सूडानः सूडान में फिर छिड़ा संघर्ष, अब तक 100 की मौत, 1100 लोग घायल

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अफ्ऱीकी देश सूडान में सेना और अर्धसैनिक बलों के बीच एक बार फिर शुरु हुए भीषण संघर्ष से पूरा देश दहल गया है.
ताजा जानकारी के मुताबिक़, ये संघर्ष अब देश के अलग-अलग इलाकों में फैल रहा है.
डॉक्टरों के एक संगठन के मुताबिक़, इस संघर्ष में अब तक 100 लोगों की मौत हुई है.
वहीं, एक अन्य आकलन के मुताबिक़, घायलों की संख्या 1100 के क़रीब पहुंच गयी है.
डॉक्टरों का कहना है कि खार्तूम के अस्पतालों में हालात बेहद मुश्किल हो गए हैं. संघर्ष के चलते स्वास्थ्यकर्मी घायलों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं.
दोनों पक्षों ने सूडान की राजधानी खार्तूम के अलग-अलग हिस्सों पर नियंत्रण स्थापित करने का दावा किया है.
खार्तूम में स्थिति संवेदनशील
खार्तूम के स्थानीय निवासियों ने बताया है कि वे लगातार चलती गोलियों और धमाकों की आवाज़ों से डरे हुए हैं.
खार्तूम की स्थानीय निवासी हुदा ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स से बात करते हुए कहा, "हम डरे हुए हैं. धमाकों की आवाज़ों और घर हिलने की वजह से पिछले 24 घंटों से सो नहीं पाए हैं. हमें अब पानी, खाना और मेरे डायबिटीज़ रोगी पिता की दवाई ख़त्म होने की चिंता सता रही है."
खार्तूम में रहने वाले एक अन्य स्थानीय निवासी खुलूद खैर ने बीबीसी को बताया है कि स्थानीय निवासी शहर में किसी भी जगह अपनी सुरक्षा को लेकर आश्वस्त नहीं है.
उन्होंने कहा, "सभी स्थानीय निवासी से आग्रह किया गया है कि वे घर पर रहें लेकिन इसके बाद भी स्थानीय निवासी सुरक्षित नहीं हैं."

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कुछ घंटों पहले हुआ था संघर्ष विराम
इससे पहले 56 लोगों के मारे जाने के बाद सेना और अर्धसैनिक बल तीन घंटों के अस्थाई संघर्ष विराम पर सहमत हो गए थे. दोनों पक्षों ने संयुक्त राष्ट्र की इस पहल का समर्थन किया था.
मृतकों में से एक शख़्स की पहचान भारतीय नागरिक के रूप में की गयी है जिनका नाम अल्बर्ट ऑगस्टाइन था.
भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने दुख जताते हुए कहा है कि सूडान स्थित भारतीय दूतावास मृतक के परिजन की मदद करने के लिए सभी प्रयास कर रहा है.
इस बारे में विदेश मंत्री जयशंकर के अलावा सूडान स्थित भारतीय दूतावास ने भी ट्वीट किया है.
उन्होंने लिखा, "खार्तूम में एक भारतीय नागरिक की मौत के बारे में जानकर बहुत दुख हुआ. उनके परिवार को हर संभव मदद देने के लिए दूतावास पूरी कोशिश कर रहा है. खार्तूम की स्थिति बहुत नाज़ुक बनी हुई है. हम वहां की हर गतिविधि पर नज़र रखे हुए हैं."
वहीं भारतीय दूतावास ने अपने ट्वीट में लिखा, "बताया गया है कि सूडान के डीएएल ग्रुप कंपनी में काम करने वाले एक भारतीय नागरिक अल्बर्ट ऑगस्टाइन की गोली लगने से कल मौत हो गई. आगे के इंतज़ाम के लिए यह दूतावास मृतक के परिवार और चिकित्सा अधिकारियों के संपर्क में बना हुआ है."
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इससे पहले भारतीय दूतावास ने शनिवार को गोलीबारी और झड़पों को देखते हुए सूडान में रह रहे सभी भारतीयों को अपने अपने घरों के अंदर रहने की सलाह दी थी.
दूतावास ने ट्वीट कर लोगों से अत्यधिक सावधानी बरतने, घर के अंदर रहने और घर से बाहर न निकलने की अपील की थी.
इस एडवाइज़री में सूडान जाने वाले भारतीयों से अपील की गई थी कि वे अपनी यात्रा फ़िलहाल स्थगित कर दें और अगली सूचना का इंतज़ार करें.

