अरशद शरीफ़ः पाकिस्तान के पत्रकार की कीनिया में हत्या पर गहराया रहस्य

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- Author, इमैनुएल इगुनज़ा
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़, नैरोबी
कीनिया में पुलिस की गोली से मारे गए पत्रकार अरशद शरीफ़ के देश पाकिस्तान में इसे लेकर बहुत आक्रोश है. लोग हैरान हैं कि आख़िर ऐसा कैसे हो सकता है.
पाकिस्तानी सेना के जानेमाने आलोचक रहे अरशद शरीफ़ के जनाज़े में गुरुवार को हज़ारों की संख्या में लोग शामिल हुए.
पाकिस्तानी सरकार के मौजूदा विरोधियों का मानना है कि अरशद शरीफ़ पाकिस्तान में रची गई सुनियोजित साजिश का शिकार बने हैं.
लेकिन कीनिया पुलिस ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि 49 वर्षीय शरीफ़ को चलती गाड़ी में पुलिस ने ग़लत पहचान के मामले में गोली मारी थी.
वहीं पाकिस्तान की ओर से बताया गया है कि इस हत्या की जांच में मदद के लिए कुछ जांचकर्ताओं को कीनिया भेजा गया है.
क्या है पूरा मामला?
रविवार की देर शाम, शरीफ़ टोयोटा की लैंड क्रूज़र में बतौर पैसेंजर सवार हो कर कीनिया की राजधानी नैरोबी से 30 किलोमीटर दूर एक गांव की सड़क पर थे. उसी दौरान पुलिस ने गोलियां चलाईं जिसमें पत्रकार शरीफ़ की मौत हो गई.
लेकिन अब तक ये स्पष्ट नहीं है कि पुलिस ने गोली क्यों चलाई.
पुलिस ने इस फ़ायरिंग को लेकर विरोधाभासी बयान जारी किया है.
एक बयान में पुलिस का कहना है कि शरीफ़ उस गाड़ी में थे जिसके बारे में एक ग़लत रिपोर्ट थी कि वो एक चोरी का वाहन है.

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पुलिस रिपोर्ट के मुताबिक़ अधिकारी उस लापता वाहन की तलाश में थे, जब उन्होंने इस गाड़ी पर गोली चलाई.
रिपोर्ट के अनुसार शरीफ़ के लैंड क्रूज़र के ड्राइवर ने एक रोड ब्लॉक पर नियमों का उल्लंघन किया जिसके बाद पुलिस अधिकारियों ने उस भागती कार पर कम से कम आठ बार गोली चला. इसी दौरान पत्रकार अरशद शरीफ़ की मौत हो गई.
इस घटना पर पुलिस के एक अन्य बयान के मुताबिक़, गाड़ी के अंदर से एक व्यक्ति ने पहले गोली चलाई जिसके जवाब में पुलिस अधिकारियों को गोली चलानी पड़ी. पुलिस ने बताया कि उनके एक अधिकारी को भी हाथ में गोली लगी है.

अरशद शरीफ़ के बारे में ख़ास बातें-
22 फ़रवरी 1973 को अरशद शरीफ़ का जन्म पाकिस्तान के कराची में हुआ.
अरशद के पिता पाकिस्तानी नेवी में कमांडर थे.
इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज्म उनकी खासियत थी.
अरशद शरीफ़ को 23 मार्च को पाकिस्तान सरकार की ओर से प्राइड ऑफ़ परफॉर्मेंस अवॉर्ड दिया गया था.
23 अक्टूबर 2022 को कीनिया के नैरोबी में अरशद को गोली मारी गई.

