अर्दोआन को चुनौती देने वाले तुर्की के 'कमाल गांधी' कौन हैं

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- Author, रॉबर्ट ग्रीनहॉल
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़
तुर्की के छह विपक्षी दलों ने बीते सोमवार आगामी चुनाव में मौजूदा राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन के ख़िलाफ़ साझा उम्मीदवार उतारने का फ़ैसला किया है.
तुर्की में इसी साल 14 मई को आम चुनाव होने वाले हैं जिसमें अर्दोआन एक बार फिर सत्ता में वापसी करने की कोशिश करेंगे.
अर्दोआन पिछले बीस सालों से तुर्की की सत्ता पर काबिज़ हैं.
उनके कार्यकाल में तुर्की की मुद्रा लीरा में भारी गिरावट के साथ-साथ इसराइल के साथ रिश्तों में आक्रामकता देखी गयी है.
लेकिन हाल ही में भीषण भूकंप की वजह से अर्दोआन के लिए आगामी चुनाव पिछले चुनावों की तुलना में चुनौतीपूर्ण हो गए हैं.
आख़िर कौन हैं कमाल कलचदारलू
तुर्की के गांधी कहे जाने वाले कमाल कलचदारलू रिपब्लिकन पीपल्स पार्टी के नेता हैं जो इस समय तुर्की की राजनीति में प्रमुख विपक्षी दल की भूमिका में है.
इस पार्टी की स्थापना आधुनिक तुर्की के संस्थापक कहे जाने वाले मुस्तफ़ा कमाल अतातुर्क ने की थी.
ऐसे में इस पार्टी के नेता का अर्दोआन के ख़िलाफ़ साझा उम्मीदवार चुना जाना तुर्की की राजनीति के लिहाज़ से काफ़ी अहम हो गया है.
छह पार्टियों के गठबंधन की ओर से साझा उम्मीदवार के रूप में चुने जाने के बाद कलचदारलू के समर्थकों को जश्न मनाते देखा गया है.

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आसान नहीं था विपक्ष का साथ आना
भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ जंग लड़ने वाले पूर्व लोक सेवक कलचदारलू के लिए तुर्की के छह विपक्षी दलों का साझा उम्मीदवार बनना आसान नहीं था.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक़, कलचदारलू के जीतने की संभावनाएं सोमवार को हुए समझौते के बाद बढ़ सकती हैं क्योंकि बीते शुक्रवार दक्षिणपंथी पार्टी आईवाईआई के विरोध के बाद विपक्ष में फूट पड़ गयी थी.
लेकिन 72 घंटों तक चली कोशिशों के बाद विपक्षी दल सोमवार को एक बार फिर मिले जिसमें आईवाईआई का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया गया.
इस प्रस्ताव के तहत इस्तांबुल और अंकारा के मेयर को उप-राष्ट्रपति बनाए जाने की शर्त शामिल है.
कलचदारलू ने सोमवार को अपने भाषण में कहा है कि शेष पांचों दलों के नेता भी उप-राष्ट्रपति बनेंगे.
इससे पहले आईवाईआई शुक्रवार को कलचदारलू के जीतने की संभावनाओं पर आशंका जताते हुए गठबंधन से बाहर हो गया था.
आईवाईआई ने कहा था कि गठबंधन को दो में से एक मेयर को उम्मीदवार के रूप में चुनना चाहिए क्योंकि उनका प्रदर्शन बेहतर होने की संभावनाएं हैं.
हालांकि, सोमवार को हुए समझौते के बाद आईवाईआई ने अपने रुख में बदलाव लाते हुए कलचदारलू का समर्थन किया है.
तुर्की की राजनीति पर नज़र रखने वाले संस्थान स्ट्रेटजिक एडवायज़री सर्विसेज़ के प्रबंध निदेशक हकन अकबास ने कहा है, "ये अर्दोआन के ख़िलाफ़ एक बड़ा राजनीतिक तख़्तापलट है जिसके बाद 14 मई को विपक्षी दलों को निर्णायक जीत मिलनी चाहिए."
तुर्की की संसद में तीसरी सबसे बड़ी पार्टी एचडीपी ने कहा है कि वह कलचदारलू का समर्थन करेगी. ये पार्टी कुर्दों का समर्थन करने के लिए जानी जाती है.
इस पार्टी के नेता मिथत संकर ने कहा, "हमारी मूल अपेक्षा मजूबत लोकतंत्र की ओर जाना है. अगर हम मूल सिद्धांतों पर सहमत हो सकें तो हम उन्हें राष्ट्रपति पद के चुनावों में समर्थन दे सकते हैं."

