पेशावर धमाका: 'मस्जिद पहुंचा तो कोहराम मचा था और दर्जनों लोग ज़ख़्मी थे'

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    • Author, मोहम्मद ज़ुबैर ख़ान & अज़ीजुल्लाह ख़ान
    • पदनाम, बीबीसी उर्दू

पाकिस्तान के ख़ैबर पख़्तूनख़्वा सूबे की राजधानी पेशावर की पुलिस लाइन की मस्जिद में होने वाले धमाके में कम से कम 87 लोगों की मौत हुई है और मस्जिद की इमारत को भी नुक़सान पहुंचा है.

मारे गए लोगों में अधिकतर पुलिस कर्मचारी या अधिकारी थे जो मस्जिद में ज़ुहर (दोपहर) की नमाज़ अदा कर रहे थे.

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने कहा है कि चरमपंथी पाकिस्तान की रक्षा कर रहे लोगों को निशाना बना कर भय और आतंक का माहौल पैदा करना चाह रहे हैं.

शुरुआत में पाकिस्तान तालिबान के एक कमांडर ने इस धमाके को अंजाम देने का दावा किया था. पर बाद में संगठन ने इससे इनकार कर दिया.

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कितना ज़बर्दस्त था धमाका

पुलिस के अनुसार, धमाका इतना ज़बर्दस्त था कि मस्जिद का एक हिस्सा धराशायी हो गया और उसके सामने मौजूद कैंटीन की इमारत को भी नुक़सान पहुंचा है.

पुलिस लाइन के इलाक़े में पुलिस अफ़सरों और प्रशासन के कार्यालय और पुलिस अधिकारियों के आवास भी होते हैं.

पुलिस लाइन शहर के एक महत्वपूर्ण हाइवे ख़ैबर रोड पर है और इससे लगी सड़क से एक रास्ता मुख्यमंत्री आवास और गवर्नर हाउस की ओर जाता है जबकि इसकी दाईं तरफ़ सिविल सेक्रेटेरिएट की इमारत है.

पुलिस लाइन के पीछे की ओर पेशावर की सेंट्रल जेल भी है. पुलिस लाइन का इलाक़ा एक हाई सिक्योरिटी ज़ोन माना जाता है, यहां आने जाने वाले लोगों की तलाशी ली जाती है और विभिन्न जगहों पर पुलिस ने नाकेबंदी भी कर रखी है.

ख़ैबर रोड पर कुछ आगे जाएं तो वहां ज्यूडिशियल कॉम्प्लेक्स और उसके साथ पेशावर हाईकोर्ट की बिल्डिंग भी है जबकि उसके सामने कोर कमांडर हाउस और सरीना होटल की इमारत है.

पेशावर की पुलिस लाइन मस्जिद में होने वाले धमाके के बाद पुलिस लाइन, लेडी रीडिंग अस्पताल और इलाक़े में मौजूद लोगों ने धमाके और इसके बाद के दृश्यों के बारे में बीबीसी से बात की है.

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'वहां पर चीख़-पुकार थी और अनगिनत ज़ख़्मी थे'

ख़ैबर पख़्तूनख़्वा में जमात-ए-इस्लामी के पूर्व संसदीय नेता इनायतुल्ला ख़ान धमाके के समय पुलिस लाइन के अंदर मौजूद थे.

इनायतुल्ला बताते हैं, "जिस समय धमाका हुआ, मैं कैपिटल सिटी पुलिस के दफ़्तर में मौजूद था. धमाका बहुत ज़ोरदार और डरावना था जिसने सारे दरो-दीवार हिला कर रख दिए थे."

उन्होंने बताया, "सीसीपीओ (कैपिटल सिटी पुलिस ऑफ़िसर) एजाज़ ख़ान अपने दफ़्तर में मौजूद थे. जब धमाके की आवाज़ आई तो वह घटनास्थल की ओर चल पड़े और मैं भी उनके पीछे चल पड़ा."

इनायतुल्ला कहते हैं, "जब मैं घटनास्थल पर पहुंचा तो वहां कोहराम मचा हुआ था. मस्जिद का वह हिस्सा जहां पर मेहराब होती है वह ज़मीन पर आ गिरा था. वहां पर चीख़ पुकार मची थी और दर्जनों लोग ज़ख़्मी थे."

उनका कहना था कि पुलिस लाइन में पुलिस की गाड़ियां मौजूद थीं और पुलिस ने तुरंत सायरन बजाना शुरू कर दिया था.

इनायतुल्ला ख़ान का कहना था, "मुझे बरामदे और मस्जिद के पिछले हिस्से में नमाज़ अदा करने वालों ने बताया कि मस्जिद में नमाज़ियों की बड़ी संख्या मौजूद थी और अगली पंक्तियों में मौजूद लोग सबसे अधिक प्रभावित हुए थे."

उनका कहना था कि उस समय वहां पर कुछ और लोग भी पहुंच गए जो रो रहे थे और बता रहे थे कि उनके दोस्त और रिश्तेदार मलबे के नीचे दबे हुए हैं जो फ़ोन कर कह रहे हैं कि उनकी मदद की जाए.

उन्होंने बताया, "यह धमाका ऐसी जगह पर हुआ है जो बेहद सुरक्षित समझा जाता है, जहां पर प्रशासन के बड़े अफ़सरों के दफ़्तर हैं. मुझे लगता है कि यह बहुत ही बड़ा संदेश दिया गया है कि हम ऐसी जगह पर भी पहुंच सकते हैं."

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'अस्पताल में एंबुलेंस पर एंबुलेंस आ रही थी'

लेडी रीडिंग अस्पताल में मौजूद मुजीबुर्रहमान ने बीबीसी से बात करते हुए कहा कि उस वक़्त अस्पताल में कोहराम मचा हुआ था, एंबुलेंस पर एंबुलेंस आ रही थी.

"अस्पताल की इमरजेंसी में सिर्फ़ घायलों को अंदर जाने की इजाज़त दी जा रही है जबकि लोगों की एक बड़ी तादाद अस्पताल के बाहर खड़ी है."

उन्होंने बताया कि भीड़ में कई लोग ऐसे भी हैं जिनके जानने वाले और रिश्तेदार धमाके के समय पुलिस लाइन में थे और वह उनके बारे में जानकारी लेना चाह रहे हैं, लेकिन किसी को भी इमरजेंसी के अंदर जाने की अनुमति नहीं दी जा रही, सिवाय उन लोगों के जो ब्लड डोनेशन के लिए जाना चाह रहे हैं.

इसी शहर के रहने वाले ज़ाहिद आफ़रीदी धमाके के समय किसी काम के लिए पुलिस लाइन के पास मौजूद थे. उन्होंने बताया कि उन्हें इन धमाकों की आवाज़ घटनास्थल से लगभग 500 मीटर दूर सुनाई दी.

उन्होंने कहा कि 'धमाके इतने तेज़ थे कि हमने समझा कि धमाका हमारे पास ही हो रहा है.'

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ज़ाहिद आफ़रीदी कहना था, "धमाके के तुरंत बाद धूल-गर्द और धुआं उठने लगा. घटना के समय मेरे साथ दो लोग और भी थे."

"थोड़ी देर के लिए हम लोग बिल्कुल घबरा गए थे. समझ में ही नहीं आ रहा था कि क्या हुआ. इसके साथ ही भगदड़ मच गई थी."

उनका कहना था कि थोड़ी देर में एंबुलेंस की आवाज़ आने लगी और फिर पुलिस की भारी संख्या घटनास्थल पर पहुंच गई जिसने सारे इलाक़े को अपने घेरे में ले लिया था.

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