इसराइली कब्ज़े के विरुद्ध कैसे खड़ा हुआ फ़लस्तीनी युवाओं का मिलिशिया 'लॉयंस डेन'

हवा में गोली चलाता फ़लस्तीनी लड़ाका

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इस साल की शुरुआत से ही इसराइली क़ब्ज़े वाले वेस्ट बैंक और पूर्वी यरुशलम इलाक़े में इसराल और फ़लस्तीनियों के बीच तनाव और हिंसा बढ़ी है. फ़लस्तीनियों का एक नया समूह इस दौरान उभरा है.

इसका अरबी में नाम है अरीन अल उसुदू और अंग्रेज़ी में इसे लॉयंस डेन या हिंदी में कहें तो शेर की मांद कहा जा रहा है.

पश्चिमी वेस्ट बैंक के नबलूस इलाक़े में उभरे इस नए मिलिशिया को इसराइल के सैनिकों और फ़लस्तीनी इलाक़ों पर बसे इसराइली लोगों पर हमलों के पीछे माना जा रहा है.

इस समूह के सदस्य और समर्थक अधिकतर युवा फ़लस्तीनी हैं, इनका दावा है कि ये पिछले कई दशकों से फ़लस्तीनी की राजनीति को शक्ल देने वाले पारंपरिक समूहों और पक्षों से ऊपर हैं और उनसे अलग हैं.

लेकिन ये हैं कौन और इनकी मौजूदगी कितनी अहम है?

'युवा, असंतुष्ट फ़लस्तीनी'

मारे गए फ़लस्तीनी लड़ाकों के जनाज़े में शामिल होते हथियारबंद फ़लस्तीनी मिलिशिया

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इमेज कैप्शन, फ़रवरी में इसराइली बलों ने नौ फ़लस्तीनियों को मार दिया- इनमें से छह लॉयंस डेन के सदस्य थे

फ़रवरी में इसराइली बलों ने नौ फ़लस्तीनियों को मार दिया- इनमें से छह लॉयंस डेन के सदस्य थे

वेस्ट बैंक के रमल्लाह शहर में स्थित हॉराइज़न सेंटर फॉर पॉलिटिकल स्टडीज़ के कार्यकारी निदेशक इब्राहिम जिब्रील दलालशा कहते हैं, "लायंस डेन युवा, असंतुष्ट, आक्रोशित फ़लस्तीनी युवाओं का संगठन है जिसके अधिकतर सदस्य 20 से 25 साल के बीच है हैं, ये वेस्ट बैंक या गज़ा के किसी भी राजनीतिक संगठन का हिस्सा नहीं है और ये एक ऐसा संगठन है जिसका मक़सद इसराइल के क़ब्ज़े के ख़िलाफ़ लड़ना है."

ये हथियारबंद संगठन अधिकतर नबलूस शहर में सक्रिय है और ख़ासतौर पर यहां के अल-यासमीन इलाक़े में केंद्रित है.

पिछले कुछ महीनों में ये संगठन दर्जनों फ़लस्तीनी युवाओं को अपने साथ जोड़ने में कामयाब रहा है.

हालांकि इस नए समूह का किसी भी राजनीतिक दल के साथ संबंध नहीं है लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि इसमें शामिल हो रहे कुछ लोगों की पहले से राजनीतिक संबंद्धता हो सकती है.

अमेरिकी की यूनिवर्सिटी ऑफ़ रिचमंड में राजनीति विज्ञानी दाना अल कुर्द कहती हैं, "ये एक ऐसा समूह है जो किसी पक्ष के साथ नहीं है, वो एक ही अकेले मिलिशिया समूह के लिए काम कर रहे हैं, हालांकि लॉयंस डेन के कई सदस्य पहले दूसरे समूहों के साथ भी रहे हैं, जैसे इस्लामिक जेहाद या अल अक़्शा शहीद ब्रिगेड, हमास या फ़तह."

ये शुरू कैसे हुआ?

इसराइली सुरक्षाबलों की कार्रवाई में मारे गए एक फ़लस्तीनी युवा की मां

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फ़रवरी 2022 में इस समूह का नाम नबलूस बटालियन था, तब इसमें दस से अधिक सदस्य नहीं थे.

ये समूह जेनिन बटालियन से प्रभावित था जो जेनिन शर्णार्थी कैंप में सक्रिय एक मिलिशया समूह था.

अगस्त 2022 में सीनियर फाइटर इब्राहिम अल नबलूसी को दो अन्य लड़ाकों के साथ इसराइली सुरक्षा बलों ने मार दिया था. ये रेड नबलूस के ही एक घर में हुई थी.

माना जाता है कि इब्राहिम अल नबलूसी की मौत के बाद से इस संगठन के साथ जुड़ने के लिए युवा आकर्षित हुए.