जांच में दो अहम सवाल उठ रहे हैं
पहला- टोयोटा लैंड क्रूज़र एक बड़ी चार चक्के वाली कार है, इसकी पहचान में पुलिस ने ग़लती कैसे की. जिस कार की चोरी की रिपोर्ट कराई गई थी वो एक मर्सिडीज बेंज़ स्प्रिंटर है और यह एक डिलिवरी वैन है?
दूसरा- पुलिस ने गाड़ी को रोकने के लिए उसके टायर पर गोली क्यों नहीं चलाई?
पुलिस की आंतरिक मामलों की समिति के सामने भी ये वो सवाल होंगे जिस पर उन्हें गौर करना होगा. साथ ही यह पुलिस की स्वतंत्र निगरानी करने वाले प्राधिकरण इंडिपेंडेंट पुलिस ओवरसाइट अथॉरिटी के लिए भी यह अहम होगा. ये दोनों ही ये देख रहे हैं कि इस मामले में क्या हुआ था?
अरशद शरीफ़ कीनिया में क्यों थे?
यह स्पष्ट नहीं है कि शरीफ़ पहली बार कीनिया कब पहुंचे और वे बिजनेस या टूरिस्ट वीज़ा पर वहां ट्रैवल कर रहे थे?
हालांकि ये पता है कि वो पाकिस्तान से अगस्त में बाहर गए थे और संयुक्त अरब अमीरात और संभवतः ब्रिटेन में भी रहे.
शरीफ़ पूर्व प्रधानमंत्री इमरान ख़ान के मुखर समर्थक के रूप में जाने जाते थे और पाकिस्तान छोड़ने से पहले उन्होंने उत्पीड़न की शिकायत की थी.

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उनकी मौत के बाद वकील शोएब रज़्ज़ाक ने कहा कि पाकिस्तानी सरकार ने दुबई में अधिकारियों से उन्हें (शरीफ़ को) पाकिस्तान प्रत्यर्पण करने का अनुरोध किया था.
रज़्ज़ाक ने कहा, "इसकी जानकारी मिलते ही शरीफ़ ने कीनिया से अपनी सुरक्षा की मांग की. यह जानते हुए कि वहां उन्हें आसानी से वीज़ा मिल सकता था और वहां पहले से उनके दोस्त और कई संपर्क थे जो उनके होस्ट हो सकते थे."
अपनी मौत के समय शरीफ़ कार में एक और पाकिस्तानी नागरिक के साथ थे, जिनके बारे में माना जा रहा है कि वो अब कीनिया में ही रहते हैं. माना जा रहा है कि शरीफ़ इसी दोस्त के साथ कीनिया में रह रहे थे.
लेकिन ये भी हो सकता है कि इन दोनों को बीच काम को लेकर संपर्क था.
कीनिया के खोजी पत्रकार जॉन एलन नामू ने बताया कि शरीफ़ एक डॉक्युमेंट्री पर काम कर रहे थे जो अभी रिलीज़ होनी बाकी थी. उसे लेकर ही नामू ने उनका इंटरव्यू लिया था. इसके ट्रेलर से पता चलता है कि ये पाकिस्तान में भ्रष्टाचार से जुड़ी एक डॉक्युमेंट्री थी.
ये स्पष्ट नहीं है कि कीनिया से उसका क्या लिंक है. बाद में नामू ने यह भी साफ़ किया कि हालांकि ये इंटरव्यू कीनिया में हुआ था लेकिन वास्तव में वो शरीफ़ से नहीं मिले थे.
क्या टार्गेटेड किलिंग में कीनियाई पुलिस शामिल रही है?
शरीफ़ की हत्या एक दुर्भाग्यपूर्ण मामला हो सकता है लेकिन उनकी मौत और हाल ही में दो भारतीयों और उनके ड्राइवर के लापता होने के मामले में हुई नौ पुलिसवालों की गिरफ़्तारी ने कीनिया पुलिस सेवा के दामन पर फिर एक दाग लगा दिया है.
दशकों से, पुलिस में विशिष्ट या इलीट स्क्वॉड, जैसे कि- अब भंग कर दिए गए स्पेशल सर्विस यूनिट (एसएसयू), पर संदिग्धों के फ़र्जी मुठभेड़, अपहरण और उत्पीड़न के आरोप लगते रहे हैं.
यह मामला एक खुले रहस्य की तरह से है. हाल ही में पुलिस के अत्याचारों पर तब खुल कर बात हुई जब नवनिर्वाचित राष्ट्रपति विलियम रूटो ने एसएसयू को बंद करने की घोषणा की.
अंतरराष्ट्रीय और स्थानीय एनजीओ के संघ ने अपनी स्वतंत्र जांच में 600 से अधिक हत्याओं को इस स्पेशल सर्विस यूनिट से जोड़ा है.

