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पाकिस्तानः आसमान छूती कीमतों के बीच मिनी बजट से और बढ़ी महंगाई
- Author, तनवीर मलिक
- पदनाम, पत्रकार
पाकिस्तान में गुरुवार को मिनी बजट पेश किया गया, जिसमें पेट्रोल, गैस और दूसरी ज़रूरी चीज़ों की क़ीमतों पर टैक्स में इज़ाफ़ा किया गया है.
पाकिस्तान में पहले से ही जनता महंगाई से परेशान है और अब टैक्स में इस वृद्धि के बाद पेट्रोल की कीमतों में 22 रुपये का इजाफ़ा हुआ है.
कराची में बड़ी संख्या में लोग बाइक और कार का उपयोग करते हैं. हाल में बढ़ी पेट्रोल की कीमतों से नाराज़ जनता सरकार से इस फ़ैसले को वापस लेने की मांग कर रहे हैं.
छह महीने पहले तक पेट्रोल की कीमतें 237 रुपये थीं जो अब बढ़ कर 272 रुपये पर जा पहुंची हैं.
लोगों का कहना है कि बढ़ी कीमतों का बोझ वो नहीं ढो सकते क्योंकि न तो उनकी आमदनी बढ़ रही है और न ही वेतन, जबकि अन्य चीज़ों की बढ़ी कीमतें लोगों की क़मर पहले से तोड़ रही हैं.
बीते छह महीने से खाने पीने की वस्तुओं के दाम आसमान छू रहे हैं जिससे आम आदमी का बजट पूरी तरह से हिल गया है.
पाकिस्तान में क्या है महंगाई का हाल?
शहर के बीचों बीच महारानी बाज़ार में किराना की दुकान चला रहे ज़ाहिद कहते हैं कि पिछले छह महीने के दौरान 10 किलो आटे की कीमत 450 रुपये बढ़ी है.
वे कहते हैं, "पहले 10 किलो आटे के बैग की कीमत 800 रुपये हुआ करती थी जो अब 1250 रुपये में मिल रही है. इसी तरह, खाना पकाने के तेल की कीमत पहले 380 रुपये हुआ करती थी जो अब 620 रुपये हो गई है."
एक किलो चना दाल की कीमत पहले 280 रुपये थी, अब 430 रुपये हो गई है.
वहीं एक किलो दाल मैश जो पहले तीन सौ बीस रुपये का था, अब चार सौ से अधिक पर मिल रहा है.
पहले चायपत्ती प्रति कोल 1400 रुपये की थी, अब ये 1700 रुपये से ऊपर मिल रही है.
ज़ाहिद कहते हैं कि कंपनी ने ही दाम बढ़ा रखे हैं, "तो अगर ये हमें बढ़ी कीमतों पर मिल रहे हैं तो हम इन्हें कैसे सस्ते में बेचें."
सब्जी बेचने वाले मोहम्मद तारिक़ के मुताबिक़ सब्जियों की कीमतें पेट्रोल की कीमतों में वृद्धि के कारण नहीं घटती-बढ़ती हैं बल्कि इनका संबंध फ़सलों से है. जैसे कि अभी बाज़ार में जहां आलू और टमाटर सस्ते में बेचे जा रहे हैं वहीं प्याज़ या तो मिल ही नहीं रहा और अगर है भी तो इसके दाम बहुत महंगे हैं.
वे कहते हैं कि प्याज़ भारत और ईरान से आता रहा है, इसकी वजह से इसकी कीमतें 160 रुपये प्रति किलो थीं लेकिन अब ये देखा जा रहा है कि इसकी कीमतें 300 रुपये तक पहुंच रही हैं.
वहीं फल की कीमतों पर इसके विक्रेता नवाब ख़ान कहते हैं कि फल की कीमतों में इज़ाफ़े की वजह से उनके धंधे पर बहुत बुरा असर पड़ा है.
उनके मुताबिक़ पेट्रोल बढ़ी कीमतों के कारण बीते कुछ महीनों के दौरान फल की कीमतों में कम से कम 10 से 20 फ़ीसद तक का इज़ाफ़ा हुआ है. इसका असर ये हुआ है कि लोग फल ख़रीदने से पहले दो बार सोचते हैं.
पाकिस्तान में मिनी बजट पेश
गुरुवार को केंद्रीय वित्त मंत्री इसहाक़ डार की ओर से संसद में पेश किए जाने वाले पूरक वित्त विधेयक 2023 या मिनी बजट के तहत उनकी ओर से 170 अरब रुपए का अतिरिक्त कर इकट्ठा करने का लक्ष्य रखा गया है.
आईएमएफ़ की कड़ी शर्तों को पूरा करने और बजट घाटा कम करने के लिए मिनी बजट से विभिन्न क्षेत्रों में टैक्स की दर को बढ़ाने के प्रस्ताव दिए गए हैं.
