए इन स्प्रे पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए.

लेकिन तमाम किसानों और फसल विशेषज्ञों का कहना है कि इस बारे में आंकड़े पर्याप्त नहीं हैं.

प्रतिबंध

अगर राज्य इस बारे में सहमति नहीं बना पाते हैं तो आयोग निओनिकोथाएनायड के इस्तेमाल पर दो सालों का प्रतिबंध लगाया जाएगा.

शोधकर्ताओं का कहना है कि मधुमक्खियों जैसी जंगली प्रजातियाँ दुनिया के अनाज उत्पादन के लगभग एक तिहाई हिस्से का परागण कराती हैं.

पिछले महीने हुए मतदान का कोई नतीजा नहीं निकला था. इसलिए यूरोपीय संघ ने समिति से इस बारे में अपील की है. अब सोमवार को इस पर मतदान होना है.

यूरोपीय संघ के नियमों के तहत, मसौदे में बदलाव किए जा सकते हैं. लेकिन लेकिन अगर प्रस्ताव के खिलाफ पर्याप्त बहुमत नहीं हैं तो आयोग अधिस्थगन लागू कर सकता हैं.

फ्रांस, जर्मनी, इटली और स्लोवेनिया जैसे कुछ देशों में पहले से ही ‘निओनिकोटिनॉएड’ के इस्तेमाल पर प्रतिबंध हैं.

पिछली बार के मतदान में 13 देशों ने पक्ष में मतदान किया था. नौ देश प्रस्ताव के ब्रिटेन सहित पांच देशों ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया था.

‘निओनिकोटिनॉएड’ निकोटीन का ही रुप है. निकोटीन सिगरेट के रूप में सिर्फ मनुष्य के लिए ही घातक नहीं है, ये रसायन कीड़ों के लिए भी बेहद ज़हरीला है