ईरान के पड़ोसियों से गर्मजोशी बढ़ा रहा है इसराइल

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- Author, बीबीसी मॉनिटरिंग
- पदनाम, .
ईरान के पड़ोसी देश तुर्कमेनिस्तान की राजधानी अश्काबाद में इसराइल अपना दूतावास खोलने जा रहा है. ये शहर ईरानी सीमा से महज 20 किलोमीटर दूर स्थित है.
ईरान के पड़ोसी मुल्कों के साथ इसराइल अपने संबंध मजबूत करने की कोशिश कर रहा है. अज़रबैजान के साथ भी इसराइल अपने संबंध सुधारने की कवायद कर रहा है.
19 अप्रैल को इसराइली अख़बार हारेत्ज़ ने ख़बर प्रकाशित की कि इसराइल के विदेश मंत्री एली कोहेन तुर्कमेनिस्तान में दूतावास के उद्घाटन समारोह में 20 अप्रैल को मौजूद रहेंगे.
इस दौरान वो तुर्कमेनिस्तान के राष्ट्रपति सरदार बेरदिमुहामेदोव और विदेश मंत्री राशिद मेरेदोव से भी मुलाक़ात करेंगे.
अख़बार के अनुसार, दूतावास की भौगोलिक स्थिति का चुनाव ईरान को संदेश देने के लिए भी है.
हालांकि अश्काबाद में इसराइली दूतावास के खोले जाने के मुद्दे पर ईरानी मिडिया में कोई ख़बर नहीं है.
इसराइल के तत्कालीन विदेश मंत्री शिमोन पेरेस ने 1994 में तुर्कमेनिस्तान का दौरा किया था, उसके बाद कोहेन यहां आने वाले पहले इसराइली मंत्री हैं.

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'रणनीतिक साझीदारी'
तुर्कमेनिस्तान से पहले कोहेन 19 अप्रैल को अज़रबैजान की राजधानी बाकू गए जहां उन्होंने राष्ट्रपति इहाम एलियेव से मुलाक़ात की.
इसराइल के विदेश मंत्रालय के एक बयान के अनुसार, कोहने और एलियेव रणनीतिक संबंधों को मजबूत बनाने, क्षेत्रीय चुनौतियों और व्यापारिक रिश्तों के बारे में चर्चा की.
कोहेन ने विदेश मंत्री और वित्त मंत्री से भी मुलाक़ात की.
बयान में कोहने के हवाले से कहा गया है, "अज़रबैजान एक मुस्लिम देश है और इसकी ख़ास भौगोलिक स्थिति हमारे संबंधों को बेहद अहम बनाती है."
विदेश मंत्रालय और कोहेने की ओर से आए कई बयानों में अज़रबैजान के संदर्भ में 'रणनीतिक भौगोलिक स्थिति' और 'रणनीतिक साझीदारी' बार बार इस्तेमाल किए गए.
हाल ही में अज़रबैजान ने तेल अवीव में अपना नया दूतावास खोला. उस समय इसराइली मीडिया में ये प्रमुख रूप से कहा गया कि अज़रबैजान पहला शिया देश है जिसने इसराइल में दूतावास खोला है.
हारेत्ज़ ने लिखा कि ईरानी प्रभाव और बाकू और तेहरान के बीच बढ़ते तनाव को देखते हुए दोनों देशों के बीच एक जैसी चिंता के चलते ये घटनाक्रम हो रहा है.
बीते मार्च में हारेत्ज़ ने अपनी एक पड़ताल में लिखा था कि इसराइल ने अरबों डॉलर के हथियार अज़रबैजान को दिए. इसके बदले अज़रबैजान ने इसराइल को तेल दिया.
इस पड़ताल में एक अज्ञात विदेशी मीडिया के रिपोर्टों का हवाला दिया गया है जिसमें आरोप लगाया गया कि अज़रबैजान ने इसराइल की ख़ुफिया एजेंसी मोसाद को अपने देश में ऑफ़िस खोलने की इजाज़त दे दी है ताकि वो ईरान पर नज़र बनाए रख सके.
इसमें ये भी कहा गया है कि अगर इसराइल ईरान के परमाणु संयंत्रों पर हमले करने का निश्चय करता है तो इसकी मदद करने के लिए अज़रबैजान ने एक हवाई पट्टी भी बनाई है.
साल 2020 में नागोर्नो-काराबाख इलाक़े को लेकर आर्मेनिया के साथ संघर्ष में इसराइल ने अज़रबैजान की मदद की थी. उसने मेडिकल और मानवीय सहायता भेजी थी.

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ईरान और इसराइल की चिर प्रतिद्वंद्विता
ईरान और इसराइल के बीच प्रतिद्वंद्विता दशकों पुरानी है.
ईरान इसराइल को मान्यता नहीं देता है. जबकि इसराइल भी कई बार कह चुका है कि वो परमाणु शक्ति संपन्न ईरान को बर्दाश्त नहीं करेगा.
ईरान और पश्चिमी देशों के बीच हुआ परमाणु समझौता डोनाल्ड ट्रंप ने ख़त्म कर दिया था. लेकिन जो बाइडन के राष्ट्रपति बनने के बाद से नए सिरे से परमाणु समझौते को लागू करने की क़वायद चल रही थी.
ईरान कई बार ये आरोप लगा चुका है कि इसराइल ने उसके परमाणु ठिकानों पर हमला किया है और ईरान के न्यूक्लियर वैज्ञानिकों की हत्या कराई है. इसराइल इन आरोपों को न तो नकारता है और न ही इसकी पुष्टि करता है.
साथ ही इसराइल और ईरान के बीच समुद्र में अघोषित टकराव भी सामने आता रहता है, जिसमें जहाजों पर रहस्यमय हमले होते हैं.
इसराइल ईरान के परमाणु कार्यक्रमों को लेकर अपनी चिंताएं जताता रहा है. इसराइल को शक है कि ईरान परमाणु हथियारों का निर्माण कर रहा है, जिससे ईरान इनकार करता रहा है.
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