गैस, बिजली, पेट्रोल और दूसरी बुनियादी ज़रूरतों की क़ीमतों में इज़ाफ़े के फ़ैसले से सरकार को आईएमएफ़ क़र्ज़ प्रोग्राम की बहाली की उम्मीद है जिसकी एक अरब डॉलर से अधिक की क़िस्त अब तक रुकी हुई है.
इधर, आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार देश में महंगाई की दर में और वृद्धि से आम आदमी बुरी तरह प्रभावित होगा. उनकी राय में इन उपायों से आईएमएफ़ प्रोग्राम की बहाली तो बड़ी हद तक मुमकिन है लेकिन आम लोगों की आमदनी सिकुड़ने से रोज़मर्रा की ज़िंदगी और मुश्किल हो सकती है.
मिनी बजट में टैक्स के कौन से उपाय किए गए?
केंद्रीय वित्त मंत्री पेश किए गए मिनी बजट में 170 अरब रुपये का अतिरिक्त कर इकट्ठा करने का लक्ष्य तय किया गया है.
अतिरिक्त राजस्व के लिए सबसे अधिक सेल्स टैक्स (जीएसटी) की दर को 17 से 18 प्रतिशत करने का निर्णय किया गया है जो सभी क्षेत्रों पर लागू होगा. लग्ज़री सामान पर सेल्स टैक्स की दर को 17 से बढ़ाकर 25 प्रतिशत कर दिया गया है. सिगरेट और पेय पदार्थ पर सेंट्रल एक्साइज़ ड्यूटी की दर को बढ़ा दिया गया है जबकि सीमेंट पर भी इस की दर को डेढ़ रुपए किलो से बढ़ाकर दो रुपये प्रति किलोग्राम कर दिया गया है.
फ़र्स्ट क्लास और बिज़नेस क्लास की एयरलाइन टिकटों पर एक्साइज़ ड्यूटी बीस प्रतिशत या 50 हज़ार रुपये, जो भी अधिक होगा, वह लगाई जाएगी.
इनकम टैक्स की कैटेगरी में शादी और दूसरे समारोहों पर 10 प्रतिशत के हिसाब से एडवांस टैक्स लगा दिया गया है जबकि दूसरी ओर शेयर खरीदने पर भी 10 प्रतिशत के हिसाब से एडवांस टैक्स लगा दिया गया है.
केंद्र सरकार के अनुसार दूध, दालों, गेहूं, चावल और मीट को सेल्स टैक्स की दर में होने वाली वृद्धि से बाहर रखा गया है.
मिनी बजट के टैक्स उपायों से महंगाई की दर में कैसे इज़ाफ़ा होगा?
पाकिस्तान के वित्त मंत्री इसहाक़ डार की ओर से पेश किए गए मिनी बजट में लागू किए गए टैक्स उपायों में सबसे उल्लेखनीय सेल्स टैक्स की दर को 17 से 18 फ़ीसद करना है.
आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार सेल्स टैक्स की दर में होने वाली वृद्धि वास्तव में महंगाई की दर में वृद्धि का कारण बनेगी क्योंकि सेल्स टैक्स खपत यानी सामान के इस्तेमाल पर लगता है और इस हिसाब से सामान का दाम बढ़ेगा, जिसकी क़ीमत एक आम उपभोक्ता को अदा करनी होगी.
आर्थिक विशेषज्ञ डॉक्टर अशफ़ाक़ हसन ख़ान ने बीबीसी को बताया कि सेल्स टैक्स की दर में वृद्धि रोज़मर्रा के इस्तेमाल के सामान का दाम बढ़ाने का कारण बनेगी.
उन्होंने कहा कि सेल्स टैक्स आयात से लेकर सामान की बिक्री तक पर लगता है. इसका मतलब है कि जब कोई चीज़ आयात की जाएगी तो अतिरिक्त सेल्स टैक्स अदा करना होगा जिससे आयात की गई चीज़ें महंगी हो जाएंगीं.
देश के अंदर तैयार होने वाले सामान की बिक्री पर भी सेल्स टैक्स की दर बढ़ा दी गई है जिसका मतलब है कि जब वह चीज़ उपभोक्ता ख़रीदेगा तो उसे बढ़ी हुई क़ीमत अदा करनी पड़ेगी.
गेहूं, दाल और गोश्त आदि को सरकार की ओर से अतिरिक्त सेल्स टैक्स से अलग रखने के फ़ैसले पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि सेल्स टैक्स ऐसी चीज़ों पर लगता है जो पैकेजिंग में आती हैं.
डॉक्टर अशफ़ाक़ हसन ख़ान ने कहा कि जिन चीजों को अतिरिक्त सेल्स टैक्स से अलग रखा गया है वे तो वैसे ही खुली बिकती हैं, इसलिए सरकार की ओर से दावा करना कि आम आदमी के इस्तेमाल की चीज़ों को इसमें छूट दी गई है, सही नहीं.
उन्होंने कहा कि जब एक आम आदमी गैस और बिजली का बिल अदा करता है तो उस पर सेल्स टैक्स लगता है और अब उपभोक्ताओं सेल्स टैक्स की दर में वृद्धि की वजह से बढ़ा हुआ बिल अदा करना होगा.
