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जर्मनी ने भारत के नाराज़ होने के बाद कश्मीर पर बदला अपना रुख़: प्रेस रिव्यू
जर्मनी की विदेश मंत्री एनालीना बेयरबॉक ने भारत की ओर से नाराज़गी जताए जाने के बाद कश्मीर मुद्दे पर अपना रुख़ बदल लिया है. एनालीना बेयरबॉक सोमवार को अपनी दो दिवसीय यात्रा पर भारत पहुंच रही हैं.
अंग्रेजी अख़बार द हिंदू में प्रकाशित ख़बर के मुताबिक़, बेयरबॉक ने अपने रुख़ में बदलाव लाते हुए कश्मीर को एक द्विपक्षीय मुद्दा बताया है.
इससे पहले अक्तूबर महीने के आख़िरी हफ़्ते में उन्होंने पाकिस्तानी विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो ज़रदारी के साथ जर्मनी में साझा प्रेस वार्ता के दौरान इस मुद्दे में संयुक्त राष्ट्र के ज़रिए बातचीत का समर्थन किया था.
जम्मू-कश्मीर से जुड़े एक सवाल के जवाब में एनालीना बेयरबॉक ने कहा था, "मेरा मानना है कि दुनिया में हर देश की संघर्षों को समाप्त करने और ये सुनिश्चित करने में एक भूमिका है कि हम शांति से भरी दुनिया में रहें.''
मेरी अपील सिर्फ़ यूरोप की स्थिति को लेकर नहीं है, जहां रूस ने यूक्रेन के ख़िलाफ़ युद्ध छेड़ा हुआ है. हमारी ज़िम्मेदारी है कि हम दूसरे क्षेत्रों को भी देखें जहाँ तनाव और युद्ध की स्थिति बनी हुई है.
मैं कह सकती हूँ कि बिल्कुल कश्मीर की स्थिति के संबंध में जर्मनी की भूमिका और ज़िम्मेदारी है. हालांकि हम शांतिपूर्ण समाधान के लिए संयुक्त राष्ट्र की बातचीत का समर्थन करते हैं."
भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया जारी करते हुए कहा था कि ''वैश्विक समुदाय के सभी ईमानदार देशों पर अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद और विशेष रूप से सीमापार से अंजाम दिए जाने वाले आतंकवाद को ख़त्म करने की ज़िम्मेदारी है. जम्मू और कश्मीर दशकों से ऐसे ही एक आतंकवादी अभियान का ख़ामियाज़ा भुगत रहा है जो अब भी जारी है.''
इसके बाद भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर और एनालीना बेयरबॉक की फ़ोन बातचीत भी हुई थी.
इसके साथ ही जर्मनी के राजदूत की ओर से कहा गया था कि इस मुद्दे पर जर्मनी के रुख़ में बदलाव नहीं हुआ है.
लेकिन इस विवाद के दो महीने बाद एनालीना बेयरबॉक सोमवार को भारतीय विदेशमंत्री एस जयशंकर के साथ मुलाक़ात कर सकती हैं. माना जा रहा है कि इस मुलाक़ात में इस विवाद पर भी बातचीत हो सकती है.
द हिंदू अख़बार को दिए एक विशेष इंटरव्यू में एनालीना बेयरबॉक ने कहा है, "मुझे ये स्पष्ट करने दें कि कश्मीर के मुद्दे पर जर्मनी के रुख़ में किसी तरह का बदलाव नहीं आया है. हम मानते हैं कि कश्मीर संघर्ष भारत और पाकिस्तान के बीच एक द्विपक्षीय मुद्दा है.
हम दोनों पक्षों से अपील करते हैं कि संवाद के ज़रिए मतभेदों को दूर किया जाए. पिछले साल लाइन ऑफ़ कंट्रोल पर संघर्ष विराम को लेकर बनी सहमति एक अहम कदम था."