माना जाता है कि अधिकारिक तौर पर लॉयंस डेन सबसे पहली बार पिछले साल गर्मियों में नबलूसी और उनके साथ मारे गए लड़ाकों की याद में हुए एक कार्यक्रम में सामने आया था.

साल 2023 की शुरुआत में इसराइली सुरक्षाबलों ने इस समूह के प्रमुख सदस्यों को या तो मार दिया या गिरफ़्तार कर लिया. इन सभी पर इसराइली लोगों और ठिकानों पर हमलों के आरोप थे.

इन लड़ाकों की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया, ख़ासकर टिकटॉक पर ख़ूब शेयर की गईं.

कुछ महीने बाद मास्क लगाए दर्जनों लड़ाकों ने नबलूस के पुराने शहर की गलियों में परेड निकाली.

ये परेड फ़लस्तीनी अथॉरिटी और इसराइली सुरक्षाबलों के लिए ख़ास तौर पर चिंताजनक थी.

दाना अल कुर्द कहती हैं, "इसराइल का बेख़ौफ़ होना, फ़लस्तनीयों का बढ़ता दमन, ज़बरदस्ती बसे यहूदियों की बढ़ती गतिविथियां और इसके प्रति क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया में आई कमीं और फ़लस्तीनी क्षेत्रों में जारी आर्थिक और राजनीतिक ठहराव, ये सभी ऐसे कारण हैं जिनकी वजह से ये समूह खड़ा हुआ."

नबलूस का नक्शा

क्या इस समूह को लोगों का समर्थन मिल रहा है?

दाना अल कुर्द मानती हैं कि इस समूह की तरफ़ वो युवा फ़लस्तीनी आकर्षित हो रहे हैं जो 'मौजूदा स्थिति और उस पुरानी राजनीति को ख़ारिज कर रहे हैं जिस पर फ़तह और हमास चल रहे हैं.'

दाना मानती हैं कि इस बात के सबूत हैं कि इस समूह को फ़लस्तीनी लोगों का भी काफ़ी समर्थन भी मिल रहा है.

फ़लस्तीनी सेंटर फ़ॉर पॉलिसी एंड सर्वे रिसर्च के दिसंबर में किए गए एक शोध के मुताबिक वेस्ट बैंक और गज़ा पट्टी में रहने वाले 70 फ़ीसदी फ़लस्तीनी लॉयंस डेन या किसी और नए हथियारबंद समूह के गठन का समर्थन करते हैं.

हालात पर नज़र रखने वाले विश्लेषक मानते हैं कि फ़लस्तीनी नेतृत्व बूढ़ा हो रहा है और इस वजह से बहुत से युवा फ़लस्तीनी इस नए बने समूह की तरफ़ आकर्षित हो रहे हैं.

इस समूह के बहुत से सदस्यों ने अपने आप को फ़लस्तीनी प्राधिकरण से भी दूर कर लिया है.

इब्राहिम दलालशा कहते हैं, "वो मानते हैं कि फ़लस्तीनी प्राधिकरण राजनीतिक रूप से दिवालिया हो गया है और शांतिपूर्ण तरीक़े से राजनीतिक आज़ादी हासिल नहीं कर सकता है. ऐसे में उन्हें लगता है कि क्यों ना विद्रोह के साथ जुड़कर लड़ा जाए जो इस संघर्ष का समाधान ला सकता है."

ये समूह सोशल मीडिया पर भी बहुत सक्रिय है. लॉयंस डेन के टेलीग्राम चैनल से जब समर्थन की अपील की गई तो सैकड़ों फलस्तीनी सामने आए. इस चैनल पर 1 लाख 30 हज़ार से अधिक फ़ॉलोवर हैं.

इस चैनल से जुड़े लोगों से कहा गया था कि वो इसराइल पर हमला कर रहे लड़ाकों के समर्थन में अपनी छतों पर जाएं और अल्लाह-हू-अकबर का नारा लगाएं.

कब्ज़े वाले वेस्ट बैंक और पूर्वी यरूशलम के सभी इलाक़ों में युवा अपनी छतों पर आए और नारा गया, 'लायंस डोन अजेय है.'

समूह के एक लड़ाके के जनाज़े के दौरान हथियारबंद युवा गोली चलाते हुए

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फ़लस्तीनी प्राधिकरण से समूह के रिश्ते कैसे हैं?

फ़लस्तीनी प्राधिकरण (पीए) उन इलाक़ों पर प्रशासन चलाता है जो इसराइल और पेलेस्टाइन लिब्रेशन ऑर्गेनाइज़ेशन (पीएलओ) के बीच हुए ओस्लो समझौते के तहत वेस्ट बैंक में स्वायत्त फ़लस्तीनी इलाक़े घोषित हुए थे.

