'तुर्की के गांधी' क्या अर्दोआन को सत्ता से हटा पाएँगे?

कमाल कलचदारलू

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इमेज कैप्शन, कमाल कलचदारलू जिन्हें तुर्की का गांधी कहा जाता है
    • Author, एस गोक्सेदेफ़
    • पदनाम, बीबीसी न्यूज़

'कमाल गांधी' ये उपनाम तुर्की में उस नेता को दिया गया है, जिनसे बीस साल से तुर्की पर शासन कर रहे रेचेप तैय्यप अर्दोआन को सत्ता से बाहर करने की उम्मीद लगाई जा रही है.

भारत के महात्मा गांधी जैसे गोल चश्मा और उनकी जैसी मूँछ रखने वाले इस 74 वर्षीय नेता का नाम कमाल कलचदारलू है.

कलचदारलू विनम्रता से बात करने वाले पूर्व नौकरशाह हैं, जिन्हें मौजूदा राष्ट्रपति के ताक़तवर और करिश्माई व्यक्तित्व से ठीक उलट माना जाता है.

अपने राजनीतिक जीवन में कई चुनाव हार चुके कलचदारलू ने साल 2010 में तुर्की की रिपब्लिकन पीपुल्स पार्टी का नेतृत्व अपने हाथ में लिया था.

उनके पूर्ववर्ती नेता को विवाहेतर संबंधों की वजह से अपना पद छोड़ना पड़ा था.

ऐसे में देखा जाए तो वह सभी घटक दलों की स्वाभाविक पसंद नहीं थे.

हालाँकि, इसके बाद भी तुर्की के छह विपक्षी दलों ने अर्दोआन का मुक़ाबला करने के लिए उनके नाम पर मुहर लगाई है.

ऐसा नहीं है कि कमाल कलचदारलू एक अनुभवी राजनेता नहीं हैं. वे साल 2002 में चुनकर आए थे, ये वही साल था जब अर्दोआन की एके पार्टी सत्ता में आई थी.

कलचदारलू पर कई हमले भी हुए हैं, जिसकी वजह से उन्हें तुर्की में सबसे ज़्यादा निशाने पर रहने वाला राजनेता भी कहा जाता है.

लेकिन अपने 13 साल लंबे कार्यकाल में उन्होंने अपनी पार्टी का विस्तार किया है और देश के अलग-अलग विचारों और लोगों को अपनाने की कोशिश की है.

कमाल कलचदारलू

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संभाल रहे हैं कमाल अतातुर्क की पार्टी

कमाल कलचदारलू तुर्की की उस पार्टी का नेतृत्व करते हैं, जिसका संबंध आधुनिक तुर्की के संस्थापक कमाल अतातुर्क से है.

एक लंबे समय तक इस पार्टी को सेना का क़रीबी माना जाता है, जिसने 1960 के बाद से अब तक चार मौक़ों पर तुर्की की सरकार का तख़्तापलट किया है.

इसके साथ ही यह पार्टी देश और धर्म को अलग-अलग रखने के मुद्दे पर काफ़ी मुखर रही है.

उदाहरण के लिए, 1980 में हुए सैन्य तख़्तापलट के बाद इस पार्टी ने स्कूलों और सरकारी दफ़्तरों में हिजाब लगाने पर प्रतिबंध का समर्थन किया था.

दिसंबर 1948 में एक पूर्व नौकरशाह के घर जन्म लेने वाले कमाल कलचदारलू सात बच्चों वाले परिवार के तुंजली स्थित घर में बड़े हुए हैं.

उनका परिवार इस्लाम के एक विशेष पंथ अलेवी से जुड़ा है, जो सुन्नी बहुल तुर्की में एक धार्मिक अल्पसंख्यक समुदाय है.

कमाल कलचदारलू

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भ्रष्टाचार विरोधी छवि

कलचदारलू अपने शैक्षणिक जीवन में भी काफ़ी प्रतिभाशाली छात्र रहे हैं. अर्थशास्त्र की पढ़ाई करने वाले कलचदारलू ने तुर्की के तमाम आर्थिक संस्थानों में काम किया है.

इस दौरान उन्हें भ्रष्टाचार विरोधी नौकरशाह की छवि मिली.

संसद में सात सालों तक काम करने के बाद उन्हें तुर्की के सबसे अहम पदों में से एक इस्तांबुल के मेयर पद का चुनाव लड़ने के लिए चुना गया.

वे ये चुनाव हार गए, लेकिन उनके चुनाव लड़ने के तरीक़े की काफ़ी तारीफ़ की गई.