ईरान ने भारत से चाय और बासमती चावल ख़रीदना बंद किया
ईरानी आयातकों ने भारत से चाय और बासमती चावल जैसी चीज़ों के आयात के लिए नए अनुबंध करना बंद कर दिया है. अब तक ये स्पष्ट नहीं है कि ईरानी आयातकों ने ये फ़ैसला क्यों लिया. लेकिन नए अनुबंधों पर हस्ताक्षर होना बंद हो गए हैं.
अंग्रेज़ी अख़बार द इकोनॉमिक टाइम्स में छपी ख़बर के मुताबिक़, भारतीय निर्यातक मानते हैं कि इस बदलाव के लिए ईरान में जारी विरोध प्रदर्शन एक कारण हो सकते हैं क्योंकि इनकी वजह से होटल और दुकानें आदि नहीं खुल पा रही हैं.
वहीं, भारतीय निर्यातकों का एक समूह ये भी मानता है कि भारत और ईरान के बीच भारतीय मुद्रा में व्यापार होने से जुड़ा समझौता हो रहा है जिसमें वक़्त लगने की वजह से ये ठहराव आ सकता है.
इस समझौते का असर भारत की ओर से निर्यात की जाने वाली चाय और बासमती चावल जैसी चीज़ों पर पड़ेगा.
अख़बार के मुताबिक़, ईरान हर साल भारत से 3 से 3.5 करोड़ किलोग्राम चाय और 15 लाख किलोग्राम 'बासमती चावल' आयात करता है.
ईरान को चाय निर्यात करने वाली भंसाली एंड कंपनी के प्रबंध निदेशक अनीश भंसाली ने अख़बार से कहा है, ''अब तक ये स्पष्ट नहीं है कि इन अनुबंधों का होना अचानक क्यों रुक गया है.
हमने ईरानी आयातकों से भी पूछा है, लेकिन उनकी ओर से कोई भी स्पष्ट जवाब नहीं आया है. हमने चाय बोर्ड को इस बारे में जानकारी दे दी है और उनकी ओर से किसी स्पष्टीकरण का इंतज़ार कर रहे हैं.''
मल्लिकार्जुन खड़गे ने कांग्रेस पदाधिकारियों को दी चेतावनी
कांग्रेस के नए अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने बीते रविवार कांग्रेस संचालन समिति की पहली बैठक में पार्टी के राज्य प्रभारियों से अगले 30 से 90 दिनों के अंदर लोगों के मुद्दों पर आंदोलन खड़ा करने के लिए एक रोडमैप तैयार करने को कहा है.
इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित ख़बर के मुताबिक़, खड़गे ने कहा, "मेरा मानना है कि पार्टी और देश के प्रति हमारी ज़िम्मेदारी का सबसे बड़ा हिस्सा ऊपर से नीचे तक संगठनात्मक जवाबदेही है. अगर कांग्रेस संगठन मज़बूत होगा, जवाबदेह होगा, लोगों की उम्मीदों पर खरा उतरेगा, तभी हम चुनाव जीत पाएंगे और देश की जनता की सेवा कर पाएंगे."
इस बैठक में खड़गे ने कांग्रेस पार्टी के पदाधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा है कि जो अपनी ज़िम्मेदारी निभाने में समर्थ नहीं हैं, उन्हें अपने सहयोगियों के लिए जगह खाली करनी चाहिए.
राहुल गांधी के नेतृत्व वाली भारत जोड़ो यात्रा को राष्ट्रीय आंदोलन करार देते हुए खड़गे ने कहा कि कांग्रेस से जुड़े लोगों को सत्तारूढ़ ताक़तों के ख़िलाफ़ संघर्ष करना चाहिए जो घृणा के बीज बोती हैं और विभाजन का फल काटती हैं.
इसके साथ ही इस बैठक में ये तय किया गया है कि पार्टी का 85वां अधिवेशन अगले साल फ़रवरी में रायपुर में होगा जहां पार्टी के संविधान के मुताबिक़ नई कांग्रेस कार्यकारिणी समिति का गठन होगा.
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