पाकिस्तान को डिफॉल्टर होने से बचाने वाली मदद क्यों नहीं मिल रही है?

    • Author, शुमाएला जाफ़री
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, इस्लामाबाद

गहरे आर्थिक संकट से घिरे पाकिस्तान को राहत दिलाने वाली आईएमएफ की मदद फ़िलहाल नहीं आ रही है.

पाकिस्तान और आईएमएफ के बीच बेलआउट के लिए फ़िलहाल कोई समझौता नहीं हो पाया है. पाकिस्तान को डिफॉल्ट से बचाने के लिए ये डील जरूरी है. लेकिन इस पर सहमति नहीं बन पाई है.

पाकिस्तान सरकार से बातचीत के लिए अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) का मिशन 31 जनवरी से ही इस्लामाबाद में मौजूद था.

इसका मकसद पाकिस्तान और आईएमएफ के बीच सरकार की राजकोषीय नीति पर उभरे मतभेदों को दूर करना है.

लेकिन इस पर सहमति न होने से आईएमएफ की ओर से पाकिस्तान को दी जानेवाली 1.1 अरब डॉलर की मदद की किस्त रुक गई है.

पाकिस्तान ने आईएमएफ से 6.5 अरब डॉलर के बेलआउट हासिल करने के सौदे पर दस्तख़्त किए थे.

लेकिन इसकी 1.1 अरब डॉलर की किस्त जारी करने की शर्तों पर सहमति नहीं बन पा रही है.

मिशन का दौरा खत्म करने के बाद आईएमएफ ने जो बयान जारी किया है उसमें कहा गया है कि बेलआउट पैकेज पर आने वाले दिनों में वर्चुअल बातचीत होती रहेगी.

आईएमएफ ने रखी ये शर्त

आईएमएफ ने पाकिस्तान को बता दिया गया है कि उसे ये मदद हासिल करने के लिए क्या-क्या करना होगा. आईएमएफ ने कहा है कि उसे सब्सिडी घटानी होगी और अपना राजस्व स्थायी तौर पर बढ़ाना होगा ताकि आने वाले दिनों में इसका भुगतान असंतुलन की स्थिति खत्म हो सके.

आईएमएफ और पाकिस्तान के बीच बेलआउट के लिए भले ही फ़िलहाल समझौता न हुआ हो लेकिन वित्त मंत्री इशहाक डार ऐसा संकेत देने की कोशिश कर रहे हैं कि बातचीत आगे बढ़ी है.

उनके मुताबिक सरकार को आईएमएफ से समझौते का ड्राफ्ट मिल चुका है, जिसे मेमोरंडम फॉर इकोनॉमिक एंड फाइनेंशियल पॉलिसीज (एमईएफपी) कहा जा रहा है.

उन्होंने कहा,''हम सामान्य प्रक्रिया पर चल रहे हैं. ये कोई अलग बात नहीं है. एमईएफपी ड्राफ्ट मिल चुका है. इस सप्ताहंत में हम इसे देखेंगे और सोमवार को आईएमएफ के साथ एक और बैठक करेंगे.

पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार लगातार घटता जा रहा है. तीन फरवरी को खत्म हुए सप्ताह में यह सिर्फ 2.91 अरब डॉलर का रह गया था.

लेकिन अगले कुछ महीनों के दौरान उसे मूल कर्ज और ब्याज मिला कर 9 अरब डॉलर चुकाने होंगे.

दूसरी ओर से देश में जनवरी में महंगाई पिछले साल की तुलना में 27 फीसदी बढ़ चुकी है. पाकिस्तानी रुपये की कीमत बेतहाशा गिर रही है और इस वजह से उसके सामने कर्ज का पहाड़ खड़ा हो गया है.

रिकार्ड महंगाई से शहबाज़ सरकार दबाव में

आईएमएफ और पाकिस्तान सरकार के बीच बातचीत में सब्सिडी घटाने, सार्वजनिक कर्ज और टैक्स बेस सीमित होने का मामला उठा है. आईएमएफ ने पाकिस्तान सरकार से इन सभी सेक्टरों में स्ट्रक्चरल सुधार करने को कहा है.

लेकिन राजनीतिक तौर पर कमजोर शहबाज़ शरीफ सरकार लगातार आम लोगों पर दबाव बनाए हुए है जो पहले से ही रिकार्ड महंगाई से जूझ रही है.

सरकार मानती है आईएमएफ की ओर से सुझाए गए उपायों को तुरंत लागू करना शुरू कर दिया जाए तो लोगों का गुस्सा बढ़ जाएगा और उसे आने वाले चुनाव में हार का सामना करना पड़ सकता है.