इसके बाद वह अपनी पार्टी का नेतृत्व करने के भी काफ़ी क़रीब तक पहुँचे. उन्हें इस प्रयास में 37 फ़ीसदी वोट मिले.

इसके साल भर के अंदर सीएचपी के नेता का एक सीक्रेट वीडियो टेप वायरल हुआ, जो उनके विवाहेतर संबंध से जुड़ा हुआ था.

इसकी वजह से सीएचपी के नेता को अपने पद से इस्तीफ़ा देना पड़ा. ऐसे में कलचदारलू को पार्टी का नेतृत्व करने का मौक़ा मिला.

शुरुआत में उन्होंने पार्टी का नेतृत्व करने से इनकार कर दिया. क्योंकि वह एक स्कैंडल का फ़ायदा उठाते हुए नहीं दिखना चाहते थे.

लेकिन आख़िरकार उनके रुख़ में थोड़ी नरमी आई, जिसके बाद उन्होंने पार्टी नेतृत्व का चुनाव भारी अंतर से जीत लिया.

छह पार्टियां अर्देआन के ख़िलाफ़ एकजुट हुई हैं.

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अर्दोआन से टक्कर

कलचदारलू जिस दौरान अपनी पार्टी के शीर्ष पद पर पहुँचे, ठीक उसी वक़्त रेचेप तैय्यप अर्दोआन अपनी राजनीति के शीर्ष पर थे.

साल 2011 के चुनाव में ही अर्दोआन की एके पार्टी ने आधे से ज़्यादा मत हासिल करके उन्हें आधुनिक तुर्की का सबसे सफल प्रधानमंत्री बना दिया.

सीएचपी इस चुनाव में दूसरे नंबर पर आई, लेकिन उसके वोट प्रतिशत में पाँच फ़ीसदी की बढ़त दर्ज की गई.

इसके बाद से पार्टी की आंतरिक राजनीति का सामना करते हुए इसके नेता पार्टी का वोट प्रतिशत बढ़ाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं.

लेकिन अपने 13 साल लंबे कार्यकाल में वे पार्टी के अंदर बेहद शांति से बदलाव लाने में सफल हुए हैं.

उन्होंने इस्लाम-परस्त नेताओं से संबंध बेहतर करने के लिए इफ़्तार जैसे कार्यक्रमों में जाना शुरू किया.

उनकी पार्टी की पूर्व नेता मेल्डा ओनुर कहती हैं, "जब मेरी उनसे पहली बार मुलाक़ात हुई, तो मुझे लगा कि वह एक क्रांतिकारी नेता नहीं बल्कि समय के साथ चलने वाले नेता हैं. जब वह कोई लक्ष्य तय करते हैं तो उसके प्रति पूरी शांति के साथ काम करना शुरू कर देते हैं और आख़िरकार आप उनके मकसद को स्वीकार कर लेते हैं. जब उन्हें लगता है कि वह जो काम कर रहे हैं, वह ठीक है, तो वह काफ़ी निर्णायक ढंग से काम करते हैं."

कमाल कलचदारलू

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13 साल तक रखा धैर्य

ओनुर मानती हैं कि इसी वजह से उन्हें अपनी पार्टी की सूरत बदलने और राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी हासिल करने में 13 सालों का वक़्त लगा.

कलचदारलू ने अपनी भ्रष्टाचार विरोधी छवि के अनुरूप ही पार्टी के अंदर आर्थिक अनुशासन सुनिश्चित किया है.

उनकी क़रीबी सहयोगी ओकान कोनुराल्प कहती हैं, "वह किसी भी चीज़ के लिए ज़रूरत से ज़्यादा ख़र्च करने में यक़ीन नहीं रखते हैं."

यही नहीं, पिछले कुछ समय में उन्होंने धार्मिक नेताओं, कुर्द सामाजिक कार्यकर्ताओं और महिला अधिकारों के पक्षधरों को अपनी पार्टी में शामिल किया है. ऐसा करके उन्होंने ये साबित करने की कोशिश की है कि सीएचपी बदल गई है.

ओनुर कहती हैं, "सीएचपी के ढाँचे में पुरुषों का बोलबोला है. वह अब तक पूरी तरह इस चुनौती से पार पाने में सक्षम नहीं हुए हैं. लेकिन वह महिलाओं के साथ काम करने को लेकर सहज हैं."

बीबीसी के साथ बातचीत में उनके एक सहकर्मी बताते हैं कि वे कभी भी अपनी आवाज़ ऊँची नहीं करते.

वह कहते हैं, "कभी-कभी हम परेशान हो जाते हैं और हम चिल्ला पड़ते हैं. लेकिन ऐसे मौक़ों पर भी कलचदारलू अपना संयम नहीं खोते."