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क्या है मामला?
राजधानी खार्तूम में दोनों पक्षों के बीच राष्ट्रपति भवन, सरकारी टीवी और सेना मुख्यालय को लेकर लड़ाई हुई. इसमें कई नागरिक गोलियों के शिकार हो गए हैं.
डॉक्टरों के इस संगठन ने यह भी बताया कि सेना के भी कई लोग इस लड़ाई में मारे जा चुके हैं और कई घायलों का अस्पताल में इलाज चल रहा है. संस्था के अनुसार, इस लड़ाई में घायल हुए 595 लोगों का अस्पताल में इलाज चल रहा है.
सूडान के पश्चिम में स्थित काबकाबिया सैन्य अड्डे पर हुई गोलीबारी में संयुक्त राष्ट्र की संस्था विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) के तीन कर्मचारियों के भी मारे जाने की ख़बर आई है.
उसके बाद WFP ने देश में अपना काम रोकने का एलान कर दिया था.
सेना और उनके प्रतिद्वंद्वी रैपिड सपोर्ट फोर्सेज (RSF), दोनों ने खार्तूम के एयरपोर्ट और शहर के अन्य अहम ठिकानों पर नियंत्रण होने का दावा किया था. इन जगहों पर रात भर दोनों पक्षों के बीच लड़ाई होती रही थी.
रविवार की सुबह खार्तूम और उसके पास के शहर ओमदुरमैन में भारी गोलीबारी होने की ख़बर आई है. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, लाल सागर के किनारे स्थित पोर्ट सूडान शहर में भी गोलीबारी हुई है.
शनिवार को उत्तरी शहर मेरोवे में गोलीबारी हुई थी. इस हफ़्ते तनाव बढ़ने पर आरएसएफ़ ने गुरुवार को मेरोवे के सैन्य अड्डे के पास अपना घेरा डाला था.
सेना ने कहा है कि लड़ाकू विमानों ने आरएसएफ़ के ठिकानों पर बमबारी की है. वहीं एयरफ़ोर्स ने शनिवार रात नागरिकों से कहा था कि वे अपने घरों में ही रहें. उन्होंने बताया था कि वे अर्धसैनिक बलों की पूरी गतिविधि का हवाई सर्वेक्षण कर रहे हैं.
इसके साथ ही खार्तूम के नागरिकों ने बीबीसी को बताया था कि वे डरे हुए हैं.

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कैसे शुरू हुआ यह संघर्ष?
ख़बरों के अनुसार, यह संघर्ष नागरिक सरकार को सत्ता हस्तांतरित करने की माँग को लेकर शुरू हुआ है. अक्तूबर 2021 में देश में हुए तख्तापलट के बाद बनी अंतरिम सरकार और सेना के बीच लगातार टकराव होता रहा है.
देश को सॉवरेन काउंसिल के ज़रिए सेना ही चला रही है. इसके प्रमुख सेना के जनरल अब्देल फतेह अल बुरहान हैं. जनरल अल बुरहान की समर्थक सेना और देश के दूसरे नंबर के नेता यानी आरएसएफ़ प्रमुख मोहम्मद हमदान डगालो में से कोई भी झुकने को तैयार नहीं है.
सूडान में अर्धसैनिक बल रैपिड सपोर्ट फ़ोर्स (RSF) को सेना में मिलाने की योजना है, जिसे लेकर सालों से विवाद चल रहा है.
आरएसएफ़ प्रमुख ने कहा है कि सेना के सभी ठिकानों पर कब्ज़ा होने तक उनकी लड़ाई चलती रहेगी. वहीं सेना ने बातचीत की किसी संभावना को नकारते हुए कहा है कि अर्धसैनिक बल आरएसएफ़ के भंग होने तक उनकी कार्रवाई जारी रहेगी.
हालांकि, जनरल बुरहान ने पहले कहा था कि प्रस्तावित नागरिक सरकार में एकीकृत सेना का नेतृत्व कौन करेगा, इस विवाद को सुलझाने के लिए वे अपने 'सेकेंड इन कमांड' से बात करने को तैयार हैं.
पश्चिमी देशों और क्षेत्रीय नेताओं ने दोनों पक्षों से तनाव कम करने और बातचीत के टेबल पर लौटकर नागरिक शासन को बहाल करने के लिए कहा है. शुक्रवार को ऐसे संकेत मिले थे कि दोनों पक्षों के बीच का तनाव सुलझ जाएगा.
(खार्तूम से ज़ैनब मोहम्मद सालिह, नैरोबी से इमैनुएल इगुंज़ा, रॉबर्ट प्लमर, मेतेआ बबालो के इनपुट पर आधारित)
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