इस मामले की जानकारी रखने वाले सूत्रों का कहना है कि इसी वजह से आईएमएफ और सरकार के बीच बात नहीं बन पा रही है.

दूसरी ओर सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और चीन जैसे दोस्त भी पाकिस्तान को बचाने के लिए आगे नहीं आ रहे हैं.

ये सभी देश आईएमएफ की हरी झंडी का इंतजार कर रहे हैं.

इन देशों ने भी कहा है कि वे आईएमएफ की शर्तें मानने और उसकी नीतियों पर चलने के बाद ही उसकी मदद करेंगे. इनका कहना है कि पाकिस्तान को टैक्स बेस बढ़ाने पर काम करना होगा.

दस दिन की बातचीत के बाद आईएमएएफ ने जो बयान जारी किया है उसके मुताबिक समय पर पाकिस्तान की ओर से निर्णायक नीतियों को लागू करने पर ही बात आगे बढ़ेगी.

अब तक की बातचीत में किन बातों पर सहमति

वित्त मंत्री इशाक डार ने बताया कि आईएमएफ चाहता है कि सरकार तुरंत 170 अरब रुपये के नए टैक्स लगाए. सरकार पूरी कोशिश करेगी इन नए करों का बोझ देश के सबसे कमजोर वर्ग के लोगों पर न पड़े.

उन्होंने ऊर्जा कीमतों (पेट्रोल, डीजल, गैस, बिजली) में भी बढ़ोतरी के भी संकेत दिए. एनर्जी सेक्टर में टारगेटेड सब्सिडी से इतर सब्सिडी को भी कम करने का इरादा है ताकि सर्कुलर कर्ज घट सके. खास कर गैस सेक्टर में .

उनका कहना था कि इस कर्ज को बिल्कुल खत्म कर देना है.

डार ने कहा,'' हम और घाटा नहीं सह सकते. हमें कुछ सेक्टरों में सुधार करने ही होंगे. इसमें पावर सेक्टर में सुधार शामिल हैं. हर साल बिजली उत्पाद पर 3000 अरब रुपये खर्च होते हैं. लेकिन सिर्फ 1800 अरब रुपये की रिकवरी होती है. इससे हमारा सर्कुलर कर्ज बढ़ता ही जा रहा है.''

हालांकि उन्होने सामाजिक सुरक्षा स्कीमों को जारी रखने के संकेत दिए. उनके मुताबिक बेनजीर इनकम सपोर्ट कार्यक्रम को अतिरिक्त 40 अरब रुपये दिए जाएंगे.

ये पैसे आईएमएफ से समझौते के तहत बाढ़ प्रभावित लोगों की मदद के लिए तय की गई अतिरिक्त 360 अरब रुपये की रकम में से दिए जाएंगे.

आईएमएफ चाहता है कि पाकिस्तान मुद्रा विनिमय दर बाजार को तय करने दे. न तो वो इसमें कोई छेड़छाड़ करे और न दरों को कृत्रिम तौर पर नियंत्रित करने के लिए दखल दे.

इशाक डार ने कहा है कि आईएमएफ से बातचीत सकारात्मक रही है. एक बार एमईएफपी फाइनल होने पर आंतरिक प्रक्रिया शुरू होगी.

अब आईएमएफ की एक बैठक वॉशिंगटन मे होगी और फिर एक्जीक्यूटिव बोर्ड से मंजूरी के बाद पाकिस्तान को वित्तीय मदद जारी कर दी जाएगी.

भरोसे का संकट

पाकिस्तान के एक प्रमुख आर्थिक पत्रकार शहबाज़ राना ने बताया कि पाकिस्तान और आईएमएएफ के बीच कुछ फैसलों के लागू करने पर सहमति बन गई है. पाकिस्तान को वो मदद मिल सकती है, जिससे वो डिफॉल्ट से बच सकेगा.

लेकिन वित्त मंत्री कर्ज देने वाली अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों को ये विश्वास दिलाने में नाकाम रहे हैं वो बाकी बची शर्तों को भी धीरे-धीरे लागू करेंगे.

उन्होंने कहा, '' सरकार नैथन पोर्टर की अगुआई में आए आईएमएफ मिशन को इस बात का पूरा भरोसा नहीं दिला पाई हैं. ''

कुछ विश्लेषकों का कहना है कि इस सरकार पर डूबती अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए विशेषज्ञों की सेवा लेने के बजाय वंशवादी राजनीति को आगे बढ़ाने के आरोप लग रहे हैं.