उनके सहकर्मी कहते हैं कि 'कलचदारलू जब कहीं बैठे होते हैं, और वहाँ कोई पहुँच जाए, तो वह अपनी जगह से खड़े होकर हाथ मिलाते हैं, और कभी भी अपनी कुर्सी पर बैठकर बात नहीं करते हैं, यही नहीं, वह किसी को बीच में टोकते नहीं हैं.'

अंकारा में 2019 में एक सैनिक के अंतिम संस्कार के दौरान उन पर हमला किया गया.

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अपने विनम्र स्वभाव और महात्मा गांधी से मिलती जुलती छवि के चलते ही उन्हें 'कमाल गांधी' कहकर पुकारा जाता है.

ख़ुद पर हुए हमलों को लेकर भी उनकी प्रतिक्रिया बेहद शांतिपूर्ण रही है.

साल 2014 में अपने पार्टी सदस्यों को संबोधित करने से ठीक पहले संसद में एक शख़्स ने दो बार उन पर हमला किया.

चेहरे पर दो बार घूंसा मारे जाने से उनके गाल और आँख में चोट आई थी. लेकिन इसके बाद भी उन्होंने अपने सहकर्मियों से संयम बरतने को कहा.

उन्होंने कहा था - "लोकतंत्र का मार्ग कई अड़चनों से भरा हुआ है."

साल 2016 में उनके काफ़िले पर एक कुर्द चरमपंथी संगठन पीकेके ने मिसाइल से हमला किया था. इसके अगले ही साल उन पर चरमपंथी इस्लामिक स्टेट संगठन ने बम फेंक कर हमला किया था.

साल 2019 में एक सैनिक के अंतिम संस्कार के दौरान लोगों ने उनकी जान लेने की कोशिश की. इसके बाद उन्हें एक क़रीबी घर में ले जाया गया.

जब पुलिस उन्हें वहाँ से बचाकर सुरक्षित स्थान पर ले गई, तो उन्होंने कहा - "इस तरह के प्रयास हमें रोक नहीं सकते"

लेकिन 2016 के तख़्तापलट की असफल कोशिश के बाद कमाल कलचदारलू की ख़्याति तुर्की के बाहर भी फ़ैल गई.

राष्ट्रपति अर्दोआन ने अपने विरोधियों की आवाज़ कुचलने के लिए लोगों को गिरफ़्तार करने के साथ ही तख़्तापलट की कोशिश से जुड़े हज़ारों लोगों को बर्खास्त किया.

मार्च फ़ॉर जस्टिस

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लॉन्ग मार्च के बाद बढ़ी स्वीकार्यता

इसके बाद विपक्ष के नेता ने अंकारा से इस्तांबुल तक साढ़े चार सौ किलोमीटर लंबा 'मार्च फ़ॉर जस्टिस' नाम की पदयात्रा निकाली.

अपनी इस यात्रा के सफल होने के बाद भी उन्होंने राष्ट्रपति पद की दावेदारी नहीं करने का फ़ैसला किया. और इस मौक़े के लिए पाँच साल इंतज़ार किया.

तुर्की में उन्हें स्वाभाविक रूप से राष्ट्रपति पद के लिए विपक्षी दलों के साझा उम्मीदवार के रूप में नहीं देखा गया.

ऐसे में उन्हें विपक्षी दलों को अपनी उम्मीदवारी के लिए राज़ी करने में कई महीनों का वक़्त लगा.

कलचदारलू पार्टी के बेहतर वक़्ता होने के साथ-साथ इस्तांबुल और अंकारा में मेयर का चुनाव जीतने वाले प्रभावशाली नेता है.

माना जा रहा है कि तुर्की के राष्ट्रपति अर्दोआन अपने सबसे कमज़ोर दौर में हैं. कलचदारलू के सहकर्मी मानते हैं कि ये उनके नेता के लिए एक बड़ा मौक़ा है.

कलचदारलू तुर्की के छह विपक्षी दलों को एक साथ लाने में भी सफल हुए हैं, जबकि इन दलों को एक साथ लाने वाली चीज़ें काफ़ी कम हैं.

ओकान कोनुराल्प कहते हैं, "मैंने उनके मुँह से कभी भी नफ़रती शब्द नहीं सुना. वह किसी से नाराज़ हो सकते हैं लेकिन वह अपना संयम बनाए रखते हैं और उस शख़्स को जल्द ही माफ़ कर देते हैं. इस तरह वह उन राजनेताओं के साथ काम करने में सक्षम हुए हैं जो कुछ समय पहले तक उनके ख़िलाफ़ थे."

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