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कुछ पुलिस अधिकारियों पर ये भी आरोप है कि वो अपनी बंदूकें अपराधियों के हाथों में देकर इस तरह की हत्याएं करवाते रहे हैं. लेकिन इस तरह के आरोपों के मामलों में अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई है.
दो भारतीय नागरिकों के लापता होने के मामले में नौ पुलिसवालों की गिरफ़्तारी को एक ऐतिहासिक घटना के रूप में देखा गया है. हालांकि फिलहाल ये केवल आरोप हैं अब तक कोई अपराध साबित नहीं हुआ है.
सरकार के प्रखर आलोचकों ने भी इसे पुलिस की ज़्यादतियों को निशाने पर लेने की दिशा में पहला कदम बताते हुए इसका सराहना की है.
शुक्रवार को कीनिया के चीफ़ प्रॉसिक्यूटर (मुख्य अभियोजक) ने कहा कि 2017 के चुनाव प्रचार के दौरान और बाद मानवता के ख़िलाफ़ किए गए अपराधों के सिलसिले में कई वरिष्ठ पुलिसकर्मियों पर आपराधिक मामले चलाए जा सकते हैं, इनमें एक बच्चे की हत्या का मामला भी शामिल है.
शरीफ़ को कोई क्यों मारना चाहेगा?
पूर्व प्रधानमंत्री इमरान ख़ान के समर्थक और सेना के आलोचक के रूप में शरीफ़ ने कई दुश्मन बना लिए थे. पाकिस्तान छोड़ने से पहले उन्हें संभवतः राजद्रोह का सामना करना पड़ा और टीवी पर ये कहने पर कि अप्रैल में इमरान ख़ान को हटाए जाने में सेना शामिल थी, उनके कार्यक्रम पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया था.
उनकी हत्या को लेकर कई आरोप लग रहे हैं, कई जानी मानी हस्तियों ने अपनी थ्योरी बताने के लिए प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन भी किया है.
इमरान ख़ान सरकार में कभी मंत्री रह चुके फ़ैसल वावड़ा ने आरोप लगाया कि भले ही शरीफ़ की हत्या कीनिया में हुई है लेकिन उनकी योजना पाकिस्तान में बनाई गई थी- हालांकि अपनी बात को साबित करने के लिए न तो उन्होंने कोई आंकड़े पेश किए और न ही कोई सबूत ही रखे.
ख़ुद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने कहा कि उन्हें इस साल की शुरुआत में शरीफ़ को मारने की साजिश का पता चला था, जिस पर उन्होंने शरीफ़ को पाकिस्तान छोड़ने का सुझाव दिया था.
वहीं सैन्य ख़ुफ़िया प्रमुख लेफ़्टिनेंट जनरल नदीम अहमद अंजुम ने एक अप्रत्याशित कदम उठाते हुए पत्रकारों को संबोधित किया और उन सभी संभावित लोगों के नाम रखे जो शरीफ़ की गतिविधियों के बारे में जानते थे. उका दावा था कि ये लोग उनकी (शरीफ़ की) मौत से जुड़े हो सकते हैं. इसमें मीडिया की वरिष्ठ हस्तियां भी शामिल थीं.
उन्होंने कहा कि सेना से उनकी जान को कोई ख़तरा नहीं था.
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