उनका कहना है कि इस सरकार का रिकार्ड सुधारों को लागू करने का ट्रैक रिकार्ड खराब है. जिन नीतियों पर आईएमएफ और सरकार के बीच सहमति बनी थी उन्हें भी लागू नहीं किया जा सका है. जबकि आईएमएफ के लिए समय से और निर्णायक तौर पर ये फैसले लागू करना मायने रखता है.

विश्वसनीयता का यही संकट आईएमएफ और पाकिस्तान सरकार के बीच समझौते को रोक रहा है.

वित्तीय मामलों के जानकारों का कहना है कि आईएमएफ ने कई ऐसी शर्तें रखी हैं जिससे बातचीत में गतिरोध पैदा हो रहा है.

शहबाज़ शरीफ को बगैर पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के नैथन पोर्टर से वर्चुअल मीटिंग कर ये कहना पड़ रहा है कि सरकार अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरी करेगी.

डॉन के पत्रकार खालिक कियानी ने दावा किया है कि सरकार ने आईएमएफ मिशन से कहा है कि सरकार बाकी फैसलों को भी लागू करेगी.

इनमें बिजली की बेसिक दर 7.65 रुपये प्रति यूनिट करना शामिल है. इसके अलावा गैस के रेट में औसतन 100 रुपये प्रति यूनिट की बढ़ोतरी की जाएगी

वो लिखते हैं,''आईएमएफ चाहता है कि जिस तरह पाकिस्तान सरकार का वादा न पूरा करने का रिकार्ड रहा है उसे देखते हुए वो चाहता है कि बिजली और गैस के दाम तुरंत बढ़ाए जाएं.''

हालांकि वित्त मंत्री ने टैक्स दरों के बारे में ब्योरा नहीं दिया है. सिर्फ ये बताया है कि 170 अरब डॉलर के नए टैक्स लगाने पर सहमति ही. इसके लिए जल्द ही एक 'मिनी बजट' लाया जाएगा.

विदेशी मुद्रा भंडार का बुरा हाल

पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार घट कर 2.9 अरब डॉलर का रह गया है. ये पिछले नौ साल का न्यूनतम स्तर है. विशेषज्ञों का कहना है कि ये रिजर्व दो सप्ताह के आयात के लिए भी काफी नहीं है. इसके अलावा सरकार को आने वाले महीनों में अपने कर्ज चुकाने के लिए सात अरब डॉलर की जरूरत होगी.

विदेशी मुद्रा भंडार की खराब स्थिति ने 22 करोड़ की आबादी वाले इस परमाणु शक्ति संपन्न की बेचैनी बढ़ा दी है.

पाकिस्तान को तत्काल आईएमएएफ से 1.1 अरब डॉलर की मदद की जरूरत है. उसे अपने सहयोगी देशों से भी मदद चाहिए . वरना वो डिफॉल्ट की राह पर बढ़ सकता है.

पाकिस्तान में वित्तीय संकट, राजनीतिक अस्थिरता और चरमपंथी खतरों ने अंतरराष्ट्रीय ताकतों के भारी चिंता में डाल दिया है. क्योंकि पाकिस्तान में जब-जब ऐसे हालात पैदा हुए हैं सरकार पर सेना का कब्जा होता रहा है.

वित्त मंत्री इशाक डार ने बार-बार कहा है कि देश में हालात नियंत्रण में हैं. उनका कहना है कि स्टेट बैंक चीजों को अच्छी तरह संभालने में लगा है.

पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार इतना कम इसलिए है कि क्योंकि ये कर्ज चुकाने की अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा कर रहा है.

डिफॉल्ट का खतरा कितना बड़ा

वित्त मंत्री ने कहा कि पाकिस्तान को जो पैसा रुका हुआ है वो उसके पास जरूर पहुंचेगा. लेकिन उनके इस भरोसे से गिरते शेयर बाजार को कोई राहत नहीं मिली है.

आईएमएफ स्टाफ एग्रीमेंट में देरी की ख़बरों की वजह से पाकिस्तान स्टॉक एक्सचेंज का सूचकांक 568 .21 अंक गिर गया.

विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक समझौता नहीं हो जाता तब तक शेयर बाजार गिरता रहेगा.

वित्त मंत्री ने कहा है कि सोमवार को आईएमएफ के प्रतिनिधियों से एक और बैठक होगी. इसके बाद अंतिम समझौता होने में थोड़ा और समय लगता है.

लेकिन जब तक इस समझौते पर पक्की मुहर नहीं लग जाती तब तक पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर अनिश्चिचतता और डिफॉल्ट का खतरा मंडराता रहेगा.

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