"फ़ेडरल एक्साइज़ ड्यूटी की दर भी बढ़ा दी गई है जिसका मतलब है कि आयात होने वाली चीज़ों की क़ीमतों में भी इज़ाफ़ा होगा जो आम लोग भी इस्तेमाल करते हैं."
आर्थिक मामलों की विशेषज्ञ सना तौफ़ीक़ ने भी यही कहा कि सरकार की ओर से जिन चीज़ों को बढ़े हुए सेल्स टैक्स के बाहर बताया गया है वह तो खुली हुई बिकती हैं, हालांकि बहुत सारी ऐसी चीज़ें हैं जो आम इस्तेमाल की हैं और उन पर अतिरिक्त बिक्री कर उपभोक्ताओं को अदा करना पड़ेगा.
उन्होंने कहा, "खाद्य तेल और चाय आदि भी आम आदमी के इस्तेमाल की चीज़ें हैं जिन पर बढ़ा हुआ टैक्स देना पड़ेगा."
डेटा चार्जेज़ बढ़ जाएंगी, सीमेंट के रेट भी बढ़ेंगे
वे कहते हैं, "सीमेंट पर एक्साइज़ ड्यूटी की दर को बढ़ा दिया गया है जिसका मतलब है कि निर्माण लागत भी बढ़ जाएगी और इसका असर एक आम आदमी पर भी पड़ेगा."
उन्होंने कहा कि "जीएसटी में वृद्धि से मोबाइल फ़ोन की डेटा चार्जेज़ भी बढ़ जाएंगी यानी कॉल करने और इंटरनेट इस्तेमाल करने के चार्ज में भी इज़ाफ़ा होगा जो एक आम आदमी की आजकल एक बुनियादी ज़रूरत है."
वे कहते हैं, "फ़िलहाल अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में अनाज और इलेक्ट्रिकल सामान की क़ीमतों में कुछ कमी आई है नहीं तो उनकी ज़्यादा क़ीमतों की वजह से देश के उपभोक्ताओं को रुपए के अवमूल्यन और अतिरिक्त सेल्स टैक्स की वजह से बहुत अधिक क़ीमत अदा करनी पड़ती."
कराची चेंबर ऑफ़ कॉमर्स इंडस्ट्रीज के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट तौसीफ़ अहमद ने कहा कि सेल्स टैक्स हर क्षेत्र में बढ़ा दिया गया है. "इसका मतलब यह है कि उद्योग में इस्तेमाल होने वाला कच्चा माल भी इसके दायरे में आएगा और इंडस्ट्रीज़ की उत्पादन लागत को बढ़ाएगा जो निश्चित रूप से उपभोक्ताओं से वसूल की जाएगी.
उनके अनुसार बढ़ा हुआ सेल्स टैक्स सबसे अधिक आम आदमी को प्रभावित करेगा क्योंकि वही आख़िरी उपभोक्ता होता है.
बढ़ती महंगाई कब रुकेगी?
पाकिस्तान में जनवरी के महीने में महंगाई की दर 27 प्रतिशत से अधिक रही जो 48 वर्षों में देश में महंगाई की सर्वोच्च दर है. महंगाई की दर में होने वाली वृद्धि की सबसे बड़ी वजह देश में खाने-पीने के सामान, डीज़ल और पेट्रोल के दाम में होने वाला बड़ा इज़ाफ़ा है.
डॉक्टर अशफ़ाक़ हसन ख़ान ने कहा कि देश में महंगाई की दर, जो पहले ही लगभग पांच दशकों के सबसे ऊंचे स्तर पर है, में बढ़े हुए सेल्स टैक्स के असर का सही आकलन तो पाकिस्तान में संभव नहीं लेकिन अनुमान है कि महंगाई की दर 30 प्रतिशत से अधिक हो जाएगी.
उनके अनुसार इसमें बड़ी वजह खाने-पीने के सामान की चीज़ों के दाम में होने वाला इज़ाफ़ा और इसके साथ गैस, बिजली, डीज़ल और पेट्रोल के दाम में होने वाली वृद्धि होगी.
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में कारोबार पर कोई नियंत्रण तो है नहीं कि वह दामों का निर्धारण कर सके. एक ओर अतिरिक्त सेल्स टैक्स उपभोक्ताओं के लिए चीज़ों को महंगा करेगा तो दूसरी तरफ़ कारोबारी लोग और दुकानदार अपने हिसाब से चीज़ों को बेचेंगे.
तो महंगाई का यह सिलसिला कैसे थमेगा? इस सवाल पर वह कहते हैं कि जब तक आईएमएफ़ प्रोग्राम में पाकिस्तान शामिल है तो महंगाई की दर बढ़ती रहेगी क्योंकि यह प्रोग्राम इस तरह डिज़ाइन किए जाते हैं कि जिनमें देशों को जकड़ कर वहां की जनता पर महंगाई का अतिरिक्त बोझ डाला जाता है.
साथ में बीबीसी संवाददाता शुमाइला ख़ान
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