भारत में भी रखा 2013 ने पहला कदम

जहाँ ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड ने नए साल की धमाकेदार अगवानी की भारत में 2012 के अनुभवों की दहलीज़ से निकल कर आए 2013 के स्वागत का जश्न कुछ फीका दिखा.
भारत की राजधानी दिल्ली में हर साल की तरह पटाखों की वैसी गूंज सुनाई नहीं दी जहां बलात्कार पीड़ित लड़की की मौत के लोग लोग सड़कों पर उतरे हैं.
नए साल के मौके पर होने वाले कई आयोजनों को रद्द किया गया है.
दिल्ली में जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय के छात्रों और शिक्षकों ने सामूहिक बलात्कार की शिकार लड़की की याद में विश्वविद्यालय से जुलूस निकाला. यह लोग उस जगह भी गए जहाँ से वो लडकी उस बस में सवार हुई थी जिसमें उसके साथ इस तरह की दरिंदगी की गई कि वो यह दुनिया छोड़ गई.
दुनिया भर में जश्न
नए साल 2013 का स्वागत करने के लिए दुनियाभर में जश्न मनाए जा रहे हैं. न्यूज़ीलैंड के ऑकलैंड शहर ने नए साल का स्वागत सबसे पहले किया.
वहीं ऑस्ट्रेलिया में सिडनी हार्बर के आसपास आतिशबाज़ी का शानदार नज़ारा देखने के लिए 15 लाख से अधिक लोग जुटे.
दुनिया के अन्य बड़े शहरों में भी तरह-तरह के कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है.
बर्मा में लोगों को पहली बार जश्न मनाने का मौका मिला जहां पूर्ववर्ती सैन्य शासकों ने लोगों के एक जगह जमा होने पर पाबंदी लगा रखी थी.
सात टन पटाखे फोड़े
ऑकलैंड में रात के 12 बजते ही 1076 फुट ऊंचे स्काई टॉवर से शानदार आतिशबाज़ी की गई.
दो घंटे बाद ऑस्ट्रेलिया के सिडनी शहर में लोगों ने दिलकश आतिशबाज़ी का मज़ा लिया.
मशहूर हार्बर ब्रिज और ओपेरा हाउस से सात टन पटाखे फोड़े गए.
सिडनी में मौजूद बीबीसी के फिल मर्कर का कहना है कि इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था में 16 करोड़ डॉलर की बढ़ोत्तरी होने की उम्मीद है.
उत्तर कोरिया की राजधानी प्योंगयांग में भी इस मौके पर जमकर आतिशबाज़ी की गई.
रंगीन आगाज़

दक्षिण कोरिया में राजधानी सोल स्थित 15वीं सदी के ऐतिहासिक घंटे को परम्परा के मुताबिक 33 बार बजाकर नए साल का स्वागत किया गया.
हांगकांग हार्बर पर भी आतिशबाज़ी देखने के लिए लगभग एक लाख लोग मौजूद थे.
समाचार एजेंसी एपी के मुताबिक इस पर 16 लाख डॉलर का खर्च आया है.
चीन के बीजिंग और शंघाई शहरों में भी इसी तरह नए साल का स्वागत किया गया.