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कितने मजबूत हैं कलचदारलू
तुर्की की राजनीति में अर्दोआन को जहां एक करिश्माई नेता के रूप में देखा जाता है, वहीं कमाल कलचदारलू को तुर्की का गांधी या कमाल गांधी कहा जाता है.
74 वर्षीय कमाल कलचदारलू तुर्की के लिए अर्दोआन से हटकर एक अलग विज़न पेश करते हैं.
हालांकि, उनके सहयोगियों को लगता है कि उनमें वोट हासिल करने की क्षमता कम है.
फिलहाल, कमाल कलचदारलू ने कहा है कि वह तुर्की पर सहमति और सलाह-मशविरे के साथ शासन करेंगे.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स से बात करते हुए उन्होंने कहा, "हम शांति के पक्षधर हैं. हमारा सिर्फ़ एक मकसद है कि हम देश को सुख, समृद्धि, और शांति के दिनों में लेकर जाएं."
इसके साथ ही उन्होंने कहा है कि वह तुर्की में संसदीय व्यवस्था बहाल करेंगे.
बता दें कि तुर्की के मौजूदा राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन ने साल 2018 में तुर्की में राष्ट्रपति व्यवस्था लागू की थी जिसके तहत उन्हें असीम ताक़तें मिली थीं.
कलचदारलू के सहयोगी उनकी चुनाव जीतने की क्षमता को लेकर भले ही आशंकित हों लेकिन उन्होंने अपनी स्वीकार्यता बढ़ाने के लिए अल्पसंख्यक समुदायों से संपर्क करना शुरू कर दिया है.
उन्होंने दक्षिणपंथी दलों के साथ ही गठबंधन किया है.
इसके साथ ही उन्होंने अर्दोआन को चुनौती देने का माद्दा दिखाया है जो पिछले कुछ सालों में अपनी आलोचना को लेकर असहिष्णु हो गए हैं.

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अर्दोआन के लिए कितनी बड़ी चुनौती
तुर्की में भूकंप आने से पहले ही महंगाई 85 फीसद तक बढ़ने की वजह से अर्दोआन की लोकप्रियता में कमी दर्ज की गयी थी.
लेकिन चुनाव सर्वेक्षकों ने शुक्रवार को बताया है कि अर्दाआन और उनकी पार्टी एके जनता के बीच अपने लिए समर्थन को एक हद तक बचाने में कामयाब रही है.
साल 2002 में जीत के बाद अर्दोआन की पार्टी ने कभी भी गंभीर चुनाव हार का सामना नहीं किया है.
सत्ता में आने के बाद से उन्होंने तुर्की को एक पवित्र, संरक्षणवादी समाज और आक्रामक क्षेत्रीय ताक़त के रूप में आकार दिया है.
विपक्षी दलों ने कहा है कि वे अर्दोआन की ओर से लाई गई राष्ट्रपति व्यवस्था को ख़त्म करके संसदीय लोकतंत्र की व्यवस्था लेकर आएंगे.
इसके साथ ही विपक्षी दलों ने कहा है कि वे केंद्रीय बैंक को स्वतंत्र करेंगे जिसने अर्दोआन के कहने पर ब्याज़ दरें कम कर दी थीं ताकि आर्थिक प्रगति बढ़े लेकिन इस कदम से तुर्की की मुद्रा लीरा में भारी गिरावट और महंगाई में तेज उछाल देखा गया.
विपक्षी दलों ने साल 2019 में हुए चुनावों में इस्तांबुल, अंकारा समेत बड़े शहरों में एके पार्टी को हराकर साथ काम करना शुरू कर दिया है.
कलचदारलू की उम्मीदवारी की घोषणा को सुनने आए एक पूर्व शिक्षक डेवलट कस ने कहा है , "मैं यहां इतिहास बनते देखे आया हूं. हम सब बदल जाएगा. हमारा देश आज़ाद हो जाएगा. विपक्षी दलों की जीत के बाद हमारे बच्चे पहले से आज़ाद और ख़ुश देश में रहेंगे."
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