अधिकतर फ़लस्तीनी क़स्बों और गांवों को पीए ही प्रशासित करती है जिस पर धर्मनिरपेक्ष फ़लस्तीनी समूह फ़तह का प्रभाव है. एक अन्य समूह हमास का गज़ा पट्टी पर नियंत्रण है और ये वेस्ट बैंक में बहुत चर्चित नहीं है.

ओस्लो समझौता साल 1993 में हुआ था. अब लॉयंस डेन में शामिल बहुत से युवा फ़लस्तीनी ऐसे हैं जो उस समय पैदा भी नहीं हुए थे.

दलालशा कहते हैं, "ऐसे कई कारण हैं जिनकी वजह से मुख्य धारा के राजनेता और फ़लस्तीनी प्राधिकरण और फ़तर इस समूह के उभार से ख़ुश नहीं हैं."

लॉयंस डेन के ठिकाने पर इसराइली सुरक्षा बलों की छापेमारी के बाद स्थानीय लोगों के साथ संघर्ष शुरू हो गया था

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वो कहते हैं, "मुझे लगता है कि इस समूह को ख़त्म करने के बजाए इसके साथ सहयोग करने का रणनीतिक फ़ैसला ले लिया गया है."

कुछ निजी सूत्रों का कहना है कि फ़लस्तीनी प्राधिकरण इस समूह को ये समझाने की कोशिश कर रहा है कि हथियार छोड़ दें और फ़लस्तीनी सुरक्षा सेवाओं में शामिल हो जाएं.

फ़लस्तीनी प्राधिकरण समूह के कुछ सदस्यों को अपनी तरफ़ करने में कामयाब रहा है लेकिन इसकाे नेतृत्व ने आत्मसमर्पण करने से इनकार कर दिया है. समूह के नेतृत्व का कहना है कि वो अंत तक लड़ाई जारी रखेंगे.

दलालशा कहते हैं, "लॉयंस डेन के कुछ सदस्य फ़लस्तीनी प्राधिकरण की आलोचना तो करते हैं लेकिन उसके साथ सीधे संघर्ष का विरोध करते हैं."

"अगर आप सीधे तौर पर फ़लस्तीनी प्राधिकरण के ख़िलाफ़ जाते हैं तो तो फिर वो आपको समूची फ़लस्तीनी जनता के ख़िलाफ़ भले ना सही, लेकिन बड़ी तादाद में फ़लस्तीनी लोगों के ख़िलाफ़ सीधा खड़ा कर देगा. मुझे ऐसा लगता है कि वो इस स्थिति से बचने की कोशिश कर रहे हैं."

नबलूस में लॉयंस डेन के लड़ाके जिस ठिकाने पर छुपे थें वहां की तस्वीर

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इसराइल का नज़रिया क्या है?

इसराइल लॉयंस डेन को एक आतंकवादी संगठन के रूप में देख रहा है. इस साल फ़रवरी में इसराइली सुरक्षा बल नबलूस में दाख़िल हुए और कार्रवाई में 11 फ़लस्तीनियों को मार दिया. इनमें से छह लॉयंस डेन के सदस्य थे. ये दावा समूह के टेलीग्राम चैनल में किया गया है.

चार घंटे चले अभियान के बाद इसराइली सुरक्षा बलों का कहना था कि उन्होंने फ़लस्तीनी बंदूकधारियों की तरफ़ से गोली चलने के बाद अपने अभियान के स्तर को बढ़ा दिया था.

आईडीएफ़ के प्रवक्ता लैफ्टिनेंट कर्नल रिचर्ड हेक्ट ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, "हमने ख़तरा देखा और हमें भीतर जाकर काम पूरा करना पड़ा."

इसराइल ने हाल ही में नबलूस और पूर्वी यरूशलम के आसपास कई इलाक़ों को बंद किया है. इसके लिए रेत के बैरीकेड और सीमेंट के ब्लॉक लगाए गए हैं.

दाना अल कुर्द कहती हैं, "इसराइल की प्रतिक्रिया ख़ासी तीव्र है, लेकिन वो (लॉयंस डेन) अभी भी प्रभावशाली बने हुए हैं और उनकी नकल करते हुए नये समूह खड़े हो सकते हैं या उनके साथ जुड़ने में दिलचस्पी बढ़ सकती है."

इब्राहिम दलालशा मानते हैं कि इस समूह का फ़लस्तीनी राजनीति पर भी असर हो सकता है.

वो कहते हैं, "अपने बड़े मक़सद को हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ना उनके लिए आसान नहीं होगा. बड़ा मक़सद आज़ादी और क़ब्ज़ा ख़त्म करना है. लेकिन मैं मानता हूं कि उनकी मौजूदगी और गतिविधियों ने फ़लस्तीनी प्रशासन और इसराइली सुरक्षा बलों के लिए कई चुनौतियां पैदा की हैं और दिक्कतें खड़ी की हैं."

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